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खेत रौंद रहे, रोजगार भी नहीं दे रहे ठेकेदार
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खप्टिहा में केन नदी में बालू खनन करतीं पोकलैंड।
- फोटो : BANDA
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खप्टिहा कलां (बांदा)। सड़क तोड़ने और खेत रौंदने को लेकर ही ग्रामीणों में रोष नहीं है, बल्कि उनमें इस बात का भी रोष है कि उन्हें नजरंदाज कर बाहरी लोगों को खदानों में मजदूरी दी जा रही है। स्थानीय ग्रामीण बेरोजगार घूम रहे हैं। यहां स्थित केन नदी में चल रही चार खदानों में यहीं रवैया है।
खप्टिहा कलां में चार खदानें बाहर की कंपनियों ने ले रखी हैं। इनमें दिन-रात एनजीटी और हाईकोर्ट के आदेशों का खुला उल्लंघन हो रहा है। पोकलैंड मशीनें नियम विरुद्ध नदी की जलधारा में उतारकर बालू निकाली जा रही है। एनओसी शर्त के मुताबिक खनन की गहराई इत्यादि का भी उल्लंघन हो रहा है।
खेत रौंदने और आसपास लगी फसलें चौपट होने पर दो दिन पूर्व ग्रामीणों और किसानों ने बरेहटा गांव के मजरा शिवरामपुर में जाम लगा दिया था, लेकिन इसके बाद भी मशीनों से खनन और फसलों को पहुंच रहे नुकसान पर लगाम नहीं लगी। कई पोकलैंड मशीनों से कराए जा रहे खनन से नदी की जलधारा भी प्रभावित हो रही है।
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छनिहा डेरा के किसान बड़कू निषाद, रामशरण, रामस्वरूप, अरविंद, जगन्नाथ, सैमरा डेरा के लाखन निषाद, रमइया आदि का कहना है कि दिन-रात बालू के ट्रकों की धमाचौकड़ी से उनके खेत बर्बाद हो रहे हैं। पानी न छिड़के जाने से धूल उड़ रही है। उन्हें इस बात का भी मलाल है कि खदान संचालकों द्वारा खदानों में स्थानीय ग्रामीणों को मजदूरी नहीं दी जा रही। ठेकेदार बाहरी मजदूर रखे हैं। उधर, इस बारे में पैलानी तहसीलदार राजीव निगम ने बताया कि उन्होंने इस बारे में अपनी रिपोर्ट खनिज विभाग को भेज दी है।
तौल के बाद ओवरलोडिंग
खप्टिहा कलां। सभी खदानों में धर्मकांटा लगाना अनिवार्य कर दिया गया है। खप्टिहा की खदानों में भी धर्मकांटा लगाया गया है, लेकिन ओवरलोडिंग बदस्तूर जारी है। खेल ये हो रहा है कि अंडरलोड ट्रक धर्मकांटे में तौले जाने के बाद ओवरलोडिंग कराते हैं। इसके लिए 1300 रुपये प्रति बाकेट (पोकलैंड का सूप) ट्रकों में डलवाया जाता है।
केन नदी जलधारा में बना पुल तोड़ा
खप्टिहा कलां। नदी की जलधारा में अवैध रास्ता/पुल बनाकर किए जा रहे खनन और ट्रकों की आवाजाही का ग्रामीणों द्वारा विरोध और खबरों के प्रकाशन के बाद शुक्रवार को खदान ठेकेदारों ने खुद ही अपनी मशीनों से अवैध पुल तोड़ दिया। लगभग डेढ़ सौ मीटर लंबे इस पुल से पोकलैंड मशीन जलधारा से बालू निकाल रही थी।
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खप्टिहा कलां में चार खदानें बाहर की कंपनियों ने ले रखी हैं। इनमें दिन-रात एनजीटी और हाईकोर्ट के आदेशों का खुला उल्लंघन हो रहा है। पोकलैंड मशीनें नियम विरुद्ध नदी की जलधारा में उतारकर बालू निकाली जा रही है। एनओसी शर्त के मुताबिक खनन की गहराई इत्यादि का भी उल्लंघन हो रहा है।
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खेत रौंदने और आसपास लगी फसलें चौपट होने पर दो दिन पूर्व ग्रामीणों और किसानों ने बरेहटा गांव के मजरा शिवरामपुर में जाम लगा दिया था, लेकिन इसके बाद भी मशीनों से खनन और फसलों को पहुंच रहे नुकसान पर लगाम नहीं लगी। कई पोकलैंड मशीनों से कराए जा रहे खनन से नदी की जलधारा भी प्रभावित हो रही है।
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छनिहा डेरा के किसान बड़कू निषाद, रामशरण, रामस्वरूप, अरविंद, जगन्नाथ, सैमरा डेरा के लाखन निषाद, रमइया आदि का कहना है कि दिन-रात बालू के ट्रकों की धमाचौकड़ी से उनके खेत बर्बाद हो रहे हैं। पानी न छिड़के जाने से धूल उड़ रही है। उन्हें इस बात का भी मलाल है कि खदान संचालकों द्वारा खदानों में स्थानीय ग्रामीणों को मजदूरी नहीं दी जा रही। ठेकेदार बाहरी मजदूर रखे हैं। उधर, इस बारे में पैलानी तहसीलदार राजीव निगम ने बताया कि उन्होंने इस बारे में अपनी रिपोर्ट खनिज विभाग को भेज दी है।
तौल के बाद ओवरलोडिंग
खप्टिहा कलां। सभी खदानों में धर्मकांटा लगाना अनिवार्य कर दिया गया है। खप्टिहा की खदानों में भी धर्मकांटा लगाया गया है, लेकिन ओवरलोडिंग बदस्तूर जारी है। खेल ये हो रहा है कि अंडरलोड ट्रक धर्मकांटे में तौले जाने के बाद ओवरलोडिंग कराते हैं। इसके लिए 1300 रुपये प्रति बाकेट (पोकलैंड का सूप) ट्रकों में डलवाया जाता है।
केन नदी जलधारा में बना पुल तोड़ा
खप्टिहा कलां। नदी की जलधारा में अवैध रास्ता/पुल बनाकर किए जा रहे खनन और ट्रकों की आवाजाही का ग्रामीणों द्वारा विरोध और खबरों के प्रकाशन के बाद शुक्रवार को खदान ठेकेदारों ने खुद ही अपनी मशीनों से अवैध पुल तोड़ दिया। लगभग डेढ़ सौ मीटर लंबे इस पुल से पोकलैंड मशीन जलधारा से बालू निकाल रही थी।