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Banda News: मनमाफिक रिपोर्ट न लगाने पर एसडीएम ने लेखपाल को बंधक बनाकर पीटा
Fri, 31 Oct 2025 11:35 PM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
Updated Fri, 31 Oct 2025 11:35 PM IST
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फोटो - 24 पीड़ित लेखपाल विकास सिंह। स्त्रोत : स्वयं
बांदा।
नरैनी तहसील में बीते बुधवार को प्रशासनिक मर्यादाओं को शर्मसार करने वाला मामला सामने आया है। भवन निर्माण में मनमाफिक आख्या न लगाने पर एसडीएम नरैनी अमित शुक्ल ने चकबंदी लेखपाल को बंधक बनाकर पीटा और धमकी दी। यह घटना डेढ़ घंटे तक चली, जबरन आख्या लगवाने पर ही लेखपाल को छोड़ा गया। घटना के बाद पूरे जिले के चकबंदी लेखपालों में भारी आक्रोश है। शुक्रवार को लेखपाल संघ ने आयुक्त और जिलाधिकारी से मुलाकात कर घटना की शिकायत की और चेतावनी दी कि यदि एसडीएम पर कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन किया जाएगा।
पीड़ित लेखपाल विकास सिंह ने बताया कि 29 अक्टूबर को एसडीएम नरैनी अमित शुक्ला ने तहसील दफ्तर बुलाया था। उनके अनुसार ग्राम पंचायत पथरा में एक भवन का निर्माण अवैध रूप से चल रहा था, जिस पर विवाद भी चल रहा था। एसडीएम ने कथित रूप से अवैध निर्माण कराने वाले व्यक्ति राजेंद्र शुक्ल के पक्ष में आख्या लगाने को कहा। निर्माण नियम विरुद्ध होने से लेखपाल ने इन्कार किया। इस पर एसडीएम नाराज हो गए और कथित रूप से विकास सिंह को थप्पड़ मारते हुए बगल के कमरे में बंद कर दिया। कमरे में ताला लगाकर धमकाया कि यदि आख्या नहीं लगाई तो बुरी तरह पीटा जाएगा।
डेढ़ घंटे तक लेखपाल को बंधक बनाए रखने के बाद जबरन हस्ताक्षर कराए गए। विकास सिंह ने घटना की जानकारी सहायक चकबंदी अधिकारी तृतीय अरुण नारायण सिंह व बंदोबस्त अधिकारी अजय वर्मा को दी, लेकिन उन्होंने केवल उच्चाधिकारियों से शिकायत कराने का आश्वासन दिया। कार्रवाई न होने से नाराज लेखपाल संघ ने शुक्रवार को सामूहिक रूप से इस मुद्दे को उठाया और दोषी अधिकारी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग को लेकर डीएम कार्यालय पहुंचे।
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वहीं एसडीएम अमित शुक्ल ने कहा कि लेखपाल काम नहीं कर रहे थे, इसलिए उन्हें डांटा गया। कोई भी कर्मचारी काम नहीं करेगा तो बिल्कुल डांटा जाएगा। न तो कोई अभद्रता हुई और न ही पिटाई। लगाए गए सभी आरोप निराधार हैं।
डीएम जे. रीभा ने कहा कि मामला उनके संज्ञान में आया है, जिसकी जांच कराई जाएगी और यदि एसडीएम दोषी पाए गए तो कार्रवाई निश्चित रूप से की जाएगी।
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नरैनी तहसील में बीते बुधवार को प्रशासनिक मर्यादाओं को शर्मसार करने वाला मामला सामने आया है। भवन निर्माण में मनमाफिक आख्या न लगाने पर एसडीएम नरैनी अमित शुक्ल ने चकबंदी लेखपाल को बंधक बनाकर पीटा और धमकी दी। यह घटना डेढ़ घंटे तक चली, जबरन आख्या लगवाने पर ही लेखपाल को छोड़ा गया। घटना के बाद पूरे जिले के चकबंदी लेखपालों में भारी आक्रोश है। शुक्रवार को लेखपाल संघ ने आयुक्त और जिलाधिकारी से मुलाकात कर घटना की शिकायत की और चेतावनी दी कि यदि एसडीएम पर कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन किया जाएगा।
पीड़ित लेखपाल विकास सिंह ने बताया कि 29 अक्टूबर को एसडीएम नरैनी अमित शुक्ला ने तहसील दफ्तर बुलाया था। उनके अनुसार ग्राम पंचायत पथरा में एक भवन का निर्माण अवैध रूप से चल रहा था, जिस पर विवाद भी चल रहा था। एसडीएम ने कथित रूप से अवैध निर्माण कराने वाले व्यक्ति राजेंद्र शुक्ल के पक्ष में आख्या लगाने को कहा। निर्माण नियम विरुद्ध होने से लेखपाल ने इन्कार किया। इस पर एसडीएम नाराज हो गए और कथित रूप से विकास सिंह को थप्पड़ मारते हुए बगल के कमरे में बंद कर दिया। कमरे में ताला लगाकर धमकाया कि यदि आख्या नहीं लगाई तो बुरी तरह पीटा जाएगा।
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डेढ़ घंटे तक लेखपाल को बंधक बनाए रखने के बाद जबरन हस्ताक्षर कराए गए। विकास सिंह ने घटना की जानकारी सहायक चकबंदी अधिकारी तृतीय अरुण नारायण सिंह व बंदोबस्त अधिकारी अजय वर्मा को दी, लेकिन उन्होंने केवल उच्चाधिकारियों से शिकायत कराने का आश्वासन दिया। कार्रवाई न होने से नाराज लेखपाल संघ ने शुक्रवार को सामूहिक रूप से इस मुद्दे को उठाया और दोषी अधिकारी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग को लेकर डीएम कार्यालय पहुंचे।
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वहीं एसडीएम अमित शुक्ल ने कहा कि लेखपाल काम नहीं कर रहे थे, इसलिए उन्हें डांटा गया। कोई भी कर्मचारी काम नहीं करेगा तो बिल्कुल डांटा जाएगा। न तो कोई अभद्रता हुई और न ही पिटाई। लगाए गए सभी आरोप निराधार हैं।
डीएम जे. रीभा ने कहा कि मामला उनके संज्ञान में आया है, जिसकी जांच कराई जाएगी और यदि एसडीएम दोषी पाए गए तो कार्रवाई निश्चित रूप से की जाएगी।