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वैज्ञानिकों ने की वकालत, किसान बोले- कारपोरेट की हिमायत

Sun, 20 Sep 2020 10:51 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Sun, 20 Sep 2020 10:51 PM IST
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Scientists advocate, farmers say - corporate advocates
प्रेम सिंह। - फोटो : BANDA
बांदा। छोटे और सीमांत किसानों की बेहतरी बताकर केंद्र सरकार द्वारा संसद में पारित कराए गए दो कृषि विधेयकों को लेकर बुंदेलखंड के किसान भी चौकन्ना हुए हैं।
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हालांकि यहां विधेयकों को लेकर एक राय नहीं है। कृषि वैज्ञानिकों ने इसे किसानों के हित में तो यहां के अनुभवी और प्रगतिशील किसान इसे कारपोरेट सेक्टर को लाभ पहुंचाने वाला बता रहे हैं।
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उत्तर प्रदेश किसान समृद्धि आयोग के सदस्य और बुंदेलखंड के प्रगतिशील किसान प्रेम सिंह का कहना है कि आवश्यक वस्तु अधिनियम में जो संशोधन हुआ है इसमें कारपोरेट सेक्टर को ज्यादा अधिकार दिए गए हैं। इससे किसानों का भला होने वाला नहीं है।
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कोरोना काल में देखा गया कि जो वस्तुएं दूध, दाल, सब्जी आदि किसान के पास हैं, उनके दाम नहीं बढ़े। लेकिन जो माल व्यापारियों के पास था उनमें बेतहाशा वृद्धि हुई। किसानों को अपनी उपज बेचने की आजादी के साथ ही यह भी प्राविधान हो कि उपज समर्थन मूल्य से कम में न खरीदी जाए।
कृषि विश्वविद्यालय के कृषि वैज्ञानिक डॉ. नरेंद्र कुमार का कहना है कि यह अध्यादेश किसानों, व्यापारियों व उपभोक्ताओं को कृषि उत्पाद बेचने, खरीदने और भंडारण आदि गतिविधियों में रही अड़चनों को दूर करेगा।
किसानों को उपज बेचने में मोल भाव करने का अवसर मिलेगा। कृषि के प्रति स्पर्धा बढ़ेगी। वैज्ञानिक खेती के नए अवसर खुलेंगे। कृषि उत्पादों की खरीद व बिक्री में पारदर्शिता आएगी।
राष्ट्रीय हिंदुस्तान किसान यूनियन अध्यक्ष सुरेंद्र तिवारी का कहना है कि यह अध्यादेश पूंजीपतियों के लिए है। किसानों की उपज को खुले बाजार के हवाले कर दिया गया है। अध्यादेश में ऐसी कोई व्यवस्था नहीं कि उपज समर्थन मूल्य से अधिक दाम पर ली जाए। किसान को जनपद स्तर पर ही उपज का सही मूल्य मिलना चाहिए।
जिला कृषि अधिकारी डॉ. प्रमोद कुमार का कहना है कि अध्यादेश लागू होने से किसानों को अपनी उपज खुले बाजार में बेचने की आजादी होगी। इलेक्ट्रानिक प्लेटफार्म पर किसी तरह की लेवी व मंडी शुल्क नहीं लगेगा।

सशक्तीकरण एवं संरक्षण अध्यादेश में किसानों के हितों का संरक्षण और जमाखोरी पर नियंत्रण होगा। आवश्यक वस्तु (संशोधन) अध्यादेश में अनाज, दाल, खाद्य तेल व चीनी को आवश्यक वस्तु के दायरे से बाहर रखा गया है। इसका असीमित संग्रहण, भंडारण व परिवहन किया जा सकता है।

सुरेंद्र  तिवारी।

सुरेंद्र तिवारी।- फोटो : BANDA

डा.नरेंद्र सिंह तोमर।

डा.नरेंद्र सिंह तोमर।- फोटो : BANDA

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