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दुर्ग में पानी को भटक रहे पर्यटक
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Tourists wandering the water in the fort
- फोटो : BANDA
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कालिंजर। पर्यटकों को लुभाने के लिए ऐतिहासिक दुर्ग में विश्व स्तरीय सुविधाएं मुहैया कराने की शासन की मंशा पर स्थानीय प्रशासन की अनदेखी से पानी फिर रहा है। 25 रुपये टिकट लेकर दुर्ग घूमने आने वाले पर्यटकों को अव्यवस्थाओं से जूझना पड़ रहा है। सबसे ज्यादा दिक्कत पानी की है।
पूरे दुर्ग में शुद्ध पानी के लिए पर्यटकों को भटकना पड़ता है। तालाब से प्यास बुझा रहे हैं। सावन माह शुरू होने पर यूपी-एमपी सहित दूरदराज क्षेत्रों से यहां पर्यटकों की आमद बढ़ गई है। एमपी के खजुराहो आने वाले देश-विदेश के पर्यटकों को कालिंजर दुर्ग के प्रति आकर्षित करने के लिए शासन स्तर से तमाम कोशिशें की जा रहीं, पर मूलभूत सुविधाएं न होने से पर्यटकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। जनप्रतिनिधि और स्थानीय अधिकारी भी अव्यवस्थाओं से अपनी नजरें फेरे हैं। नतीजे में ऐतिहासिक दुर्ग घूमने आने वाले पर्यटकों को पीने के लिए पानी नहीं मिल रहा। टंकियां सूखी पड़ी हैं। टोटियों में जंक लग गया। नीलकंठेश्वर मंदिर परिसर में पुरातत्व विभाग द्वारा लगवाया गया फिल्टर भी खराब है।
इसे भी अब तक ठीक नहीं कराया गया। पानी संकट से जूझ रहे दुर्ग में आने वाले पर्यटकों को पानी खुद साथ लाना पड़ रहा है। सिर्फ डाक बंगला में ही पानी मिलता है। समाजसेवी अतुल सुल्लेरे, शीलू राज, राकेश मिश्रा, रामभरोसे चौरसिया, कोमल कुशवाहा, अतुल द्विवेदी आदि ने बताया कि दो साल से पानी की समुचित व्यवस्था नहीं है। यहां आने वाले पर्यटकों को तालाब का पानी पीना पड़ रहा है। हरेक पर्यटक से पुरातत्व विभाग 25 रुपये शुल्क वसूलता है, लेकिन सुविधाएं मुहैया नहीं कराई जा रहीं। समाजसेवियों ने उच्चाधिकारियों का ध्यान आकृष्ट कराया कि सावन मास में बड़ी संख्या में श्रद्धालु नीलकंठ दर्शन को आते हैं। इस माह तक दर्शनार्थियों को टिकट में छूट दी जाए। मेडिकल कैंप लगाने की भी मांग की।
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पूरे दुर्ग में शुद्ध पानी के लिए पर्यटकों को भटकना पड़ता है। तालाब से प्यास बुझा रहे हैं। सावन माह शुरू होने पर यूपी-एमपी सहित दूरदराज क्षेत्रों से यहां पर्यटकों की आमद बढ़ गई है। एमपी के खजुराहो आने वाले देश-विदेश के पर्यटकों को कालिंजर दुर्ग के प्रति आकर्षित करने के लिए शासन स्तर से तमाम कोशिशें की जा रहीं, पर मूलभूत सुविधाएं न होने से पर्यटकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। जनप्रतिनिधि और स्थानीय अधिकारी भी अव्यवस्थाओं से अपनी नजरें फेरे हैं। नतीजे में ऐतिहासिक दुर्ग घूमने आने वाले पर्यटकों को पीने के लिए पानी नहीं मिल रहा। टंकियां सूखी पड़ी हैं। टोटियों में जंक लग गया। नीलकंठेश्वर मंदिर परिसर में पुरातत्व विभाग द्वारा लगवाया गया फिल्टर भी खराब है।
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इसे भी अब तक ठीक नहीं कराया गया। पानी संकट से जूझ रहे दुर्ग में आने वाले पर्यटकों को पानी खुद साथ लाना पड़ रहा है। सिर्फ डाक बंगला में ही पानी मिलता है। समाजसेवी अतुल सुल्लेरे, शीलू राज, राकेश मिश्रा, रामभरोसे चौरसिया, कोमल कुशवाहा, अतुल द्विवेदी आदि ने बताया कि दो साल से पानी की समुचित व्यवस्था नहीं है। यहां आने वाले पर्यटकों को तालाब का पानी पीना पड़ रहा है। हरेक पर्यटक से पुरातत्व विभाग 25 रुपये शुल्क वसूलता है, लेकिन सुविधाएं मुहैया नहीं कराई जा रहीं। समाजसेवियों ने उच्चाधिकारियों का ध्यान आकृष्ट कराया कि सावन मास में बड़ी संख्या में श्रद्धालु नीलकंठ दर्शन को आते हैं। इस माह तक दर्शनार्थियों को टिकट में छूट दी जाए। मेडिकल कैंप लगाने की भी मांग की।
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