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Banda News: इस बार जून नहीं, जुलाई में मानसून के आसार
Wed, 21 Jun 2023 01:34 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
Updated Wed, 21 Jun 2023 01:34 AM IST
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बांदा। बुंदेलखंड में इस बार मानसून के जून के अंत में या जुलाई के प्रथम सप्ताह में आने की संभावना है। बारिश भी सामान्य से कम हो सकती है। मानसून के देर से आने के कारण खरीफ की फसल में देरी हो सकती है। बारिश न होने से धान की बेड़े पीली पड़ने लगी हैं।
बुंदेलखंड में 18 जून से प्री-मानसूनी बारिश शुरू हो जाती थी, लेकिन इस बार मौसम विभाग ने केरल तट पर ही मानसून के 15 जून को पहुंचने की बात कही है। ऐसे में बुंदेलखंड में बारिश देर से होगी। मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि यहां मानसूनी बारिश या तो जून के अंत में या फिर जुलाई के पहले सप्ताह में शुरू होगी।
किसानों का कहना है कि भीषण गर्मी के कारण उनकी धान की बेड़ तक सूख गई या पीली पड़ गई है। दोबारा बेड़ तैयार करने में एक सप्ताह का समय लगेगा। इधर, ज्वार, बाजारा, तिल, अरहर की बुआई 20 जून से शुरू हो जाती थी। अबकी जुलाई में ही बुआई संभव है।
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जिला कृषि अधिकारी डॉ. प्रमोद कुमार का कहना है कि मानसूनी बारिश को अधिक देर नहीं हुई है। जून के अंत तक भी मानसूनी बारिश होती है तो खरीफ की बुआई पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। खरीफ के ऐसे बीज मंगाए गए हैं, जिससे कम समय में ही फसलें तैयार हो जाएंगी।
कृषि विश्वविद्यालय के मौसम वैज्ञानिक डॉ. दिनेश शाहा का कहना है कि केरल में मानसून पहुंच गया है। बुंदेलखंड में इस बार मानसूनी बारिश 10 दिन लेट है।
मानसून लेट होने से जहां किसान खरीफ की फसलों की बुआई शुरू नहीं कर पा रहे हैं तो वहीं दूसरी ओर गर्मी बेहाल कर रही है। करीब एक माह से पारा 40 डिग्री के ऊपर चल रहा है। इससे लोग भीषण गर्मी से परेशान रहे। गर्मी बढ़ने से बिजली का उपयोग बढ़ा है। इससे ट्रांसफार्मर व जर्जर लाइनों में फाल्ट भी बढ़ गए हैं। लोगों को अघोषित बिजली कटौती का सामना भी करना पड़ा। इससे लोग गर्मी में परेशान हो रहे हैं।
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बुंदेलखंड में 18 जून से प्री-मानसूनी बारिश शुरू हो जाती थी, लेकिन इस बार मौसम विभाग ने केरल तट पर ही मानसून के 15 जून को पहुंचने की बात कही है। ऐसे में बुंदेलखंड में बारिश देर से होगी। मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि यहां मानसूनी बारिश या तो जून के अंत में या फिर जुलाई के पहले सप्ताह में शुरू होगी।
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किसानों का कहना है कि भीषण गर्मी के कारण उनकी धान की बेड़ तक सूख गई या पीली पड़ गई है। दोबारा बेड़ तैयार करने में एक सप्ताह का समय लगेगा। इधर, ज्वार, बाजारा, तिल, अरहर की बुआई 20 जून से शुरू हो जाती थी। अबकी जुलाई में ही बुआई संभव है।
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जिला कृषि अधिकारी डॉ. प्रमोद कुमार का कहना है कि मानसूनी बारिश को अधिक देर नहीं हुई है। जून के अंत तक भी मानसूनी बारिश होती है तो खरीफ की बुआई पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। खरीफ के ऐसे बीज मंगाए गए हैं, जिससे कम समय में ही फसलें तैयार हो जाएंगी।
कृषि विश्वविद्यालय के मौसम वैज्ञानिक डॉ. दिनेश शाहा का कहना है कि केरल में मानसून पहुंच गया है। बुंदेलखंड में इस बार मानसूनी बारिश 10 दिन लेट है।
मानसून लेट होने से जहां किसान खरीफ की फसलों की बुआई शुरू नहीं कर पा रहे हैं तो वहीं दूसरी ओर गर्मी बेहाल कर रही है। करीब एक माह से पारा 40 डिग्री के ऊपर चल रहा है। इससे लोग भीषण गर्मी से परेशान रहे। गर्मी बढ़ने से बिजली का उपयोग बढ़ा है। इससे ट्रांसफार्मर व जर्जर लाइनों में फाल्ट भी बढ़ गए हैं। लोगों को अघोषित बिजली कटौती का सामना भी करना पड़ा। इससे लोग गर्मी में परेशान हो रहे हैं।