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Banda News: मासूमों के बेबाक बयानों ने खोल दी दुष्ट अंकल व आंटी की पोल
Sun, 22 Feb 2026 01:08 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
Updated Sun, 22 Feb 2026 01:08 AM IST
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बांदा। यौन शोषण मामले में तीन से 17 साल तक के नाबालिगों ने न्यायालय में दुष्ट अंकल रामभवन व अंटी दुर्गावती की घिनौनी करतूत को उजागर किया था। सीबीआई ने पाक्सो कोर्ट में 69 बच्चों के बयान कराए थे। जिनके बयानों ने दोनों को फांसी के फंदे तक पहुंचा दिया। नाबालिगों ने भले ही 10 साल तक घर में मुंह नहीं खोला लेकिन अदालत में बेबाकी से अपने साथ हुए कुकृत्य बयां किया।
अलग-अलग बयान में बताया कि रामभवन अंकल अपने घर लेकर आए थे अंकल ने पहले अश्लील वीडियो और खिलौने दिखाते थे फिर गलत काम करते थे। दर्द से जब वह चीखते तो उन्हें वीडियो गेम में उलझाकर शांत करा दिया जाता था। अंटी सब कुछ देखती रहती थीं। वह खुद उन्हें शांत कराती थी। घर में बताने से मना किया जाता था।
एक बौने बच्चे ने कोर्ट को इशारों में बताया कि उसके साथ जब कुकर्त्य हुआ तो तेज बुखार आ गया। घर में इशारे से बताया तो परिवार के लोग समझ नहीं पाए। इसी प्रकार दो सगे नाबालिग भाइयों ने बताया कि उसके साथ कई तरह की अमानवीय हरकतें की गईं। तीन नाबालिग बच्चों ने बताया कि अंकल इस सब का वीडियो बनाते थे। दूध वाले के नाबालिग बेटे ने बताया कि अंकल ने पापा से कहा बच्चे को यहां छोड़ जाओ मैं इसे कंप्यूटर सिखा दूंगा। उसके बाद एक साल कुकृत्य किया। पापा से कम मिलने देते थे। अगर वह चला जाता था तो पापा से बुलवा लेते थे।
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नौकरानी के बेटे ने बताया कि अंकल कहते थे जैसा मैं कहूं करो नहीं तो वीडियो गेम नहीं खेलने दूंगा। रुपये भी नहीं दूंगा। रामभवन चाहे दूध वाला हो या किराने वाला या नौकरानी जिसे भी जानता था उसके बच्चे को किसी न किसी बहाने से बुलाकर उसे वीडियो गेम, रुपये आदि का लालच देकर जाल में फंसा लेता था।
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इनकी गवाही ने पहुंचाया फांसी के फंदे तक
बांदा। रामभवन के यौन शोषण के मामले में बच्चों के अतिरिक्त सीबीआई ने साक्षी के तौर 74 अन्य लोगों को अदालत में पेश किया था। जिसमें 22 शिक्षक, एक ग्राम पंचायत अधिकारी, सिंचाई विभाग के अधिकारी, डॉक्टर आदि शामिल हैं। इनकी गवाही ने भी रामभवन व उसकी पत्नी दुर्गावती को फांसी के फंदे तक पहुंचाने का काम किया। शिक्षकों ने बच्चों के नाबालिग होने की पुष्टि की और डॉक्टरों ने मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर कुकृत्य की पुष्टि की। अन्य अधिकारियों ने वीडियो, फोटो में रामभवन व उसकी पत्नी के होने की पुष्टि की। कोर्ट ने बच्चों व इनके बयान के आधार पर माना कि यह एक ऐसा दरिंदा है जिसके साथ नरमी बरतना समाज के लिए घातक होगा। ऐसे दरिंदों का मरना ही बेहतर है। जिन्होंने लोकसेवक जैसे पद पर होते हुए भी नाबालिग बच्चों के बचपन को तहस नहस कर दिया था।
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अदालत ने भी छुपाई नाबालिगों की पहचान
बांदा। सुप्रीम कोर्ट के आदेश हैं कि दुष्कर्म व कुकृत्य के मामलों में पीड़ित की पहचान को उजागर न किया जाए। यौन शोषण के मामले में सीबीआई ने तो बयानों में पीड़ितों के नाम खोले हैं लेकिन अदालत ने अपने फैसले में पीड़ितों के नाम नहीं लिखे। बच्चों को पीड़ित-एक व दो के नाम से संबोधित किया है। पूरे फैसले में कही भी अदालत ने नाबालिगों के नाम को उजागर नहीं किया।
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ऐसे मामलों में शासन को जगाया
