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Banda News: जहां जगह मिले वहां कराओ की तर्ज पर ट्रामा सेंटर में इलाज
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बांदा। जिला अस्पताल के ट्राॅमा सेंटर में जहां जगह मिले, वहां कराओ इलाज की तर्ज पर मरीजों का इलाज किया जा रहा है। कमोवेश यही स्थिति हर दिन होती है। बुधवार को भी ट्राॅमा सेंटर में दोपहर के समय बरामदा मरीजों से फुल रहा। जमीन पर लेटकर मरीजों ने बोतलें चढ़वाई। ट्राॅमा सेंटर के सभी बेड फुल होने से यह स्थिति पैदा हुई है।
बारिश और उमस भरी गर्मी में जिला अस्पताल में मरीजों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। त्वरित इलाज के लिए खोले गए ट्राॅमा सेंटर में मरीजों की भरमार है। यहां बुधवार को मरीजों की संख्या खासी होने से मरीजों को ट्रामा सेंटर के बरामदे में लिटाकर बोतलें चढ़ाई गईं। बुधवार को ट्रामा सेंटर में बुखार और डायरिया के 13 मरीज भर्ती किए गए। इनमें कटरा निवासी शिवानी (18), महोखर निवासी कल्लू (53), बंगालीपुरा निवासी रामचरन (65), सिविल लाइन निवासी सोना देवी (22), सौंता स्योंढ़ा निवासी करन (7), खुरहंड निवासी श्रीमनी (22), बिलबई निवासी महेश (40), बंगालीपुरा निवासी अलीजा (19), सर्वोदय नगर निवासी प्रियांसी (13), पिंडखर गांव निवासी सलोनी (3), खुरहंड गांव निवासी मायादेवी (60), मऊ गांव निवासी उदयभान (48) हैं।
जिला अस्पताल का ट्राॅमा सेंटर 22 बेड का है। मरीजों की संख्या बढ़ने की वजह से मरीजों को आई वार्ड में शिफ्ट किया जाना चाहिए था। इस अव्यवस्था को दिखवा रहे हैं। मरीजों का बरामदे की जमीन में लिटाकर इलाज नहीं कराना चाहिए था। -डॉ. एसएन मिश्र, सीएमएस, जिला अस्पताल बांदा।
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बारिश और उमस भरी गर्मी में जिला अस्पताल में मरीजों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। त्वरित इलाज के लिए खोले गए ट्राॅमा सेंटर में मरीजों की भरमार है। यहां बुधवार को मरीजों की संख्या खासी होने से मरीजों को ट्रामा सेंटर के बरामदे में लिटाकर बोतलें चढ़ाई गईं। बुधवार को ट्रामा सेंटर में बुखार और डायरिया के 13 मरीज भर्ती किए गए। इनमें कटरा निवासी शिवानी (18), महोखर निवासी कल्लू (53), बंगालीपुरा निवासी रामचरन (65), सिविल लाइन निवासी सोना देवी (22), सौंता स्योंढ़ा निवासी करन (7), खुरहंड निवासी श्रीमनी (22), बिलबई निवासी महेश (40), बंगालीपुरा निवासी अलीजा (19), सर्वोदय नगर निवासी प्रियांसी (13), पिंडखर गांव निवासी सलोनी (3), खुरहंड गांव निवासी मायादेवी (60), मऊ गांव निवासी उदयभान (48) हैं।
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जिला अस्पताल का ट्राॅमा सेंटर 22 बेड का है। मरीजों की संख्या बढ़ने की वजह से मरीजों को आई वार्ड में शिफ्ट किया जाना चाहिए था। इस अव्यवस्था को दिखवा रहे हैं। मरीजों का बरामदे की जमीन में लिटाकर इलाज नहीं कराना चाहिए था। -डॉ. एसएन मिश्र, सीएमएस, जिला अस्पताल बांदा।
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