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टैंकरों से पानी के साथ बंट रहीं बीमारियां
ब्यूरो/अमर उजाला, बांदा
Updated Mon, 11 Apr 2016 11:38 PM IST
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जल संकट
- फोटो : अमर उजाला
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बांदा। जल संकट वाले वार्डों के लोग जल संस्थान के टैंकरों का पानी पीकर संक्रामक बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं। टैंकरों की बिना सफाई कराए कुओं से पानी भरकर वार्डों में भेज दिया जाता है। सूखे के हालात में बूंद-बूंद पानी को मोहताज नगरवासी दूषित जल पीकर डायरिया समेत कई गंभीर बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं।
गरीबों की प्यास बुझाने के लिए नुक्कड़ और सार्वजनिक स्थलों पर लगे स्टैंड पोस्ट (सार्वजनिक टोटियां) गायब हैं। शहर के 24,325 परिवारों में सिर्फ 16,019 ने जल संस्थान से नलों के कनेक्शन ले रखे हैं, शेष परिवारों को हैंडपंप और कुओं का सहारा है।
नल का कनेक्शन कराने में करीब 8 से 10 हजार रुपये खर्च आता है। मजबूरी में गरीब परिवार हैंडपंपों और कुओं का पानी उपयोग कर रहे हैं। खाईंपार, छावनी, मर्दननाका, छिपटहरी, सर्वोदय नगर, चमरौटी, बंगालीपुर समेत कई मोहल्ले ऐसे हैं, जहां दशकों पुरानी पाइप लाइनें हैं और यहां मानक से ज्यादा कनेक्शन हैं। हैंडपंप भी रिबोर के अभाव में ध्वस्त पड़े हैं। गर्मी में जल संस्थान के टैंकर ही इनका सहारा बनते हैं।
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दावा तो शुद्ध जल का है, पर पानी में कीड़े कुलबुलाते हैं। नियमत: टैंकर को भरने से पहले हर रोज सफाई कराना चाहिए, लेकिन जल संस्थान अधिकारी इस पर ध्यान नहीं दे रहे हैं। गर्मी बीत जाती है, पर टैंकरों की शायद ही कभी सफाई होती हो। नतीजतन लोग टैंकरों का पानी पीकर बीमार हो रहे हैं। जिला अस्पताल में भर्ती डायरिया से पीड़ित कई मरीजों ने इसके टैंकरों के पानी को ही दोषी माना।
ब्लीचिंग से होती है टैंकर की सफाई
पानी के टैंकरों की सप्ताह में एक बार ब्लीचिंग आदि डालकर नियमित सफाई कराई जाती है। हमारे पास सफाई न होने की ऐसी कोई शिकायत नहीं आई। यदि कर्मचारी लापरवाही कर रहे हैं तो उन पर कार्रवाई की जाएगी।
- सुरेश सिंह, अधिशाषी अभियंता, जल संस्थान बांदा।
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गरीबों की प्यास बुझाने के लिए नुक्कड़ और सार्वजनिक स्थलों पर लगे स्टैंड पोस्ट (सार्वजनिक टोटियां) गायब हैं। शहर के 24,325 परिवारों में सिर्फ 16,019 ने जल संस्थान से नलों के कनेक्शन ले रखे हैं, शेष परिवारों को हैंडपंप और कुओं का सहारा है।
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नल का कनेक्शन कराने में करीब 8 से 10 हजार रुपये खर्च आता है। मजबूरी में गरीब परिवार हैंडपंपों और कुओं का पानी उपयोग कर रहे हैं। खाईंपार, छावनी, मर्दननाका, छिपटहरी, सर्वोदय नगर, चमरौटी, बंगालीपुर समेत कई मोहल्ले ऐसे हैं, जहां दशकों पुरानी पाइप लाइनें हैं और यहां मानक से ज्यादा कनेक्शन हैं। हैंडपंप भी रिबोर के अभाव में ध्वस्त पड़े हैं। गर्मी में जल संस्थान के टैंकर ही इनका सहारा बनते हैं।
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दावा तो शुद्ध जल का है, पर पानी में कीड़े कुलबुलाते हैं। नियमत: टैंकर को भरने से पहले हर रोज सफाई कराना चाहिए, लेकिन जल संस्थान अधिकारी इस पर ध्यान नहीं दे रहे हैं। गर्मी बीत जाती है, पर टैंकरों की शायद ही कभी सफाई होती हो। नतीजतन लोग टैंकरों का पानी पीकर बीमार हो रहे हैं। जिला अस्पताल में भर्ती डायरिया से पीड़ित कई मरीजों ने इसके टैंकरों के पानी को ही दोषी माना।
ब्लीचिंग से होती है टैंकर की सफाई
पानी के टैंकरों की सप्ताह में एक बार ब्लीचिंग आदि डालकर नियमित सफाई कराई जाती है। हमारे पास सफाई न होने की ऐसी कोई शिकायत नहीं आई। यदि कर्मचारी लापरवाही कर रहे हैं तो उन पर कार्रवाई की जाएगी।
- सुरेश सिंह, अधिशाषी अभियंता, जल संस्थान बांदा।