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विधान परिषद में गूंजा बांदा कृषि विश्वविद्यालय का मुद्दा

Thu, 19 Dec 2019 12:07 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Thu, 19 Dec 2019 12:07 AM IST
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The issue of Gunja Banda Agricultural University in the Legislative Council
बांदा। कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, बांदा की स्थापना के बाद बीते एक दशक में प्रदेश सरकार 51 अरब से ज्यादा रुपये मुहैया करा चुकी है। इसमें वेतन, गैर वेतन और पूंजीगत मद शामिल हैं। सरकार का कहना है कि उपलब्ध वित्तीय संसाधनों के मद्देनजर बजट आवंटित किया जाता है।
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विधान परिषद सत्र में पहले ही दिन बांदा कृषि विश्वविद्यालय के बजट का मुद्दा गूंजा। विधान परिषद सदस्य और पूर्व मंत्री नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने पूछा था कि विश्वविद्यालय की स्थापना के बाद वर्षवार कितना बजट किस मद में सरकार ने दिया है। कृषि शिक्षा एवं अनुसंधान मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने विधान परिषद में दिए उत्तर में विश्वविद्यालय के शुरू होने के वर्ष 2009-10 से चालू वर्ष 2019-20 तक का बजट ब्योरा उपलब्ध कराया। वेतन, गैर वेतन मद और पूंजीगत मद सहित बुंदेलखंड पैकेज और आरकेवीवाई आदि से कुल 51 अरब आठ करोड़ 41 लाख रुपये शासन ने विश्वविद्यालय को दिए हैं।
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इसमें विश्वविद्यालय के अधिकारियों और कर्मियों को वेतन के रूप में 40 करोड़ 16 लाख 82 हजार रुपये शामिल हैं। गैर वेतन मद में 26 करोड़ 76 लाख 29 हजार रुपये और पूंजीगत मद में 50 अरब एक करोड़ 99 लाख रुपये राज्य सरकार ने दिए हैं।
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कृषि मंत्री ने यह भी बताया कि बुंदेलखंड पैकेज से वर्ष 2017-18 में सात करोड़ 49 लाख, वर्ष 218-19 में छह करोड़ 82 लाख और वर्ष 2019-20 में तीन करोड़ 50 लाख 11 हजार रुपये दिए गए। इसके अलावा आरकेवीवाई योजना से वर्ष 2016-17 में 21 लाख और वर्ष 2019-20 में 3 करोड़ 58 लाख 30 हजार रुपये दिए गए हैं। कृषि शिक्षा मंत्री ने कहा कि उपलब्ध वित्तीय संसाधनों के दृष्टिगत बजट व्यवस्था के अनुसार बजट आवंटित किया जाता है। सिद्दीकी ने अनुपूरक प्रश्न में कहा कि विश्वविद्यालय के भवन निर्माण के लिए दी गई राशि का कोई उत्तर नहीं दिया गया।

बांदा कृषि विश्वविद्यालय को शुरू से अब तक विभिन्न मदों में मिला बजट (लाख रुपये में)
वर्ष वेतन गैर-वेतन पूंजीगत मद
2009-10 1.72 18.28 4693.62
2010-11 72.50 35.85 17631.90
2011-12 262.90 250 10612.29
2012-13 300 400 8517.89
2013-14 250 400 2318.03
2014-15 200 200 1464.53
2015-16 240 200 2706.82
2016-17 285 322.01 1973.43
2017-18 437.91 218.15 229.41
2018-19 886.57 400 52.01
2019-20 1082.22 230 00
योग 4016.82 2674.29 501990
साल-दर-साल बढ़ रहा वेतन का भार
कृषि विश्वविद्यालय में वेतन पर जमकर खर्च हो रहा है। साल-दर-साल यह खर्च बढ़ रहा है। विधान परिषद में कृषि मंत्री द्वारा दिए गए आंकड़ों से जाहिर है कि गैर वेतन मद पर जहां सिर्फ 26 करोड़ 74 लाख 29 हजार बजट मिला। वहीं, 40 करोड़ 16 लाख 82 हजार रुपये वेतन पर खर्च हुए हैं। वर्ष 2015-16 से वेतन का खर्च लगातार बढ़ रहा है। वर्ष 2015-16 में 2 करोड़ 40 लाख, 2016-17 में 2 करोड़ 85 लाख, 2017-18 में 4 करोड़ 37 लाख 91 हजार, 2018-19 में 8 करोड़ 86 लाख 57 हजार और चालू वर्ष 2019-20 में 10 करोड़ 80 लाख 22 हजार रुपये वेतन के लिए दिए गए हैं। यानी विश्वविद्यालय में कर्मचारियों की संख्या लगातार बढ़ाई जा रही है।
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