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दीमक व चूहा चुन गए सैकड़ों मौतों का ‘राज’

Sat, 30 Nov 2019 11:00 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Sat, 30 Nov 2019 11:00 PM IST
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Termite and mouse selected 'secret' of hundreds of deaths
Termite and mouse selected 'secret' of hundreds of deaths - फोटो : BANDA
जनपद मुख्यालय के पुलिस लाइन में स्थित विसरा संग्रह कक्ष में 10 हजार से अधिक मौतों की गुत्थी कांच के जार (बर्तन) में बंद है। इनमें कई में दीमक लग गई हैं। कई को चूहा, विषखापर, नेवला आदि जानवरों ने नष्ट कर दिया है। यहां 1962 से साल 2013 तक के विसरा रखे गए हैं। इनमें लगभग एक सैकड़ा विसरा जांच के लिए भेजे जा चुके हैं।
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साल 2013 के बाद विसरा रखने की व्यवस्था थानों में कर दी गई है। पुलिस लाइन का विसरा कक्ष जर्जर हालत में पहुंच गया है। बंद खिड़की और दरवाजों और पुरानी दीवारों में जानवरों ने सुराख कर दिए हैं।
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जब कि मानक के मुताबिक विसरा संकलन कक्ष को चाराें ओर से सुरक्षित और बंद होना चाहिए। जार रखने के लिए अलमारियां होनी चाहिए। पिछले एक वर्ष से तो इस कक्ष का ताला भी नहीं खुला है। जनपद के डेढ़ दर्जन थानों में एक सैकड़ा से अधिक विसरा रखे हुए हैं। इनके केस अदालत में विचाराधीन हैं।
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मौत की परिस्थितियां संदिग्ध होने और पोस्टमार्टम में मृत्यु की वजह स्पष्ट न हो पाने की दशा में शव के कुछ शारीरिक हिस्सों को जांच के लिए फोरेंसिक साइंस लेबोरेट्री भेजा जाता है। वहां से आई रिपोर्ट मौत का कारण बताती है। मानव शरीर के अंदरूनी अंगों फेफड़ा, किडनी, आंत, लीवर आदि को विसरा कहते हैं।
इन अंगों को तीन कांच के जार (बर्तन) में रखा जाता है। एक में पाचन तंत्र, दूसरे में ब्रेन, किडनी, लीवर और तीसरे में ब्लड रखा जाता है। आम तौर पर 100 ग्राम ब्लड, 100 मूत्र, 500 ग्राम लीवर, सहित किडनी, तिल्ली और छोटी अॅंत आंत का टुकड़ा सुरक्षित किया जाता है।
जनपद के वरिष्ठ अधिवक्ता (फौजदारी) अशोक दीक्षित बताते हैं कि अदालत में विसरा रिपोर्ट मान्य साक्ष्य है। अधिकांश फैसले इसी के आधार पर होते हैं। इस रिपोर्ट से आरोपियों को सजा और रिहाई दोनों ही मिलती है।
वह बताते हैं कि विसरा रिपोर्ट को लेकर कोर्ट में बहस होती है। सीआरपीसी की धारा-293 के तहत एक्सपर्ट व्यू एडमिशिबल एवीडेंस होता है। बचाव पक्ष चाहे तो विसरा रिपोर्ट तैयार करने वाले एक्सपर्ट को भी अदालत में तलब किए जाने की अर्जी दे सकता है। कोर्ट एक्सपर्ट से जिरह कर सकती है। कभी कभार विसरा परीक्षण में भी मौत की वजह स्पष्ट नहीं हो पाती।

एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि तमाम झंझटों और चकल्लस से बचने के लिए अधिकांश मामलों में विसरा परीक्षण को नहीं भेजा जाता। क्योंकि इसे लैब में भेजने से लेकर वहां रिपोर्ट लाने और कोर्ट में दाखिल करने का जिम्मा पुलिस का होता है। हालांकि कोर्ट के आदेश पर ही विसरा परीक्षण के लिए लैब (लखनऊ) भेजा जाता है।
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