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पुत्र की हत्या में सजा काटकर लौटे वृद्ध ने खुद को मारी गोली
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The old man, who returned after serving a sentence in the murder of his son, shot himself
- फोटो : BANDA
बांदा। पहली पत्नी के बेटे की हत्या में 17 साल जेल काटने के बाद घर लौटे वीरेंद्र (65) ने मंगलवार की देर शाम खुद तमंचा से गोली मारकर आत्महत्या कर ली। वह 24 दिन पूर्व जेल से छूटा था। परिजनों का कहना है कि जेल से छूटने के बाद वह तनाव में था। किसी से बातचीत नहीं करता था। बुधवार को पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम कराया है।
घटना कमासिन थाना क्षेत्र के लाखीपुर मनकहड़ी गांव की है। मंगलवार की शाम घर से खेत जाने की बात कहकर निकले वीरेंद्र ने ट्यूबवेल के पास महुआ के पेड़ के नीचे कनपटी में गोली मार ली। फायर की आवाज सुनकर आसपास मौजूद किसानों ने घरवालों को घटना की जानकारी दी। कुछ देर बाद पुलिस भी पहुंच गई। वीरेंद्र का शव खून से लथपथ जमीन पर पड़ा था। पोस्टमार्टम हाउस में मृतक के भतीजे देव कुमार ने बताया कि चाचा वीरेंद्र सात मई को जेल से छूटा था। मानसिक स्थिति ठीक नहीं थी। तनाव में था। गुमशुम रहता और किसी से बातचीत नहीं करता था।
भतीजे ने बताया कि बंटवारे को लेकर हुए विवाद में वर्ष 2003 में वीरेंद्र ने अपनी पहली पत्नी सावित्री के पुत्र कल्लू यादव की गोली मारकर हत्या कर दी थी। अदालत से उसे सजा हो गई थी। 17 साल जेल में बिताए। कमासिन थानाध्यक्ष उमेश कुमार सिंह ने बताया कि वह अपराधी किस्म का था। तमंचा कहां से आया? जांच की जा रही है। घटनास्थल से तमंचा बरामद होने पर मृतक पर आर्म्स एक्ट की रिपोर्ट दर्ज की गई है।
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1984 में पड़ोसी की भी लाठी से पीटकर की थी हत्या
भतीजे देव कुमार ने बताया कि चाचा वीरेंद्र ने 1984 में पड़ोसी महेश मिश्रा की भी लाठी से पीटकर हत्या की थी। खेत में कब्जे को लेकर दोनों के बीच विवाद हुआ था। कुछ दिन जेल में रहने के बाद छूट गया था। इसके बाद पुत्र की हत्या में जेल हो गई थी। पहली पत्नी की बीमारी के चलते मृत्यु होने के बाद उसने दूसरी शादी कर ली थी। दूसरी पत्नी से दो पुत्र और दो पुत्रियां हैं। एक पुत्री की शादी हो गई और दूसरी शादी योग्य है।
पुत्र का फायर मिस हुआ तो पिता ने मार दी गोली
परिजनों के मुताबिक पहली पत्नी का पुत्र कल्लू यादव बंटवारा चाहता था। इसे लेकर वीरेंद्र और कल्लू के बीच काफी विवाद हुआ था। दोनों ने एक-दूसरे पर तमंचा तान दिया था। बताते हैं कि कल्लू का फायर मिस हो गया था। तभी वीरेंद्र ने गोली चला दी और कल्लू की मौके पर ही मौत हो गई थी।
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घटना कमासिन थाना क्षेत्र के लाखीपुर मनकहड़ी गांव की है। मंगलवार की शाम घर से खेत जाने की बात कहकर निकले वीरेंद्र ने ट्यूबवेल के पास महुआ के पेड़ के नीचे कनपटी में गोली मार ली। फायर की आवाज सुनकर आसपास मौजूद किसानों ने घरवालों को घटना की जानकारी दी। कुछ देर बाद पुलिस भी पहुंच गई। वीरेंद्र का शव खून से लथपथ जमीन पर पड़ा था। पोस्टमार्टम हाउस में मृतक के भतीजे देव कुमार ने बताया कि चाचा वीरेंद्र सात मई को जेल से छूटा था। मानसिक स्थिति ठीक नहीं थी। तनाव में था। गुमशुम रहता और किसी से बातचीत नहीं करता था।
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भतीजे ने बताया कि बंटवारे को लेकर हुए विवाद में वर्ष 2003 में वीरेंद्र ने अपनी पहली पत्नी सावित्री के पुत्र कल्लू यादव की गोली मारकर हत्या कर दी थी। अदालत से उसे सजा हो गई थी। 17 साल जेल में बिताए। कमासिन थानाध्यक्ष उमेश कुमार सिंह ने बताया कि वह अपराधी किस्म का था। तमंचा कहां से आया? जांच की जा रही है। घटनास्थल से तमंचा बरामद होने पर मृतक पर आर्म्स एक्ट की रिपोर्ट दर्ज की गई है।
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1984 में पड़ोसी की भी लाठी से पीटकर की थी हत्या
भतीजे देव कुमार ने बताया कि चाचा वीरेंद्र ने 1984 में पड़ोसी महेश मिश्रा की भी लाठी से पीटकर हत्या की थी। खेत में कब्जे को लेकर दोनों के बीच विवाद हुआ था। कुछ दिन जेल में रहने के बाद छूट गया था। इसके बाद पुत्र की हत्या में जेल हो गई थी। पहली पत्नी की बीमारी के चलते मृत्यु होने के बाद उसने दूसरी शादी कर ली थी। दूसरी पत्नी से दो पुत्र और दो पुत्रियां हैं। एक पुत्री की शादी हो गई और दूसरी शादी योग्य है।
पुत्र का फायर मिस हुआ तो पिता ने मार दी गोली
परिजनों के मुताबिक पहली पत्नी का पुत्र कल्लू यादव बंटवारा चाहता था। इसे लेकर वीरेंद्र और कल्लू के बीच काफी विवाद हुआ था। दोनों ने एक-दूसरे पर तमंचा तान दिया था। बताते हैं कि कल्लू का फायर मिस हो गया था। तभी वीरेंद्र ने गोली चला दी और कल्लू की मौके पर ही मौत हो गई थी।