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डेढ़ सैकड़ा गोवंश पंचायत भवन में किए कैद

Sun, 16 Jan 2022 11:33 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Sun, 16 Jan 2022 11:33 PM IST
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The cows trampled the crop, the farmers were chased and imprisoned in the panchayat building
रिसौरा गांव के पंचायत भवन में बंद की गईं अन्ना गायें। - फोटो : BANDA
नरैनी। फसलों की बर्बादी से दुखी रिसौरा गांव के किसानों ने रविवार को इधर उधर से हांककर करीब 150 अन्ना गायों को पंचायत भवन में बंद कर दिया। किसानों ने पंचायत भवन की दीवारों पर अपनी समस्या लिखकर चेतावनी दी है कि इससे निजात न मिली तो विधानसभा चुनाव का बहिष्कार करेंगे। वोट मांगने आए नेताओं से कारण पूछेंगे कि वे इस मसले पर चुप्पी क्यों साधे हैं। पोलिंग पार्टियों को गांव में घुसने नहीं देंगे। अंजाम चाहे कुछ भी हो। अन्ना गायें पूरा दिन पंचायत भवन में भूखी-प्यासी बंद रहीं। किसी अधिकारी ने उनकी सुध नहीं ली।
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अन्ना गायों का मुद्दा विधानसभा चुनाव में सत्तारूढ़ दल के लिए परेशानी का सबब बन सकता है। किसान चुनाव को मौका मानकर नेताओं पर दबाव बनाने में जुट गए हैं। नरैनी क्षेत्र के लगभग सभी गांव अन्ना मवेशियों से त्रस्त हैं। हाल ही में यहां की गोशाला से प्रशासन की ओर से सैकड़ों गायों को मध्य प्रदेश की सीमा पर छोड़ दिया गया था। इनमें से कई गायों को वहां जिंदा दफन कर दिया गया था।
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इस मामले ने तूल पकड़ा तो एसडीएम और ईओ को निलंबन करना पड़ा। इसके बाद भी गोशालाओं में व्यवस्थाएं नहीं सुधरीं। रिसौरा के किसान मुनीम तिवारी, पप्पू, रमाशंकर गौतम, गणेशा कोरी, रामकिशन यादव, शिवकांत शुक्ला, गंगा, राजकुमार अग्निहोत्री और कल्लू रुपौलिहा ने बताया कि अन्ना गायों ने उनकी गेहूं की फसल बर्बाद कर दी है। जो बची फसल को बचाने के लिए जान जोखिम में डालकर दिन-रात खेत में गुजार रहे हैं।
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मुख्यमंत्री पोर्टल से लेकर स्थानीय और जिला प्रशासन तक की गईं शिकायतों और फरियादों की अनसुनी कर दी गई है। उप जिलाधिकारी रवींद्र सिंह ने कहा कि तहसीलदार और बीडीओ को रिसौरा गांव भेजा जा रहा है। वह किसानों से बात कर व्यवस्था कराएंगे। गोशाला के लिए भूमि उपलब्ध कराने में किसान मदद करें।

और ये खुद के खर्च से चला रहे गोशाला
इसी गांव के समाजसेवी अनंतराम त्रिपाठी पिछले दो साल से अपनी निजी भूमि पर अस्थायी निजी गोशाला बनाकर अपनी जेब से गायों को चारा-भूसा, इलाज की व्यवस्था कर रहे हैं। पिछले माह इस गांव में सीडीओ सहित अन्य अधिकारी आए थे। गोशाला का भरोसा दे गए थे। मगर आज तक सुध नहीं ली।
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