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Banda News: शजर पत्थर को मिला जीआई टैग
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बांदा। एक जिला, एक उत्पाद के तहत बांदा के शजर पत्थर को जीआई टैग का तमगा हासिल हो गया है। चित्रकूटधाम मंडल में सिर्फ शजर पत्थर को ही जीआई टैग में शामिल किया गया है। नाबार्ड जीआई टैग उत्पादों को उचित सुविधाएं मुहैया कराएगा।
जीआई विशेषज्ञ पद्मश्री डाॅ. रजनीकांत ने बताया कि प्रदेश से जीआई टैग के लिए 20 आवेदन मिले थे। इनमें 11 उत्पादों को ही यह उपलब्धि हासिल हुई है। बुंदेलखंड शजर हस्तकला उद्योग और केन हस्तशिल्प उत्थान समिति फिट्रेशन के प्रोपाइटर द्वारिका प्रसाद सोनी ने शजर हस्तशिल्प कला में मशहूर हैं। उन्हें राष्ट्रपति से पुरस्कार भी प्राप्त हो चुका है।
उद्यमी सोनी के मुताबिक विदेशों में भी शजर की काफी मांग है। बताया कि नाबार्ड और राज्य सरकार के सहयोग से शजर पत्थर को जीआई टैग मिला है। नाबार्ड के एजीएम अनुज कुमार सिंह ने कहा कि नाबार्ड इन जीआई उत्पादों को आगे जाने का काम करेगा, जिससे सभी हस्तशिल्पियों को इसका लाभ मिल सके।
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केन नदी में पाया जाता है बेशकीमती पत्थर
केन नदी में पाया जाने वाला शजर पत्थर बेशकीमती उपहारों में शामिल है। सुंदरता और अनोखेपन के लिए यह पत्थर देश-विदेश में मशहूर है। ज्वैलरी और सजावटी सामान में इसका इस्तेमाल ज्यादा होता है। दशकों पूर्व शजर पत्थर बड़े उद्योग के रूप में स्थापित था। इराक, इरान, सऊदी अरब से आने वाले सैलानी यहां से शजर पत्थर खरीद ले जाते थे। बांदा में शजर पत्थर तराशने का काम करने वाले लगभग 60-70 व्यापारी थे, लेकिन मांग घटने के साथ ही धीरे-धीरे कारखाने बंद होते गए। गिने-चुने लोग ही इस कारोबार से जुड़े रहे। एक जिला-एक उत्पाद में शजर पत्थर का चयन होने के बाद फिर इस व्यवसाय ने परवान चढ़ना शुरू कर दिया। मौजूदा में लगभग 20 व्यापारी कर्ज लेकर इसका व्यवसाय कर रहे हैं।
प्राकृतिक चित्रों के लिए मशहूर है शजर पत्थर
केन नदी में मिलने वाला शजर पत्थर प्राकृतिक चित्रकारी के लिए मशहूर है। पेड़-पौधे, सुंदर तस्वीरें समेत अन्य प्राकृतिक आकृतियां पत्थर पर पाई जाती हैं। हालांकि इनमें आकृतियां उभारने का काम हस्तशिल्पियों द्वारा किया जाता है। शजर पत्थर आम पत्थरों की तरह रंगीन पत्थर की तरह दिखता है। इसकी पहचान शजर पत्थर से जुड़े लोग ही कर पाते हैं। सावधानी से तोड़ने के बाद इसे तराशा जाता है। इसमें कड़ी मेहनत होती है।
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जीआई विशेषज्ञ पद्मश्री डाॅ. रजनीकांत ने बताया कि प्रदेश से जीआई टैग के लिए 20 आवेदन मिले थे। इनमें 11 उत्पादों को ही यह उपलब्धि हासिल हुई है। बुंदेलखंड शजर हस्तकला उद्योग और केन हस्तशिल्प उत्थान समिति फिट्रेशन के प्रोपाइटर द्वारिका प्रसाद सोनी ने शजर हस्तशिल्प कला में मशहूर हैं। उन्हें राष्ट्रपति से पुरस्कार भी प्राप्त हो चुका है।
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उद्यमी सोनी के मुताबिक विदेशों में भी शजर की काफी मांग है। बताया कि नाबार्ड और राज्य सरकार के सहयोग से शजर पत्थर को जीआई टैग मिला है। नाबार्ड के एजीएम अनुज कुमार सिंह ने कहा कि नाबार्ड इन जीआई उत्पादों को आगे जाने का काम करेगा, जिससे सभी हस्तशिल्पियों को इसका लाभ मिल सके।
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केन नदी में पाया जाता है बेशकीमती पत्थर
केन नदी में पाया जाने वाला शजर पत्थर बेशकीमती उपहारों में शामिल है। सुंदरता और अनोखेपन के लिए यह पत्थर देश-विदेश में मशहूर है। ज्वैलरी और सजावटी सामान में इसका इस्तेमाल ज्यादा होता है। दशकों पूर्व शजर पत्थर बड़े उद्योग के रूप में स्थापित था। इराक, इरान, सऊदी अरब से आने वाले सैलानी यहां से शजर पत्थर खरीद ले जाते थे। बांदा में शजर पत्थर तराशने का काम करने वाले लगभग 60-70 व्यापारी थे, लेकिन मांग घटने के साथ ही धीरे-धीरे कारखाने बंद होते गए। गिने-चुने लोग ही इस कारोबार से जुड़े रहे। एक जिला-एक उत्पाद में शजर पत्थर का चयन होने के बाद फिर इस व्यवसाय ने परवान चढ़ना शुरू कर दिया। मौजूदा में लगभग 20 व्यापारी कर्ज लेकर इसका व्यवसाय कर रहे हैं।
प्राकृतिक चित्रों के लिए मशहूर है शजर पत्थर
केन नदी में मिलने वाला शजर पत्थर प्राकृतिक चित्रकारी के लिए मशहूर है। पेड़-पौधे, सुंदर तस्वीरें समेत अन्य प्राकृतिक आकृतियां पत्थर पर पाई जाती हैं। हालांकि इनमें आकृतियां उभारने का काम हस्तशिल्पियों द्वारा किया जाता है। शजर पत्थर आम पत्थरों की तरह रंगीन पत्थर की तरह दिखता है। इसकी पहचान शजर पत्थर से जुड़े लोग ही कर पाते हैं। सावधानी से तोड़ने के बाद इसे तराशा जाता है। इसमें कड़ी मेहनत होती है।