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Banda News: 14 साल पुराने जानलेवा हमले में आरोपी बरी
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बांदा। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश प्रथम प्रवीण कुमार सिंह-द्वितीय की अदालत ने वर्ष 2012 के जानलेवा हमले के मामले में अभियुक्त नन्हेराम उर्फ मनोज कुमार को दोषमुक्त कर दिया। अदालत ने 26 सितंबर को फैसला सुनाया। अधिकांश गवाह अपने पूर्व बयानों से मुकर गए और हमलावरों की पहचान से इन्कार कर दिया।
मामला कालिंजर थाना क्षेत्र के सुखारी पुरवा गांव का है। तीन मई 2012 को सरकारी रास्ते पर कुएं के निर्माण को लेकर विवाद हुआ था। वादी भागवत प्रसाद और अन्य लोगों ने निर्माण रोकने का प्रयास किया था। आरोप था कि इसके बाद रामखिलावन, राममिलन, रामकिशोर, नन्हे समेत अन्य लोगों ने लाठी-डंडे और धारदार हथियारों से हमला कर दिया। इसमें भागवत प्रसाद, दयाराम और राजू समेत कई लोग घायल हुए थे। कालिंजर पुलिस ने मामले में प्राथमिकी दर्ज की थी।
विचारण के दौरान अभियोजन ने 10 गवाह पेश किए। वादी भागवत प्रसाद को छोड़कर घायल गवाह दयाराम, राजू और रामजीत ने घटना और हमलावरों की पहचान से इन्कार कर दिया। कुछ गवाहों ने पुलिस को बयान देने से भी इन्कार किया।
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मामले में नन्हेराम के साथ राममिलन पटेल, सुरेंद्र कुमार और अरविंद कुमार उर्फ दादू भी अभियुक्त थे। अदालत ने तीनों को 19 मार्च 2024 को दोषमुक्त कर दिया था। नन्हेराम की लगातार अनुपस्थिति और गिरफ्तारी न होने के कारण उसकी पत्रावली नौ मई 2017 को अलग कर दी गई थी। गिरफ्तारी के बाद उसका अलग से विचारण हुआ। उधर, गवाहों ने आपसी सुलह की बात भी कही। इससे अभियोजन का मामला कमजोर हो गया और अदालत ने नन्हेराम को दोषमुक्त कर दिया।
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मामला कालिंजर थाना क्षेत्र के सुखारी पुरवा गांव का है। तीन मई 2012 को सरकारी रास्ते पर कुएं के निर्माण को लेकर विवाद हुआ था। वादी भागवत प्रसाद और अन्य लोगों ने निर्माण रोकने का प्रयास किया था। आरोप था कि इसके बाद रामखिलावन, राममिलन, रामकिशोर, नन्हे समेत अन्य लोगों ने लाठी-डंडे और धारदार हथियारों से हमला कर दिया। इसमें भागवत प्रसाद, दयाराम और राजू समेत कई लोग घायल हुए थे। कालिंजर पुलिस ने मामले में प्राथमिकी दर्ज की थी।
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विचारण के दौरान अभियोजन ने 10 गवाह पेश किए। वादी भागवत प्रसाद को छोड़कर घायल गवाह दयाराम, राजू और रामजीत ने घटना और हमलावरों की पहचान से इन्कार कर दिया। कुछ गवाहों ने पुलिस को बयान देने से भी इन्कार किया।
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मामले में नन्हेराम के साथ राममिलन पटेल, सुरेंद्र कुमार और अरविंद कुमार उर्फ दादू भी अभियुक्त थे। अदालत ने तीनों को 19 मार्च 2024 को दोषमुक्त कर दिया था। नन्हेराम की लगातार अनुपस्थिति और गिरफ्तारी न होने के कारण उसकी पत्रावली नौ मई 2017 को अलग कर दी गई थी। गिरफ्तारी के बाद उसका अलग से विचारण हुआ। उधर, गवाहों ने आपसी सुलह की बात भी कही। इससे अभियोजन का मामला कमजोर हो गया और अदालत ने नन्हेराम को दोषमुक्त कर दिया।