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केन के गहरे पानी में फंसे दो बच्चे डूबने से बचे
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बांदा। पोकलैंड मशीन के खनन से केन नदी के गहरे पानी में दो बच्चे फंस गए। वहां मौजूद केवटों ने उन्हें बाहर निकालकर जिला अस्पताल पहुंचाया। घटना से बच्चे सहमे हैं। ग्रामीणों ने रोष जताया कि मशीनों से पानी के अंदर से बालू निकालने पर नदी में गहरे कुएं बन गए हैं। डूबने की अक्सर घटनाएं हो रही हैं।
घटना मटौंध थाना क्षेत्र के भूरागढ़ पुलिस चौकी अंतर्गत दुरेड़ी गांव स्थित बालू खदान की है। शहर कोतवाली के इंदिरा नगर निवासी व स्टेट बैंक कर्मी महेश कुमार अपनी बेटी तमन्ना (11) व बेटे राजू (12) और बेटे के दोस्त विकास (12) पुत्र सुरेंद्र कुमार (कंचन पुरवा) को लेकर शनिवार की छुट्टी मनाने मोहन पुरवा स्थित अपने पैतृक गांव गया था। बच्चों की जिद पर वह करीब 12 बजे उन्हें लेकर केन नदी स्थित दुरेड़ी घाट आ गया। सभी नदी में नहाने लगे।
नजदीक में ही पोकलैड मशीन केन नदी की जलधारा से बालू निकाल रही थी। तभी बालू निकलने से नहा रहे तमन्ना व विकास गहरे पानी में फंस गए। राजू बच निकला। पिता महेश के शोर मचाने पर वहां मौजूद केवटों ने दोनों को नदी से बाहर निकाला और गंभीर हालत में उन्हें जिला अस्पताल पहुंचाया। डाक्टरों के मुताबिक, उनकी हालत में सुधार है।
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घटना को लेकर ग्रामीणों में गहरा आक्रोश है। परिजनों और ग्रामीणों का कहना है कि पोकलैंड मशीन से मोरंग का खनन होने से नदियों में बड़े-बड़े गड्ढे हो गए हैं। आए दिन इन गड्ढों में लोगों के डूबने की घटनाएं हो रही हैं। खनन पट्टाधारक खुलेआम मानकों का उल्लंघन कर रहे हैं। दिन-रात नदी पोकलैंड मशीनों से नदी की जलधारा से बालू निकाली जा रही है। इससे नदी के अस्तित्व के साथ जान का भी खतरा बना है।
खनन से तीन मजदूरों की जा चुकी जान
बांदा। मशीनों से बालू की गहरी खुदाई का सिलसिला आम है। हाल ही में 5 मार्च को पैलानी क्षेत्र में बालू टीला ढहने से तीन मजदूर महेश (20), बंटू श्रीवास (19) व चिरइया यादव (22) की दबकर मौत हो गई थी। ये सभी कुकुवाखास गांव के थे। यहां भी नदी किनारे मशीनों से खनन किए जाने पर गहरी खाईं हो गई थी। इस घटना को लोग अभी भूले नहीं थे, शनिवार को तीन बच्चों की जलसमाधि होते बच गई। इसके पूर्व भी कई घटनाएं हो चुकी हैं।
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घटना मटौंध थाना क्षेत्र के भूरागढ़ पुलिस चौकी अंतर्गत दुरेड़ी गांव स्थित बालू खदान की है। शहर कोतवाली के इंदिरा नगर निवासी व स्टेट बैंक कर्मी महेश कुमार अपनी बेटी तमन्ना (11) व बेटे राजू (12) और बेटे के दोस्त विकास (12) पुत्र सुरेंद्र कुमार (कंचन पुरवा) को लेकर शनिवार की छुट्टी मनाने मोहन पुरवा स्थित अपने पैतृक गांव गया था। बच्चों की जिद पर वह करीब 12 बजे उन्हें लेकर केन नदी स्थित दुरेड़ी घाट आ गया। सभी नदी में नहाने लगे।
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नजदीक में ही पोकलैड मशीन केन नदी की जलधारा से बालू निकाल रही थी। तभी बालू निकलने से नहा रहे तमन्ना व विकास गहरे पानी में फंस गए। राजू बच निकला। पिता महेश के शोर मचाने पर वहां मौजूद केवटों ने दोनों को नदी से बाहर निकाला और गंभीर हालत में उन्हें जिला अस्पताल पहुंचाया। डाक्टरों के मुताबिक, उनकी हालत में सुधार है।
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घटना को लेकर ग्रामीणों में गहरा आक्रोश है। परिजनों और ग्रामीणों का कहना है कि पोकलैंड मशीन से मोरंग का खनन होने से नदियों में बड़े-बड़े गड्ढे हो गए हैं। आए दिन इन गड्ढों में लोगों के डूबने की घटनाएं हो रही हैं। खनन पट्टाधारक खुलेआम मानकों का उल्लंघन कर रहे हैं। दिन-रात नदी पोकलैंड मशीनों से नदी की जलधारा से बालू निकाली जा रही है। इससे नदी के अस्तित्व के साथ जान का भी खतरा बना है।
खनन से तीन मजदूरों की जा चुकी जान
बांदा। मशीनों से बालू की गहरी खुदाई का सिलसिला आम है। हाल ही में 5 मार्च को पैलानी क्षेत्र में बालू टीला ढहने से तीन मजदूर महेश (20), बंटू श्रीवास (19) व चिरइया यादव (22) की दबकर मौत हो गई थी। ये सभी कुकुवाखास गांव के थे। यहां भी नदी किनारे मशीनों से खनन किए जाने पर गहरी खाईं हो गई थी। इस घटना को लोग अभी भूले नहीं थे, शनिवार को तीन बच्चों की जलसमाधि होते बच गई। इसके पूर्व भी कई घटनाएं हो चुकी हैं।