बांदा। अदालत ने ऐसे बच्चों के मामले में शासन को जगाने का काम किया है। न्यायाधीश ने अपने फैसले में जिलाधिकारी काे आदेश दिए हैं कि वह इस फैसले की एक प्रति भारत सरकार और मुख्य सचिव को भेजें। ताकि वर्तमान व भविष्य में पीड़ित बच्चों के पुनर्वास व उपचार के लिए वह उच्चाधिकार समिति का गठन की जा सके। ताकि ऐसे पीड़ित बच्चों को चिकित्सीय सुविधा और अन्य राहत प्रदान कराया जाना सुनिश्चित हो सके।
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अलग-अलग बयान में बताया कि रामभवन अंकल अपने घर लेकर आए थे अंकल ने पहले अश्लील वीडियो और खिलौने दिखाते थे फिर गलत काम करते थे। दर्द से जब वह चीखते तो उन्हें वीडियो गेम में उलझाकर शांत करा दिया जाता था। अंटी सब कुछ देखती रहती थीं। वह खुद उन्हें शांत कराती थी। घर में बताने से मना किया जाता था।
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एक बौने बच्चे ने कोर्ट को इशारों में बताया कि उसके साथ जब कुकर्त्य हुआ तो तेज बुखार आ गया। घर में इशारे से बताया तो परिवार के लोग समझ नहीं पाए। इसी प्रकार दो सगे नाबालिग भाइयों ने बताया कि उसके साथ कई तरह की अमानवीय हरकतें की गईं। तीन नाबालिग बच्चों ने बताया कि अंकल इस सब का वीडियो बनाते थे। दूध वाले के नाबालिग बेटे ने बताया कि अंकल ने पापा से कहा बच्चे को यहां छोड़ जाओ मैं इसे कंप्यूटर सिखा दूंगा। उसके बाद एक साल कुकृत्य किया। पापा से कम मिलने देते थे। अगर वह चला जाता था तो पापा से बुलवा लेते थे।
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नौकरानी के बेटे ने बताया कि अंकल कहते थे जैसा मैं कहूं करो नहीं तो वीडियो गेम नहीं खेलने दूंगा। रुपये भी नहीं दूंगा। रामभवन चाहे दूध वाला हो या किराने वाला या नौकरानी जिसे भी जानता था उसके बच्चे को किसी न किसी बहाने से बुलाकर उसे वीडियो गेम, रुपये आदि का लालच देकर जाल में फंसा लेता था।
इनकी गवाही ने पहुंचाया फांसी के फंदे तक
बांदा। रामभवन के यौन शोषण के मामले में बच्चों के अतिरिक्त सीबीआई ने साक्षी के तौर 74 अन्य लोगों को अदालत में पेश किया था। जिसमें 22 शिक्षक, एक ग्राम पंचायत अधिकारी, सिंचाई विभाग के अधिकारी, डॉक्टर आदि शामिल हैं। इनकी गवाही ने भी रामभवन व उसकी पत्नी दुर्गावती को फांसी के फंदे तक पहुंचाने का काम किया। शिक्षकों ने बच्चों के नाबालिग होने की पुष्टि की और डॉक्टरों ने मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर कुकृत्य की पुष्टि की। अन्य अधिकारियों ने वीडियो, फोटो में रामभवन व उसकी पत्नी के होने की पुष्टि की। कोर्ट ने बच्चों व इनके बयान के आधार पर माना कि यह एक ऐसा दरिंदा है जिसके साथ नरमी बरतना समाज के लिए घातक होगा। ऐसे दरिंदों का मरना ही बेहतर है। जिन्होंने लोकसेवक जैसे पद पर होते हुए भी नाबालिग बच्चों के बचपन को तहस नहस कर दिया था।
अदालत ने भी छुपाई नाबालिगों की पहचान
बांदा। सुप्रीम कोर्ट के आदेश हैं कि दुष्कर्म व कुकृत्य के मामलों में पीड़ित की पहचान को उजागर न किया जाए। यौन शोषण के मामले में सीबीआई ने तो बयानों में पीड़ितों के नाम खोले हैं लेकिन अदालत ने अपने फैसले में पीड़ितों के नाम नहीं लिखे। बच्चों को पीड़ित-एक व दो के नाम से संबोधित किया है। पूरे फैसले में कही भी अदालत ने नाबालिगों के नाम को उजागर नहीं किया।
ऐसे मामलों में शासन को जगाया
बांदा। अदालत ने ऐसे बच्चों के मामले में शासन को जगाने का काम किया है। न्यायाधीश ने अपने फैसले में जिलाधिकारी काे आदेश दिए हैं कि वह इस फैसले की एक प्रति भारत सरकार और मुख्य सचिव को भेजें। ताकि वर्तमान व भविष्य में पीड़ित बच्चों के पुनर्वास व उपचार के लिए वह उच्चाधिकार समिति का गठन की जा सके। ताकि ऐसे पीड़ित बच्चों को चिकित्सीय सुविधा और अन्य राहत प्रदान कराया जाना सुनिश्चित हो सके।