{"_id":"614cc0888ebc3efb8958f40c","slug":"there-is-no-justification-for-re-reservation-of-job-profession-banda-news-knp6540108142","type":"story","status":"publish","title_hn":"नौकरी पेशा लोगों को दोबारा आरक्षण देने का औचित्य नहीं","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
नौकरी पेशा लोगों को दोबारा आरक्षण देने का औचित्य नहीं
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बांदा। अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा के बैनर तले सवर्ण जागरण मंच की जातिगण आरक्षण की खामियों पर चिंतन बैठक की गई। इसमें कहा गया कि जिन्हें आरक्षण का लाभ मिल चुका और सरकारी नौकरी में हैं तो उन्हें दोबारा आरक्षण देने का कोई औचित्य नहीं है।
आरक्षण जातिगत की जगह आर्थिक आधार पर लागू किया जाए। बैठक महाराणा प्रताप चौक के पास ठाकुर अरिमर्दन सिंह के प्रतिष्ठान में हुई। इसमें ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य, कायस्थ आदि सवर्ण समाज के प्रतिनिधियों ने शिरकत की।
ब्राह्मण समाज के अध्यक्ष संतोष कुमार द्विवेदी ने कहा कि स्वतंत्रता के 74 वर्ष बीत जाने के बाद भी आरक्षण के कारण योग्य प्रतिभाओं को अवसर नहीं मिल पा रहा। सवर्ण होने का दंश सहना पड़ रहा है।
विज्ञापन
क्षत्रिय महासभा जिला महामंत्री सूर्यपाल सिंह चौहान ने कहा कि 14 प्रतिशत ब्राह्मण, 12 प्रतिशत क्षत्रिय, नौ प्रतिशत वैश्य और छह प्रतिशत कायस्थ निर्णायक मतदाता हैं।
अधिवक्ता संघ पूर्व अध्यक्ष अशोक त्रिपाठी जीतू ने कहा कि लोकतंत्र में सवर्ण प्रतिभाओं की उपेक्षा अधिक दिनों तक चलने वाली नहीं है। वरिष्ठ चिंतक प्रदीप निगम लाला ने सवर्ण समाज से एकजुट होने को कहा।
बैठक को डा. इंद्रवीर सिंह, राजाबाबू सिंह परमार, अरिमर्दन सिंह, बाबू सिंह दिखित, आरएन सिंह आदि ने भी संबोधित किया।
नरेंद्र सिंह परिहार, एसके सिंह, श्याम सिंह, बाबू गुप्ता, पुष्पेंद्र सिंह, नरेंद्र राठौर, सबल सिंह, प्रकाशचंद्र सक्सेना, प्रशांत सिंह भदौरिया, पतिराखन सिंह चंदेल, होरीलाल सिंह परिहार, गोपी सिंह आदि मौजूद थे।
विज्ञापन
आरक्षण जातिगत की जगह आर्थिक आधार पर लागू किया जाए। बैठक महाराणा प्रताप चौक के पास ठाकुर अरिमर्दन सिंह के प्रतिष्ठान में हुई। इसमें ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य, कायस्थ आदि सवर्ण समाज के प्रतिनिधियों ने शिरकत की।
विज्ञापन
ब्राह्मण समाज के अध्यक्ष संतोष कुमार द्विवेदी ने कहा कि स्वतंत्रता के 74 वर्ष बीत जाने के बाद भी आरक्षण के कारण योग्य प्रतिभाओं को अवसर नहीं मिल पा रहा। सवर्ण होने का दंश सहना पड़ रहा है।
विज्ञापन
क्षत्रिय महासभा जिला महामंत्री सूर्यपाल सिंह चौहान ने कहा कि 14 प्रतिशत ब्राह्मण, 12 प्रतिशत क्षत्रिय, नौ प्रतिशत वैश्य और छह प्रतिशत कायस्थ निर्णायक मतदाता हैं।
अधिवक्ता संघ पूर्व अध्यक्ष अशोक त्रिपाठी जीतू ने कहा कि लोकतंत्र में सवर्ण प्रतिभाओं की उपेक्षा अधिक दिनों तक चलने वाली नहीं है। वरिष्ठ चिंतक प्रदीप निगम लाला ने सवर्ण समाज से एकजुट होने को कहा।
बैठक को डा. इंद्रवीर सिंह, राजाबाबू सिंह परमार, अरिमर्दन सिंह, बाबू सिंह दिखित, आरएन सिंह आदि ने भी संबोधित किया।
नरेंद्र सिंह परिहार, एसके सिंह, श्याम सिंह, बाबू गुप्ता, पुष्पेंद्र सिंह, नरेंद्र राठौर, सबल सिंह, प्रकाशचंद्र सक्सेना, प्रशांत सिंह भदौरिया, पतिराखन सिंह चंदेल, होरीलाल सिंह परिहार, गोपी सिंह आदि मौजूद थे।