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बर्न यूनिट में भर्ती मरीज छटपटाते रहे दर्द से
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बांदा। 28 घंटे बिजली गुल रहने से जिला अस्पताल की बर्न यूनिट में भर्ती मरीजों का बुरा हाल कर दिया। बिन बिजली गर्मी में झुलसे मरीज दर्द से कराहते रहे। सीएमएस की दलील है कि जेनरेटर से एसी नहीं चल सकते।
जिला अस्पताल की बर्न यूनिट में 11 बेड हैं। चार बेड की यूनिट में एक और सात बेड वाली यूनिट में दो एसी लगे हैं। झुलसे मरीजों से सभी बेड भरे हैं। शुक्रवार की शाम वन विभाग के पास केबल कटने से गुल हुई बिजली अगले दिन शनिवार की शाम को आई। लेकिन बगैर एसी के झुलसे मरीज दर्द से छटपटाते रहे। हरदौली गांव की सियारानी के तीमारदार दिनेश ने बताया कि रातभर हाथ से पंखा करना पड़ा। मवई गांव निवासी गुरुदेव ने बताया कि मरीज सुनीता को बाहर लिटाकर हवा करते रहे।
सीएमएस डॉ. एसएन मिश्र का कहना है कि जेनरेटर से एसी नहीं चल सकते। अलबत्ता पंखे चलते रहे।
रातभर जेनरेटर चलाया गया। हीट (गर्म) होने पर बंद करना पड़ा। बिजली विभाग के एक्सईएन को सूचना दी गई थी। व्यवस्था होने की वजह से जिला प्रशासन या उच्चाधिकारियों को अवगत नहीं कराया गया। - डा. एसएन मिश्र, सीएमएस
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जिला अस्पताल की बर्न यूनिट में 11 बेड हैं। चार बेड की यूनिट में एक और सात बेड वाली यूनिट में दो एसी लगे हैं। झुलसे मरीजों से सभी बेड भरे हैं। शुक्रवार की शाम वन विभाग के पास केबल कटने से गुल हुई बिजली अगले दिन शनिवार की शाम को आई। लेकिन बगैर एसी के झुलसे मरीज दर्द से छटपटाते रहे। हरदौली गांव की सियारानी के तीमारदार दिनेश ने बताया कि रातभर हाथ से पंखा करना पड़ा। मवई गांव निवासी गुरुदेव ने बताया कि मरीज सुनीता को बाहर लिटाकर हवा करते रहे।
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सीएमएस डॉ. एसएन मिश्र का कहना है कि जेनरेटर से एसी नहीं चल सकते। अलबत्ता पंखे चलते रहे।
रातभर जेनरेटर चलाया गया। हीट (गर्म) होने पर बंद करना पड़ा। बिजली विभाग के एक्सईएन को सूचना दी गई थी। व्यवस्था होने की वजह से जिला प्रशासन या उच्चाधिकारियों को अवगत नहीं कराया गया। - डा. एसएन मिश्र, सीएमएस
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