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गायें ठिकाने लगवाने को ट्रकों के साथ चल रहे थे अधिकारी
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The officers were walking with the trucks to get the cows sheltered.
- फोटो : BANDA
करतल/बांदा। पन्ना जिले के पहाड़ी खेरा के जंगल में गायों को दफनाने के मामले में नरैनी नगर पंचायत के अलावा तहसील के अफसरों की भूमिका सामने आ रही है। बताते हैं कि गायों को ठिकाने लगवाने के लिए नगर पंचायत और तहसील के अफसर ट्रकों के साथ चल रहे थे। ट्रक चालकों पर दबाव बनाया गया कि जिंदा और मरी सभी गायों को जंगल में फेंक दिया जाए।
दरअसल मंडी समिति परिसर से गायों को चार अन्य गोशालाओं में शिफ्ट करने के नरैनी प्रशासन के दावों की मध्य प्रदेश पुलिस ने भी हवा निकाल दी है। गायों के दफन स्थल पहाड़ी खेरा (पन्ना) चौकी प्रभारी गिरजा शंकर वाजपेयी ने बताया कि चार दिसंबर की रात में अन्ना गायों को 10-11 ट्रकों में भरकर यहां लाया गया था। अगले दिन उनके दफन होने की जानकारी हुई तो मौके पर पहुंचकर 18 गायों को बाहर निकलवाया और पोस्टमार्टम कराया। बाद में गायों को सम्मानपूर्वक फिर से दफनाया गया।
जांच में घटना का मूल स्थल नरैनी पाया गया। इसलिए पोस्टमार्टम रिपोर्ट और सारे दस्तावेज नरैनी ही भेजे जाएंगे। चौकी प्रभारी ने बताया कि जिन ट्रकों में गायों को लाया गया उनके ड्राइवर यहां ढाबे पर चर्चा कर रहे थे कि ट्रक में जिंदा और मरी दोनों तरह की गायें थीं। सभी को फेंकने के लिए कहा गया।
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ड्राइवरों का नाम-पता नहीं मिल सका है। वे ढाबा संचालकों की मदद से ट्रक ड्राइवरों का पता लगवा रहे हैं। बृजपुर (पन्ना) थाने के उपनिरीक्षक बखत सिंह ने बताया कि उनकी तरफ से भी इस घटना की जांच की जा रही है।
नरैनी के अधिकारियों ने ट्रकों ने पहले धरमपुर थाना क्षेत्र में रोकने का प्रयास किया। पूछताछ की गई तो आगे चले गए। बार्डर पर अन्ना गायों को उतारा गया। वहां के ढाबे वालों ने बताया कि बाद में चालकों ने अपने ट्रक धोये थे। उधर, नरैनी नगर पंचायत गोशाला के एक कर्मी ने बताया कि गोशाला से दो-ढाई सौ गायें लादी गई थीं। सभी को ठिकाने लगाने की चर्चा हो रही थी।
बांदा। बुंदेलखंड इंसाफ सेना ने मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन डीएम को सौंपा। कहा कि ट्रकों में मरी गायों की सूचना कर्मचारियों ने अधिकारियों को दी थी। इस पर अधिकारियों ने मरी के साथ घायल गायों को भी दफन करवा दिया। इस मामले में नरैनी के एसडीएम के विरुद्ध कार्रवाई होनी चाहिए। ज्ञापन देने वालों में अध्यक्ष एएस नोमानी, दिवाकर सिंह खंगार, नीरज सिंह, नोखेलाल सिंह, जितेंद्र सिंह खंगार शामिल रहे।
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दरअसल मंडी समिति परिसर से गायों को चार अन्य गोशालाओं में शिफ्ट करने के नरैनी प्रशासन के दावों की मध्य प्रदेश पुलिस ने भी हवा निकाल दी है। गायों के दफन स्थल पहाड़ी खेरा (पन्ना) चौकी प्रभारी गिरजा शंकर वाजपेयी ने बताया कि चार दिसंबर की रात में अन्ना गायों को 10-11 ट्रकों में भरकर यहां लाया गया था। अगले दिन उनके दफन होने की जानकारी हुई तो मौके पर पहुंचकर 18 गायों को बाहर निकलवाया और पोस्टमार्टम कराया। बाद में गायों को सम्मानपूर्वक फिर से दफनाया गया।
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जांच में घटना का मूल स्थल नरैनी पाया गया। इसलिए पोस्टमार्टम रिपोर्ट और सारे दस्तावेज नरैनी ही भेजे जाएंगे। चौकी प्रभारी ने बताया कि जिन ट्रकों में गायों को लाया गया उनके ड्राइवर यहां ढाबे पर चर्चा कर रहे थे कि ट्रक में जिंदा और मरी दोनों तरह की गायें थीं। सभी को फेंकने के लिए कहा गया।
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ड्राइवरों का नाम-पता नहीं मिल सका है। वे ढाबा संचालकों की मदद से ट्रक ड्राइवरों का पता लगवा रहे हैं। बृजपुर (पन्ना) थाने के उपनिरीक्षक बखत सिंह ने बताया कि उनकी तरफ से भी इस घटना की जांच की जा रही है।
नरैनी के अधिकारियों ने ट्रकों ने पहले धरमपुर थाना क्षेत्र में रोकने का प्रयास किया। पूछताछ की गई तो आगे चले गए। बार्डर पर अन्ना गायों को उतारा गया। वहां के ढाबे वालों ने बताया कि बाद में चालकों ने अपने ट्रक धोये थे। उधर, नरैनी नगर पंचायत गोशाला के एक कर्मी ने बताया कि गोशाला से दो-ढाई सौ गायें लादी गई थीं। सभी को ठिकाने लगाने की चर्चा हो रही थी।
बांदा। बुंदेलखंड इंसाफ सेना ने मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन डीएम को सौंपा। कहा कि ट्रकों में मरी गायों की सूचना कर्मचारियों ने अधिकारियों को दी थी। इस पर अधिकारियों ने मरी के साथ घायल गायों को भी दफन करवा दिया। इस मामले में नरैनी के एसडीएम के विरुद्ध कार्रवाई होनी चाहिए। ज्ञापन देने वालों में अध्यक्ष एएस नोमानी, दिवाकर सिंह खंगार, नीरज सिंह, नोखेलाल सिंह, जितेंद्र सिंह खंगार शामिल रहे।