डरो नहीं ‘अनाज बैंक’ है! नरैनी के गहबरा गांव से शुरुअात

ब्यूरो/अमर उजाला, बांदा Updated Fri, 03 Apr 2015 11:16 PM IST
Starting grain bank in the village Ghbra
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‘भइया बचा लिया, भगवान भला करे’
  • 70 वर्षीय किसान चिमना के पास 6 बीघा जमीन है। ओला और बारिश से पूरी फसल खत्म हो गई है। पिछले साल भी फसल न होने से सदमे में उसकी पत्नी पियरिया चल बसी थी। चंदे से अंतिम संस्कार हुआ था। अबकी फिर चिमना के सामने वही परिस्थितियां हैं। घर में दाने के लाले हैं। कई दिनों से चूल्हा नहीं जला। शुक्रवार को अनाज बैंक से उन्हें 10 किलो अनाज दिया गया। अनाज की गठरी बांधकर चिमना बोल उठा- ‘भइया बचा लिया, भगवान भला करे।’

दो दिन से चूल्हा नहीं जला, 15 किलो अनाज मिला
  • 7 बीघा जमीन के काश्तकार रजउवा के घर में दो दिन से चूल्हा नहीं जला। फाकाकशी की हालत है। भुखमरी से परेशान होकर उसके परिजन एक माह पहले गांव छोड़कर कहीं पलायन कर गए। 55 वर्षीय रजउवा भूख से फफक पड़ा। अनाज बैंक के सदस्य बिसाली और तेज बहादुर सिंह की खोज-खबर पर रजउवा को अनाज बैंक से 15 किलो गेहूं दिया गया है।

स्कूल बंद तो खाना भी बंद हो गया
  • फसल पर कहर टूटा तो बेटों की हिम्मत जवाब दे गई। वे परदेश चले गए। अब वृद्धा तुलसा देवी घर में अकेली है। बारिश से न सिर्फ फसल बल्कि घर भी जमींदोज हो गया। साहूकारों का 60 हजार रुपया कर्ज है। घर में 10 दिनों से चूल्हा नहीं जला। तुलसा रोजाना सरकारी स्कूल जाकर मिड डे मील खाकर भूख मिटा लेती थी, लेकिन वहां छुट्टी के चलते अब उसे मिड डे मील भी नहीं मिल रहा। शुक्रवार को उसे ‘अनाज बैंक’ से उसे 15 किलो अनाज दिया गया।

आपदा पीड़ित किसानों के परिवारों की मदद के लिए ‘अनाज बैंक’ की शुरुआत की गई है। स्वयंसेवी संगठन विद्याधाम समिति और एक्शन एड, लखनऊ ने भुखमरी से जूझ रहे परिवारों को बचाने की यह कवायद की है।

मौसम की मार से फसल गंवा बैठे किसानों की भुखमरी जैसी परिस्थितियों में सदमे और सुसाइड से हो रही मौतों पर भले ही सरकारें ज्यादा संवेदनशील नजर न आ रही हो पर स्वयंसेवी संगठन इसमें आगे आए हैं।

आपदा पीड़ित गांवों में भुखमरी से जूझ रहे परिवारों को बचाने के लिए ‘अनाज बैंक’ खोले जा रहे हैं। इसकी शुरुआत नरैनी क्षेत्र के आपदा पीड़ित गांव गहबरा से की गई है।

यहां स्वयंसेवी संगठन विद्याधाम समिति और एक्शन एड, लखनऊ ने सात क्विंटल गेहूं से ‘अनाज बैंक’ चालू कर दिया है। शुक्रवार को पहले दिन चार जरूरतमंदों को अनाज की मदद दी गई।

इस ‘अनाज बैंक’ में कई बड़े काश्तकारों ने भी सहयोग करने का आश्वासन दिया है। उनका कहना है कि 25-25 किलो अनाज देकर वे भी मदद करेंगे। ‘अनाज बैंक’ से मदद देने के लिए गांव के पांच लोगों की समिति गठित की गई है, जो रोजाना सुबह-शाम गांव में भ्रमण कर उन परिवारों का पता करेंगे, जहां चूल्हे ठंडे पड़े हैं।

साथ ही उन किसानों को चिह्नित करेंगे, जिनमें सदमा या सुसाइड के आसार हों। उन्हें मदद के साथ भरोसा दिलाकर जीने का हौसला दिलाएंगे। स्वयंसेवी संगठन विद्याधाम समिति मंत्री राजाभइया ने कहा है कि भूख से कोई मौत नहीं होने दी जाएगी।

उन्होंने बताया कि गहबरा के बाद अब नौगवां, नीबी, माऊ सिंह का पुरवा, कछियन पुरवा, भोड़ा पुरवा और घसराउट गांवों में भी स्थिति खराब है। ऐसे में शीघ्र ही इन गांवों में भी अनाज बैंक खोले जाएंगे। उन्होंने बताया कि गहबरा में तेज बहादुर सिंह, बिसाली, देव सिंह, राम प्यारे, ठाकुरदीन को अनाज बैंक समिति का सदस्य नामित किया गया है।

उनके साथ माया श्रीवास्तव, रीना पांडेय, सुरेश कुमार, संगीता, छेदीलाल, अंजलि, रवींद्र कुमार आदि उपस्थित रहे। गौरतलब है कि वर्ष 2005 में सूखे के दौरान प्रदेश सरकार ने गांवों में भुखमरी से हो रही मौतों को रोकने के लिए ‘अनाज बैंक’ योजना लागू की थी। पर यह कुछ ही दिनों बार फ्लाप हो गई थी।

हर गांव में बनेगा ‘किसान क्रेडिट कार्ड संघ’
बांदा। अब गांव-गांव में ‘किसान क्रेडिट कार्ड संघ’ बनाए जाएंगे। इसमें क्रेडिट कार्ड धारक किसानों को शामिल किया जाएगा। यह संघ गांव में एकजुट होकर कर्ज वसूली के नाम पर उत्पीड़न करने वालों का मुकाबला करेंगे।

किसानों को हिम्मत बंधाएंगे कि सदमे या सुसाइड में जान न गंवाएं। बल्कि उत्पीड़न करने वाले की रिपोर्ट या उपभोक्ता फोरम में केस दर्ज कराएं। बृहस्पतिवार की देर शाम बड़ोखर खुर्द गांव में किसान क्रेडिट कार्ड धारकों के एकजुट होने और संघ बनाने की शुरूआत हो गई।

किसानों ने कहा कि गांव स्तर पर तैनात एक या दो कर्मचारी जब अपना सशक्त संगठन बनाकर सरकार को झुका सकते हैं तो गांवाें में बड़ी तादाद मेें मौजूद किसान क्यों नहीं? प्रगतिशील किसान प्रेम सिंह ने किसानों से कहा कि हर गांव में यह संघ गठित करें और बीमा या बैंक अथवा राजस्व विभाग के किसी अधिकारी या कर्मचारी के वसूली के लिए आने पर सारे किसान इकट्ठा होकर उनसे बात करें।

उन्होंने कहा कि बीमा, बैंक और शासन व प्रशासन किसानों को संगठित होकर लूट रहे हैं। ऐसे में किसानों को भी संगठित होने की जरूरत है। बैठक में सर्वसम्मति से अपील की गई कि कोई किसान सुसाइड जैसा घातक कदम न उठाए। बैठक में ध्रुव सिंह, शिवनारायण सिंह, अमर सिंह, वीरेंद्र सिंह, भोला सिंह, पवन सिंह, बलवीर सिंह आदि किसान शामिल रहे।

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