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अभियान की अवधि पूरी, हाई पर गड्ढे ही गड्ढे
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तिंदवारी (बांदा)। सड़कों को गड्ढा मुक्त करने के सरकारी अभियान की पोल बांदा-टांडा नेशनल हाईवे खोल रहा है। प्रदेश की राजधानी लखनऊ और कारोबारी शहर कानपुर को जोड़ने वाला यह हाईवे गड्ढामुक्त नहीं हो सका। सरकार की गड्ढा मुक्त अभियान की समय सीमा पांच दिसंबर खत्म होने के बाद भी हाईवे पर गड्ढे ही गड्ढे हैं।
जिला मुख्यालय से बेंदा घाट तक लगभग 40 किलोमीटर हाईवे बांदा पीडब्ल्यूडी (एनएच डिवीजन) के जिम्मे है। बड़ी संख्या में यहां बालू, गिट्टी आदि के वाहन और यात्रियों के छोटे-बड़े वाहन रात-दिन गुजरते हैं। हाईवे तिंदवारी कस्बे के बीच से गुजरा है। मुख्यालय से यहां तक दोनों ओर एक दर्जन से ज्यादा गांव हैं। पूरे हाईवे में लगभग एक सैकड़ा स्थानों पर छोटे-बड़े गड्ढे हैं। यहां हाईवे गड्ढामुक्त नहीं हो सका। तिंदवारी कस्बे में सिकंदरपुर, ब्लाक कार्यालय, पपरेंदा तिराहा, थाना, पानी की टंकी, जीजीआईसी, पेट्रोल पंप, गैस गोदाम आदि के पास गड्ढों की भरमार है। हल्के और दोपहिया वाहन दुर्घटनाग्रस्त हो जाते हैं।
उधर, हाईवे के गड्ढा मुक्त न होने के सवाल पर नेशनल हाईवे अथारिटी ऑफ इंडिया (एनएचएआई), रायबरेली यूनिट के प्रोजेक्ट मैनेजर योगेश तिलक का कहना है कि चालू माह दिसंबर के अंत तक हाईवे की मरम्मत और गड्ढे भरने का काम शुरू हो जाएगा। उनके मुताबिक टेंडर प्रक्रिया में कुछ व्यवधान से यह कार्य नहीं हो पाया था। अब पुराने ठेकेदार से ही कराया जाएगा।
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जिला मुख्यालय से बेंदा घाट तक लगभग 40 किलोमीटर हाईवे बांदा पीडब्ल्यूडी (एनएच डिवीजन) के जिम्मे है। बड़ी संख्या में यहां बालू, गिट्टी आदि के वाहन और यात्रियों के छोटे-बड़े वाहन रात-दिन गुजरते हैं। हाईवे तिंदवारी कस्बे के बीच से गुजरा है। मुख्यालय से यहां तक दोनों ओर एक दर्जन से ज्यादा गांव हैं। पूरे हाईवे में लगभग एक सैकड़ा स्थानों पर छोटे-बड़े गड्ढे हैं। यहां हाईवे गड्ढामुक्त नहीं हो सका। तिंदवारी कस्बे में सिकंदरपुर, ब्लाक कार्यालय, पपरेंदा तिराहा, थाना, पानी की टंकी, जीजीआईसी, पेट्रोल पंप, गैस गोदाम आदि के पास गड्ढों की भरमार है। हल्के और दोपहिया वाहन दुर्घटनाग्रस्त हो जाते हैं।
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उधर, हाईवे के गड्ढा मुक्त न होने के सवाल पर नेशनल हाईवे अथारिटी ऑफ इंडिया (एनएचएआई), रायबरेली यूनिट के प्रोजेक्ट मैनेजर योगेश तिलक का कहना है कि चालू माह दिसंबर के अंत तक हाईवे की मरम्मत और गड्ढे भरने का काम शुरू हो जाएगा। उनके मुताबिक टेंडर प्रक्रिया में कुछ व्यवधान से यह कार्य नहीं हो पाया था। अब पुराने ठेकेदार से ही कराया जाएगा।
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