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छात्रों ने किया हंगामा

Sat, 02 Feb 2019 11:04 PM IST
ASIF ASIF अमर उजाला ब्यूरो, बांदा
अमर उजाला ब्यूरो, बांदा Published by: ASIF ASIF Updated Sat, 02 Feb 2019 11:04 PM IST
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The university Students Ruckus
कृषि विश्वविद्यालय गेट पर प्रदर्शन करते छात्र। - फोटो : अमर उजाला

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) द्वारा विश्वविद्यालय और महाविद्यालयों के पदों में भर्ती के बारे में जारी किए गए प्वाइंट रोस्टर-13 को एससी, एसटी और ओबीसी का आरक्षण खत्म करने की साजिश बताते हुए बांदा कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय में इस श्रेणी के छात्र भड़क गए। विश्वविद्यालय गेट और परिसर में नारे लगाए। प्रशासन के माध्यम से राष्ट्रपति को ज्ञापन भेजकर रोस्टर का विरोध जताया। विश्वविद्यालय अधिकारियों और प्रवक्ताओं ने छात्रों को सुप्रीम कोर्ट आदि के आदेशों का हवाला देकर बमुश्किल शांत किया। 

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शनिवार की सुबह कृषि विश्वविद्यालय के सैकड़ों छात्र विश्वविद्यालय गेट और परिसर में एकत्रित होकर नारे लगाने लगे। विश्वविद्यालय कुलपति और निदेशक आदि विभागीय कार्य से बाहर गए थे। वे विश्वविद्यालय में नहीं थे। जुलूस की शक्ल में ज्ञापन देने कलक्ट्रेट जा रहे छात्रों को रोककर विश्वविद्यालय के प्रवक्ता उन्हें हाल के अंदर ले गए। वहां बैठाकर उनकी मांगें सुनीं और समझाया। दूसरी मांग यह भी थी कि सभी छात्रों को छात्रवृत्ति नहीं मिली है। कुछ ही देर बाद सदर तहसीलदार अवधेश निगम विश्वविद्यालय पहुंचे और छात्रों का ज्ञापन लिया। 
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उधर, विश्वविद्यालय कुलपति और निदेशक आदि के जिले से बाहर होने पर उनका पक्ष (वर्जन) नहीं मिल सका। निदेशक (प्रसार) डा. एनके वाजपेयी और विश्वविद्यालय के जनसंपर्क अधिकारी डा. बीके गुप्ता ने बताया कि वह सभी कुलपति के साथ हमीरपुर जिले में मीटिंग में हैं। उधर, विश्वविद्यालय के एसोसिएट  प्रोफेसर डॉ. पीके सिंह और जनसंपर्क अधिकारी बीके गुप्ता ने बताया कि पहले विश्वविद्यालय/महाविद्यालय स्तर पर आरक्षण की व्यवस्था थी।
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इससे हर विभाग के छात्रों को अक्सर आरक्षण का लाभ नहीं मिल पाता था। सुप्रीम कोर्ट की मंशा के अनुसार अब विभागवार आरक्षण/पोस्ट दी जा रही है। इसमें हर विभाग के छात्रों को आरक्षण का लाभ मिलेगा। उन्होंने कहा कि छात्रों में गलतफहमी है। किसी ने उन्हें गलत सूचना देकर गुमराह कर दिया है। उधर, छात्रवृत्ति के बारे में जिला समाज कल्याण अधिकारी अनिल कुशवाहा ने बताया कि जिन छात्रों के खाते में छात्रवृत्ति राशि नहीं पहुंची है वह 31 मार्च तक पहुंच जाएगी। शासन छात्रों के खाते में सीधे छात्रवृत्ति राशि भेजता है। 

 
सवर्णों को दस फीसदी आरक्षण का विरोध 
कृषि विश्वविद्यालय के एससी, ओबीसी, एसटी छात्रों द्वारा सामूहिक हस्ताक्षरों से राष्ट्रपति को भेजे गए ज्ञापन में कहा है कि आर्थिक आधार पर गरीब सवर्णों को दस फीसदी आरक्षण देना संविधान के साथ खिलवाड़ है। अत: 10 फीसदी आरक्षण वापस लिया जाए। यह भी कहा कि दिल्ली विश्वविद्यालय एवं अन्य विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों में प्रोफेसर, सहायक प्रोफेसर और लेक्चरर की भर्ती के संबंध में 13 प्वाइंट रोस्टर प्रणाली सरकार की साजिश है। संवैधानिक रूप से एससी, एसटी और ओबीसी को 49.5 प्रतिशत आरक्षण मिलता है, जबकि 13 प्वाइंट रोस्टर प्रणाली से मात्र 30 फीसदी ही आरक्षण मिल पाएगा। यह गैर संवैधानिक है। 

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