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50 फीसदी अनुदान मिला तो परवान चढ़ेगा अपना तालाब अभियान
ब्यूरो/अमर उजाला, बांदा
Updated Sat, 16 Jan 2016 11:19 PM IST
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बांदा। अपने खेत में तालाब खोदने वाले बुंदेलखंड के
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किसानों का 50 फीसदी अनुदान मिलेगा। मुख्य सचिव आलोक के इस आदेश से किसानों
में सूखे से लड़ने का नया जज्बा पैदा हुआ है।
तमाम किसानों ने अपने खेत में तालाब खोदने को कमर कसी है। इससे बुंदलेखंड में कुछ ठंडा पड़ चुका अपना तालाब अभियान फिर परवान चढ़ सकता है।
चित्रकूटधाम मंडल के किसान अब तक लगभग तीन सौ तालाब अपने खेतों में खोद चुके हैं। इस अभियान से जुड़े समाजसेवी भी अनुदान की खबर को खुशखबरी के रूप में देख रहे हैं।
13 और 14 जनवरी को महोबा व बांदा जिलों में आए मुख्य सचिव ने चित्रकूटधाम मंडल के कमिश्नर एल वेंकटेश्वर लू को निर्देश दिए थे कि अपने खेतों में तालाब बनवाने वाले किसानों को 50 फीसदी अनुदान दिया जाए।
इससे किसानों में नई उम्मीद जगी है। इससे पहले मनरेगा से पूरे बुंदेलखंड में सैकड़ों तालाब खुदवाए गए, जो उम्मीदों पर खरे नहीं उतरे। इक्का-दुक्का को छोड़ दें तो ज्यादातर तालाब सूखे पड़े हैं।
बनावट में तकनीकी खामी के चलते इनमें बारिश का पानी भी नहीं आ पाया। पिछले कुछ साल से चित्रकूटधाम मंडल मेें पानी पुनरोत्थान की शुरुआत की गई।
महोबा जिले से यह अभियान शुरू हुआ था। तीन साल में महोबा, बांदा, हमीरपुर, चित्रकूट, ललितपुर आदि जिलों में 270 से ज्यादा खेतों में तालाब खोदे गए हैं।
अपना तालाब अभियान के अगुवा समाजसेवी व किसान पुष्पेंद्र भाई का कहना है कि बुंदेलखंड के हरेक जिले में तालाब अभियान समितियां गठित की गई हैं।
सबसे ज्यादा कारगर अभियान महोबा जिले में चल रहा है। यहां तालाब खुदवाने वाले किसानों को जिला प्रशासन ने भी पुरस्कृत और प्रोत्साहित किया है।
पुष्पेंद्र भाई बताते हैं कि खेतों के तालाबों से अब तक लगभग 10 हजार एकड़ भूमि की सिंचाई की जा रही है। अपना तालाब खुदवाने में 50 फीसदी अनुदान का निर्देश शासन की अच्छी पहल है।
इस पर ईमानदारी से अमल हुआ तो बुंदेलखंड के ज्यादातर खेतों में तालाब नजर आएंगे। इससे सींच की समस्या काफी हद तक सुलझ जाएगी।
खेत में तालाब के अनुभवी किसान पुष्पेंद्र भाई ने मांग उठाई है कि अनुदान सीधे किसान को मिलना चाहिए, किसी सरकारी एजेंसी को नहीं। कुल रकबे के 10वें भाग में तालाब बनाना है। इसकी गहराई 4-5 मीटर से ज्यादा होनी चाहिए।
तालाब में लगभग सात हजार घन मीटर पानी का भंडार होगा। एक हेक्टेअर की सिंचाई के लिए 700 से 900 घन मीटर पानी की जरूरत होती है।
यह पानी 4-5 सींच के लिए काफी होता है। तालाब खोदने के दौरान यह बात ध्यान रखनी चाहिए की जिस तरफ से बारिश का पानी बहकर आता हो, उसी तरफ तालाब बनाया जाए।
