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हर-हर, बम-बम से गूंजे शिवालय
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बांदा। सावन मास के पहले सोमवार को शिवालयों में श्रद्धालुओं में जलाभिषेक व दुग्धाभिषेक करने के लिए होड़ मची रही। हर-हर, बम-बम के उद्घोष और घंटों से मंदिर परिसर गूंजता रहा। शहर के प्रसिद्ध बांबेश्वर पर्वत पर स्थित मंदिर में शिवभक्तों की भीड़ उमड़ पड़ी।
कपूर और धूप व अगरबत्ती की सुगंध से मंदिर सराबोर रहा। लगभग 20 फीट गहरी गुफा में विराजमान शिवलिंग की पूजा-अर्चना के लिए भक्तों को देर तक लाइन में लगना पड़ा। फल-फूल, बेलपत्र आदि चढ़ाया गया। पहाड़ के ऊपर स्थित सिद्धबाबा स्थान पर भी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने माथा टेका।
कोरोना गाइडलाइन का पालन कराते हुए भक्तों को दर्शन कराए गए। मंदिर में पुलिस तैनात रही। महिला कांस्टेबल भी ड्यूटी पर लगाई गईं थी। एक बार में 10 से 15 लोगों को ही गुफा के अंदर प्रवेश दिया गया। मंदिर के आसपास मेला सा नजारा रहा। फायर ब्रिगेड भी तैनात रही।
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मन्नत पूरी होने वालों ने बांबेश्वर मंदिर की गुफा में दीप जलवाए हैं। इसके अलावा पंचानंद आश्रम राजघाट रोड, संकट मोचन, काली देवी, महेश्वरी देवी, सिंहवाहिनी मंदिर, मरहीमाता आदि मंदिर में स्थित शिवलिंगों में भी श्रद्धालुओं ने पूजा-अर्चना की।
देर रात तक शिवालय हर-हर महादेव व घंटा घडियालों से गूंजते रहे। उधर, गुफा में विराजमान शिवलिंग की स्थापना महर्षि बामदेव ने की थी। जानकारों का कहना है कि प्रतिमा की स्थापना का कोई ठोस उल्लेख नहीं है। जानकारों का कहना कि शास्त्रों में इस बात का उल्लेख है कि हजारों वर्ष पूर्व सतयुग में भगवान राम वनवास के दौरान चित्रकूट जाते समय महर्षि बामदेव से मिलने के लिए यहां आए थे।
महर्षि बामदेव ने तप-बल से शिवलिंग स्थापित किया था। महर्षि से मिलने आए भगवान श्रीराम ने भी यहां पूजा की। खास बात यह है कि इस शिव मंदिर में नांदिया नहीं है, बल्कि दिया प्रज्ज्वलित है।
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कपूर और धूप व अगरबत्ती की सुगंध से मंदिर सराबोर रहा। लगभग 20 फीट गहरी गुफा में विराजमान शिवलिंग की पूजा-अर्चना के लिए भक्तों को देर तक लाइन में लगना पड़ा। फल-फूल, बेलपत्र आदि चढ़ाया गया। पहाड़ के ऊपर स्थित सिद्धबाबा स्थान पर भी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने माथा टेका।
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कोरोना गाइडलाइन का पालन कराते हुए भक्तों को दर्शन कराए गए। मंदिर में पुलिस तैनात रही। महिला कांस्टेबल भी ड्यूटी पर लगाई गईं थी। एक बार में 10 से 15 लोगों को ही गुफा के अंदर प्रवेश दिया गया। मंदिर के आसपास मेला सा नजारा रहा। फायर ब्रिगेड भी तैनात रही।
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मन्नत पूरी होने वालों ने बांबेश्वर मंदिर की गुफा में दीप जलवाए हैं। इसके अलावा पंचानंद आश्रम राजघाट रोड, संकट मोचन, काली देवी, महेश्वरी देवी, सिंहवाहिनी मंदिर, मरहीमाता आदि मंदिर में स्थित शिवलिंगों में भी श्रद्धालुओं ने पूजा-अर्चना की।
देर रात तक शिवालय हर-हर महादेव व घंटा घडियालों से गूंजते रहे। उधर, गुफा में विराजमान शिवलिंग की स्थापना महर्षि बामदेव ने की थी। जानकारों का कहना है कि प्रतिमा की स्थापना का कोई ठोस उल्लेख नहीं है। जानकारों का कहना कि शास्त्रों में इस बात का उल्लेख है कि हजारों वर्ष पूर्व सतयुग में भगवान राम वनवास के दौरान चित्रकूट जाते समय महर्षि बामदेव से मिलने के लिए यहां आए थे।
महर्षि बामदेव ने तप-बल से शिवलिंग स्थापित किया था। महर्षि से मिलने आए भगवान श्रीराम ने भी यहां पूजा की। खास बात यह है कि इस शिव मंदिर में नांदिया नहीं है, बल्कि दिया प्रज्ज्वलित है।