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सारे जतन पूरे, 20 घंटे बिजली के ख्वाब अधूरे
ब्यूरो/अमर उजाला, बांदा
Updated Thu, 21 Jan 2016 11:51 PM IST
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बांदा। सारे जतन कर लेने के बाद भी पावर कारपोरेशन गांवों को 24 घंटे तो दूर, 20 घंटे भी बिजली मुहैया कराने में नाकाम है।
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डेढ़ दर्जन से ज्यादा नए ट्रांसफार्मर और सब स्टेशन चालू कर कारपोरेशन के अफसरों के बिजली आपूर्ति में किए गए सुधार के दावे बेदम हो गए हैं।
जनपद के सभी क्षेत्रों के ग्राम प्रधानों ने 20 घंटे बिजली की पोल खोल दी है। कई गांवों में तो सिर्फ तीन चार घंटे बिजली मिल रही है। अधिकतम आपूर्ति 15 घंटे हो रही है।
मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने सूखे से जूझ रहे बुंदेलखंड को 24 घंटे बिजली के आदेश नवंबर में दिए थे। कारपोरेशन महाप्रबंधक ने उसी दिन आदेश जारी कर कम से कम 20 घंटे आपूर्ति का आदेश जारी किया था।
ट्रांसमिशन और डिस्ट्रीब्यूशन के निदेशकों को बुंदेलखंड भेजकर आपूर्ति और वोल्टेज सुधारने के निर्देश दिए गए। दोनों ही निदेशकों ने यहां आकर लगभग 10 नए सब स्टेशन या नए ट्रांसफार्मर की जरूरत बताई। आनन-फानन में ट्रांसफार्मर लाकर लगा दिए गए।
मुख्य सचिव भी पिछले हफ्ते यहां आकर गांवाें को कम से कम 20 घंटे बिजली का हुक्म दे गए। 10 नए ट्रांसफार्मराें के बाद तीन दिन पहले पांच और नए ट्रांसफार्मर मंगाए गए, लेकिन सारी कवायदों के बाद भी बुंदेलखंड और खासकर चित्रकूटधाम मंडल के एक भी गांव को भरपूर 20 घंटे बिजली नहीं मिल रही।
बांदा जनपद के ग्राम प्रधानों ने बृहस्पतिवार को बिजली आपूर्ति की हकीकत बयां करते हुए बिजली अफसरों के दावों को झूठा बताया है।
कमासिन क्षेत्र के अमलोखर गांव की ग्राम प्रधान सियारानी ने बताया कि बमुश्किल 4-5 घंटे ही बिजली आ रही है। वोल्टेज बहुत लो है। बताया कि 36 घंटे गुल रहने के बाद बुधवार को सुबह बिजली आई।
कमासिन क्षेत्र के कोर्रा बुजुर्ग गांव की प्रधान माया देवी ने सिर्फ 3-4 घंटे ही बिजली आने की बात कही। बबेरू क्षेत्र के लोहिया गांव शमसुद्दीनपुर मेें प्रधान पति त्रिलोकचंद ने बताया कि कई दिनों से एक फेस आ ही नहीं रहा।
बिजली बमुश्किल 3 या 4 घंटे आती है। वोल्टेज लो होने से ट्यूबवेल की मोटरें फुंकने का खतरा है। तिंदवारी क्षेत्र में लोमर गांव के प्रधान पति इजहार अहमद ने बताया कि तीन दिन बाद रात में दो-तीन घंटे के लिए बिजली आई।
इसके पहले 15 घंटे से ज्यादा बिजली कभी नहीं मिली। वह भी कई टुकड़ों में। तिंदवारी क्षेत्र के ही सिंहपुर गांव की प्रधान विमलेश कुमारी और उनके पति रामसागर पाल ने बताया कि दिन रात मिलाकर 15 या 16 घंटे से ज्यादा बिजली नहीं मिलती।
दो सरकारी ट्यूबवेल में से एक कई साल से बंद पड़ा है। नरैनी क्षेत्र के पड़मई गांव की प्रधान माया वर्मा ने बताया कि एक ट्रांसफार्मर एक हफ्ते से फुंका है।
बिजली 15-16 घंटे से ज्यादा नहीं मिलती। नरैनी क्षेत्र के ही जबरापुर गांव के प्रधान नवल सिंह ने भी 15-16 घंटे ही बिजली की बात स्वीकारी। कहा कि वोल्टेज लो होने से ट्यूबवेल दिन में नहीं चल पाते। कड़ाके की ठंड में जागकर रात को चलाने पड़ते हैं।
पावर कारपोरेशन चित्रकूटधाम मंडल मुख्य अभियंता एके सक्सेना का कहना है कि मंडल में बिजली आपूर्ति में बहुत सुधार हुआ है।
नए सब स्टेशन और ट्रांसफार्मर चालू होने के बाद हर गांव को भरपूर बिजली दी जा रही है। मुख्यमंत्री और शासन के आदेशों पर पावर कारपोरेशन पूरा अमल कर रहा है।
उन्होंने कहा कि हाल में हुई बारिश से कुछ स्थानों पर फाल्ट आ जाने से कहीं-कहीं बिजली आपूर्ति बाधित हुई है। उसे दुरुस्त किया जा रहा है। कुछ दिनों में और सुधार नजर आएगा।