पड़वा, काबर, ऊसर, मार, राकड़ आदि जमीनों में तालाब ज्यादा कारगर हैं। किसानों का यह कहना है कि सरकार अनुदान दे तो सीधे किसानों को मिले। किसी सरकारी एजेंसी को नहीं।
तमाम किसानों ने अपने खेत में तालाब खोदने को कमर कसी है। इससे बुंदलेखंड में कुछ ठंडा पड़ चुका अपना तालाब अभियान फिर परवान चढ़ सकता है।
चित्रकूटधाम मंडल के किसान अब तक लगभग तीन सौ तालाब अपने खेतों में खोद चुके हैं। इस अभियान से जुड़े समाजसेवी भी अनुदान की खबर को खुशखबरी के रूप में देख रहे हैं।
13 और 14 जनवरी को महोबा व बांदा जिलों में आए मुख्य सचिव ने चित्रकूटधाम मंडल के कमिश्नर एल वेंकटेश्वर लू को निर्देश दिए थे कि अपने खेतों में तालाब बनवाने वाले किसानों को 50 फीसदी अनुदान दिया जाए।
इससे किसानों में नई उम्मीद जगी है। इससे पहले मनरेगा से पूरे बुंदेलखंड में सैकड़ों तालाब खुदवाए गए, जो उम्मीदों पर खरे नहीं उतरे। इक्का-दुक्का को छोड़ दें तो ज्यादातर तालाब सूखे पड़े हैं।
बनावट में तकनीकी खामी के चलते इनमें बारिश का पानी भी नहीं आ पाया। पिछले कुछ साल से चित्रकूटधाम मंडल मेें पानी पुनरोत्थान की शुरुआत की गई।
महोबा जिले से यह अभियान शुरू हुआ था। तीन साल में महोबा, बांदा, हमीरपुर, चित्रकूट, ललितपुर आदि जिलों में 270 से ज्यादा खेतों में तालाब खोदे गए हैं।
अपना तालाब अभियान के अगुवा समाजसेवी व किसान पुष्पेंद्र भाई का कहना है कि बुंदेलखंड के हरेक जिले में तालाब अभियान समितियां गठित की गई हैं।
सबसे ज्यादा कारगर अभियान महोबा जिले में चल रहा है। यहां तालाब खुदवाने वाले किसानों को जिला प्रशासन ने भी पुरस्कृत और प्रोत्साहित किया है।
पुष्पेंद्र भाई बताते हैं कि खेतों के तालाबों से अब तक लगभग 10 हजार एकड़ भूमि की सिंचाई की जा रही है। अपना तालाब खुदवाने में 50 फीसदी अनुदान का निर्देश शासन की अच्छी पहल है।
इस पर ईमानदारी से अमल हुआ तो बुंदेलखंड के ज्यादातर खेतों में तालाब नजर आएंगे। इससे सींच की समस्या काफी हद तक सुलझ जाएगी।
खेत में तालाब के अनुभवी किसान पुष्पेंद्र भाई ने मांग उठाई है कि अनुदान सीधे किसान को मिलना चाहिए, किसी सरकारी एजेंसी को नहीं। कुल रकबे के 10वें भाग में तालाब बनाना है। इसकी गहराई 4-5 मीटर से ज्यादा होनी चाहिए।
तालाब में लगभग सात हजार घन मीटर पानी का भंडार होगा। एक हेक्टेअर की सिंचाई के लिए 700 से 900 घन मीटर पानी की जरूरत होती है।
यह पानी 4-5 सींच के लिए काफी होता है। तालाब खोदने के दौरान यह बात ध्यान रखनी चाहिए की जिस तरफ से बारिश का पानी बहकर आता हो, उसी तरफ तालाब बनाया जाए।
पड़वा, काबर, ऊसर, मार, राकड़ आदि जमीनों में तालाब ज्यादा कारगर हैं। किसानों का यह कहना है कि सरकार अनुदान दे तो सीधे किसानों को मिले। किसी सरकारी एजेंसी को नहीं।