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Banda News: गूंजती रही कजली, झांकियों में दिखा बुंदेलखंड का शौर्य
Sat, 29 Aug 2026 11:50 PM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
Updated Sat, 29 Aug 2026 11:50 PM IST
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फोटो -15- झांकी में भगवान राम, सीता व लक्ष्मण के रूप में मौजूद कलाकार। संवाद
कालिंजर। बारिश के बीच ऐतिहासिक बेला तालाब में बुंदेलखंड की प्रसिद्ध कजली मेला परंपरा ने आस्था और लोक संस्कृति को एक साथ जीवंत कर दिया।
आल्हा-ऊदल की वीरगाथाओं से लेकर चंदेलकालीन गौरव तक, झांकियों और लोकगीतों ने कालिंजर की धरती को बुंदेली शौर्य के रंग में रंग दिया।
दोपहर 12 बजे अथइया दाई से भव्य झांकियों की शोभायात्रा शुरू हुई। अक्षरौड़ चौराहा होते हुए शोभायात्रा नगर के प्रमुख मार्गों से बेला तालाब पहुंची। हाथी-घोड़े, आल्हा-ऊदल, बौना चोर, मल्हना का डोला, पृथ्वीराज-मलखान, ज्वाला सिंह, भगवान कृष्ण, भगवान नीलकंठ और राधा-कृष्ण की झांकियां लोगों के आकर्षण का केंद्र रहीं।
बेला तालाब में आयोजित कार्यक्रम में बांदा-चित्रकूट सांसद कृष्णा देवी पटेल और पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष महेंद्र सिंह वर्मा भी मौजूद रहे। मेले में सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ आल्हा गायन और ऐतिहासिक प्रसंगों का मंचन किया गया। अथइया दाई से महिलाओं ने सिर पर कजली रखकर बेला तालाब की ओर प्रस्थान किया। पारंपरिक कजली गीतों से पूरा वातावरण गूंज उठा।
आल्हा गायन में पृथ्वीराज ने करी चढ़ाई, मनिया देव महोबे का जैसे बुंदेली वीरगाथा में गजब का उत्साह दिखा। मेले में भारी भीड़ को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए। पुलिस बल के साथ पीएसी की तैनाती रही।
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कजली विसर्जन किया, निकाली शोभायात्रा
नरैनी। रक्षाबंधन के दूसरे दिन शनिवार को कस्बे में कजली महोत्सव धूमधाम से मनाया गया। कई जगह गाजे बाजे के साथ शोभायात्रा निकाली गई। शोभायात्रा प्रमुख मार्गों से होते हुए बंबा तालाब पहुंची, जहां कजलियों का विसर्जन किया गया। इसी तरह अन्य तालाबों पर भी कजली मेला लगा।
रक्षाबंधन के दूसरे दिन शनिवार को कस्बे से लेकर गांव तक कजली महोत्सव की धूम रही। महिलाएं अलग अलग तालाबों पर पहुंचीं। महिलाएं सिर पर कजलियां व कलश लिए थीं। शोभायात्रा कस्बे के विभिन्न मार्गों से होते हुए शंकरजी, हनुमान मंदिर होते हुए बंबा तालाब पहुंची, जहां कजलियों का विसर्जन किया गया।
बंबा तालाब में कजली मेला महोत्सव पर नगर पंचायत एवं न्यू इंडियन ग्रुप के सहयोग संपन्न हुआ। इस मौके पर नगर पंचायत प्रतिनिधि हरिश्चंद्र सोनकर, अधिशासी अधिकारी विजेता गुप्ता, विजय दीक्षित, नीरज रैकवार, सभासद व कर्मचारी मौजूद रहे । (संवाद)
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आल्हा-ऊदल की वीरगाथाओं से लेकर चंदेलकालीन गौरव तक, झांकियों और लोकगीतों ने कालिंजर की धरती को बुंदेली शौर्य के रंग में रंग दिया।
दोपहर 12 बजे अथइया दाई से भव्य झांकियों की शोभायात्रा शुरू हुई। अक्षरौड़ चौराहा होते हुए शोभायात्रा नगर के प्रमुख मार्गों से बेला तालाब पहुंची। हाथी-घोड़े, आल्हा-ऊदल, बौना चोर, मल्हना का डोला, पृथ्वीराज-मलखान, ज्वाला सिंह, भगवान कृष्ण, भगवान नीलकंठ और राधा-कृष्ण की झांकियां लोगों के आकर्षण का केंद्र रहीं।
बेला तालाब में आयोजित कार्यक्रम में बांदा-चित्रकूट सांसद कृष्णा देवी पटेल और पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष महेंद्र सिंह वर्मा भी मौजूद रहे। मेले में सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ आल्हा गायन और ऐतिहासिक प्रसंगों का मंचन किया गया। अथइया दाई से महिलाओं ने सिर पर कजली रखकर बेला तालाब की ओर प्रस्थान किया। पारंपरिक कजली गीतों से पूरा वातावरण गूंज उठा।
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आल्हा गायन में पृथ्वीराज ने करी चढ़ाई, मनिया देव महोबे का जैसे बुंदेली वीरगाथा में गजब का उत्साह दिखा। मेले में भारी भीड़ को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए। पुलिस बल के साथ पीएसी की तैनाती रही।
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कजली विसर्जन किया, निकाली शोभायात्रा
नरैनी। रक्षाबंधन के दूसरे दिन शनिवार को कस्बे में कजली महोत्सव धूमधाम से मनाया गया। कई जगह गाजे बाजे के साथ शोभायात्रा निकाली गई। शोभायात्रा प्रमुख मार्गों से होते हुए बंबा तालाब पहुंची, जहां कजलियों का विसर्जन किया गया। इसी तरह अन्य तालाबों पर भी कजली मेला लगा।
रक्षाबंधन के दूसरे दिन शनिवार को कस्बे से लेकर गांव तक कजली महोत्सव की धूम रही। महिलाएं अलग अलग तालाबों पर पहुंचीं। महिलाएं सिर पर कजलियां व कलश लिए थीं। शोभायात्रा कस्बे के विभिन्न मार्गों से होते हुए शंकरजी, हनुमान मंदिर होते हुए बंबा तालाब पहुंची, जहां कजलियों का विसर्जन किया गया।
बंबा तालाब में कजली मेला महोत्सव पर नगर पंचायत एवं न्यू इंडियन ग्रुप के सहयोग संपन्न हुआ। इस मौके पर नगर पंचायत प्रतिनिधि हरिश्चंद्र सोनकर, अधिशासी अधिकारी विजेता गुप्ता, विजय दीक्षित, नीरज रैकवार, सभासद व कर्मचारी मौजूद रहे । (संवाद)