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Banda News: साहब... मकान बेचकर भरूंगा रकम, कुछ दिन की मोहलत दे दीजिए
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बांदा। बांदा और महोबा के स्वास्थ्य विभाग में सामने आए जीपीएफ फर्जीवाड़े में अब रिकवरी का दबाव बढ़ने लगा है। कार्रवाई की तैयारी के बीच आरोपी कर्मचारियों का रुख भी बदल गया है। महोबा से आए लिपिक संतोष कुमार वर्मा ने अपर निदेशक स्वास्थ्य चित्रकूटधाम मंडल डॉ. अभय सिंह से कुछ दिन की मोहलत मांगी। उसने कहा कि वह मकान बेचकर गबन की रकम जमा करेगा। वहीं, बांदा के तिंदवारी पीएचसी में तैनात ऑप्टोमेट्रिस्ट ने भी जल्द रकम जमा करने का आश्वासन दिया है।
महोबा के स्वास्थ्य विभाग में तैनात लिपिक संतोष कुमार वर्मा पर जीपीएफ खातों से करीब 85 लाख रुपये के गबन का आरोप है। लेखा विभाग प्रयागराज की जांच में फर्जीवाड़ा सामने आया था। जांच में सामने आया कि लिपिक ने चालक अंबिका समेत कई कर्मचारियों के जीपीएफ खातों में हेरफेर कर रकम निकाली थी।
मामला सामने आने के बाद लिपिक के वेतन पर रोक लगाने के साथ ही संबंधित खातों को सीज किया गया। कार्रवाई का शिकंजा कसता देख संतोष कुमार वर्मा अपर निदेशक स्वास्थ्य के पास पहुंचा। अधिकारियों से बातचीत में उसने कुछ दिन की मोहलत मांगी और कहा कि वह अपना मकान बेच रहा है। मकान बिकते ही रकम जमा करने का आश्वासन दिया।
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पहले वकील लेकर पहुंचे, अब रकम जमा करने का भरोसा
बांदा के तिंदवारी पीएचसी में तैनात ऑप्टोमेट्रिस्ट पर भी जीपीएफ फर्जीवाड़े में लाखों रुपये की हेराफेरी का आरोप है। कार्रवाई की भनक लगने पर वह पहले वकील के साथ अधिकारियों के पास पहुंचा था। हालांकि अब उसने जल्द से जल्द धनराशि जमा करने का आश्वासन दिया है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों पर शासन स्तर से भी लगातार रिकवरी को लेकर दबाव है। अधिकारियों से गबन की रकम और उसकी वसूली के संबंध में अपडेट लिया जा रहा है। ऐसे में मंडल स्तर के अधिकारी भी वित्तीय नुकसान की भरपाई को प्राथमिकता दे रहे हैं।
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1.55 करोड़ का फर्जीवाड़ा, रिकवरी बनी चुनौती
स्वास्थ्य विभाग में अब तक बांदा में करीब 70 लाख और महोबा में करीब 85 लाख रुपये का जीपीएफ फर्जीवाड़ा सामने आ चुका है। दोनों जिलों में कुल करीब 1.55 करोड़ रुपये की धनराशि के गबन का मामला सामने आने के बाद विभाग के सामने रकम की रिकवरी बड़ी चुनौती बनी हुई है। अधिकारियों का कहना है कि पहले सरकारी धन की भरपाई सुनिश्चित कराने पर जोर है। इसके बाद निर्धारित प्रक्रिया के तहत दोषी कर्मचारियों के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी।
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वर्जन
दोषी कर्मचारियों ने जल्द धनराशि जमा करने का आश्वासन दिया है। एक कर्मचारी ने मकान बेचकर धनराशि जमा करने की बात कही है। कुछ दिन इंतजार के बाद धनराशि जमा न करने वाले कर्मचारियों के विरुद्ध ठोस कार्रवाई की जाएगी।
-डॉ. अभय सिंह, अपर निदेशक स्वास्थ्य, चित्रकूटधाम मंडल
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महोबा के स्वास्थ्य विभाग में तैनात लिपिक संतोष कुमार वर्मा पर जीपीएफ खातों से करीब 85 लाख रुपये के गबन का आरोप है। लेखा विभाग प्रयागराज की जांच में फर्जीवाड़ा सामने आया था। जांच में सामने आया कि लिपिक ने चालक अंबिका समेत कई कर्मचारियों के जीपीएफ खातों में हेरफेर कर रकम निकाली थी।
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मामला सामने आने के बाद लिपिक के वेतन पर रोक लगाने के साथ ही संबंधित खातों को सीज किया गया। कार्रवाई का शिकंजा कसता देख संतोष कुमार वर्मा अपर निदेशक स्वास्थ्य के पास पहुंचा। अधिकारियों से बातचीत में उसने कुछ दिन की मोहलत मांगी और कहा कि वह अपना मकान बेच रहा है। मकान बिकते ही रकम जमा करने का आश्वासन दिया।
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पहले वकील लेकर पहुंचे, अब रकम जमा करने का भरोसा
बांदा के तिंदवारी पीएचसी में तैनात ऑप्टोमेट्रिस्ट पर भी जीपीएफ फर्जीवाड़े में लाखों रुपये की हेराफेरी का आरोप है। कार्रवाई की भनक लगने पर वह पहले वकील के साथ अधिकारियों के पास पहुंचा था। हालांकि अब उसने जल्द से जल्द धनराशि जमा करने का आश्वासन दिया है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों पर शासन स्तर से भी लगातार रिकवरी को लेकर दबाव है। अधिकारियों से गबन की रकम और उसकी वसूली के संबंध में अपडेट लिया जा रहा है। ऐसे में मंडल स्तर के अधिकारी भी वित्तीय नुकसान की भरपाई को प्राथमिकता दे रहे हैं।
1.55 करोड़ का फर्जीवाड़ा, रिकवरी बनी चुनौती
स्वास्थ्य विभाग में अब तक बांदा में करीब 70 लाख और महोबा में करीब 85 लाख रुपये का जीपीएफ फर्जीवाड़ा सामने आ चुका है। दोनों जिलों में कुल करीब 1.55 करोड़ रुपये की धनराशि के गबन का मामला सामने आने के बाद विभाग के सामने रकम की रिकवरी बड़ी चुनौती बनी हुई है। अधिकारियों का कहना है कि पहले सरकारी धन की भरपाई सुनिश्चित कराने पर जोर है। इसके बाद निर्धारित प्रक्रिया के तहत दोषी कर्मचारियों के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी।
वर्जन
दोषी कर्मचारियों ने जल्द धनराशि जमा करने का आश्वासन दिया है। एक कर्मचारी ने मकान बेचकर धनराशि जमा करने की बात कही है। कुछ दिन इंतजार के बाद धनराशि जमा न करने वाले कर्मचारियों के विरुद्ध ठोस कार्रवाई की जाएगी।
-डॉ. अभय सिंह, अपर निदेशक स्वास्थ्य, चित्रकूटधाम मंडल