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कृषि विश्वविद्यालय वैज्ञानिक टीबी मरीजों को लेंगे गोद
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कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय के कृषि वैज्ञानिक कम से कम एक टीबी मरीज को गोद लेंगे। विश्वविद्यालय कुलपति डा.यूएस गौतम ने इसकी शुरुआत कर दी है। कुलपति ने विश्वविद्यालय स्टाफ से कहा है कि टीबी मरीज को गोद लेने के साथ ही जरूरतमंद मरीज की खानपान संबंधी जरूरतों को पूरा करने में मदद करें।
प्रदेश की राज्यपाल और विश्वविद्यालय की कुलाधिपति आनंदी बेन पटेल कुछ माह पूर्व कृषि विश्वविद्यालय के पंचम दीक्षांत समारोह में आईं थीं। तभी उन्होंने अपने संबोधन में विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों और अधिकारियों आदि से आह्वान किया था कि टीबी के मरीजों को गोद लें।
इसी क्रम में शनिवार को विश्वविद्यालय में प्राध्यापकों की बैठक में कुलपति डा. गौतम ने कहा कि सभी प्राध्यापक स्वेच्छा से एक-एक टीबी मरीज गोद लें। उनकी जरूरतें जानें।
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यह भी कहा कि डाक्टरों द्वारा बताए गए खानपान का इंतजाम कर पाने में असमर्थ टीबी मरीजों को आर्थिक मदद भी करें। कुलपति ने इस कार्यक्रम के संचालन की जिम्मेदारी विश्वविद्यालय के सह अधिष्ठाता छात्र कल्याण डा. वीके सिंह और सहायक अध्यापक डा. देव कुमार यादव को सौंपी है। इसके लिए कार्यक्रम की रूपरेखा गतिविधियां, रूटमैप इत्यादि तैयार करेंगे।
कुलपति डा. गौतम ने कहा कि मरीज की सामाजिक एवं व्यवहारिक समस्या को अधिक ध्यान में रखा जाए। उसकी सामाजिक प्रतिष्ठा पर कोई आंच न आए। कुलपति डा. गौतम ने बड़ोखर ब्लाक के एक टीबी मरीज को खुद गोद लिया है।
31 दिसंबर को वह महाविद्यालय के प्राध्यापकों के साथ वहां जाएंगे और मरीज से मिलकर उसकी जानकारी लेंगे। कुलपति ने यह भी निर्देश दिए कि कृषि वैज्ञानिक अपने भ्रमण के दौरान जीओ टैगिंग करके गांवों को चिन्हित करें। ताकि वहां चिकित्सा विभाग की मदद से जागरुकता कार्यक्रम चलाया जा सके।
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प्रदेश की राज्यपाल और विश्वविद्यालय की कुलाधिपति आनंदी बेन पटेल कुछ माह पूर्व कृषि विश्वविद्यालय के पंचम दीक्षांत समारोह में आईं थीं। तभी उन्होंने अपने संबोधन में विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों और अधिकारियों आदि से आह्वान किया था कि टीबी के मरीजों को गोद लें।
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इसी क्रम में शनिवार को विश्वविद्यालय में प्राध्यापकों की बैठक में कुलपति डा. गौतम ने कहा कि सभी प्राध्यापक स्वेच्छा से एक-एक टीबी मरीज गोद लें। उनकी जरूरतें जानें।
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यह भी कहा कि डाक्टरों द्वारा बताए गए खानपान का इंतजाम कर पाने में असमर्थ टीबी मरीजों को आर्थिक मदद भी करें। कुलपति ने इस कार्यक्रम के संचालन की जिम्मेदारी विश्वविद्यालय के सह अधिष्ठाता छात्र कल्याण डा. वीके सिंह और सहायक अध्यापक डा. देव कुमार यादव को सौंपी है। इसके लिए कार्यक्रम की रूपरेखा गतिविधियां, रूटमैप इत्यादि तैयार करेंगे।
कुलपति डा. गौतम ने कहा कि मरीज की सामाजिक एवं व्यवहारिक समस्या को अधिक ध्यान में रखा जाए। उसकी सामाजिक प्रतिष्ठा पर कोई आंच न आए। कुलपति डा. गौतम ने बड़ोखर ब्लाक के एक टीबी मरीज को खुद गोद लिया है।
31 दिसंबर को वह महाविद्यालय के प्राध्यापकों के साथ वहां जाएंगे और मरीज से मिलकर उसकी जानकारी लेंगे। कुलपति ने यह भी निर्देश दिए कि कृषि वैज्ञानिक अपने भ्रमण के दौरान जीओ टैगिंग करके गांवों को चिन्हित करें। ताकि वहां चिकित्सा विभाग की मदद से जागरुकता कार्यक्रम चलाया जा सके।