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रोडवेज ने निजी बसों को दी लूट की छूट
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नरैनी से पन्ना सहित मध्य प्रदेश के छतरपुर आदि रूट पर जा रही प्राइवेट बस में चढ़ते यात्री।
- फोटो : BANDA
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नरैनी। हीरा नगरी पन्ना सहित सीमावर्ती मध्य प्रदेश के जिन रूटों पर रोडवेज अपनी बसों को चलाना घाटे का सौदा बता रहा है, उन्हीं रूटों पर प्राइवेट वाहनों के स्वामी जबरदस्त कमाई कर रहे हैं। रोडवेज ने इस रूट पर तीन बसें ये कहकर बंद कर दी हैं कि यहां यात्री नहीं हैं, जबकि इसी रूट पर 25 प्राइवेट बसें यात्रियों से खचाखच भरकर रोजाना दौड़ रही हैं। रोडवेज बसों का संकट देखकर निजी बसें प्रति यात्री 20 रुपये अधिक वसूल रही हैं। यात्रियों का कहना है कि परिवहन निगम ने प्राइवेट बस मालिकों को यात्रियों से मनमानी किराया वसूलकर लूट की छूट दे रखी है।
सरहद से जुड़े मध्य प्रदेश के पन्ना, छतरपुर व सतना जनपदों के लिए बांदा सहित आसपास के यूपी के कई जिलों से रोजाना यात्री जाते हैं। इसी तरह एमपी के इन तीनों शहरों से बड़ी संख्या में प्रतिदिन बांदा, चित्रकूट, फतेहपुर आदि के लिए यात्रा करते हैं। लगभग एक हजार यात्रियों का रोज आवागमन है। यात्रियों की इस बड़ी खेप को देखकर प्राइवेट बस मालिकों ने 25 निजी बसें इस रूट पर चला रखी हैं। हर माह लाखों रुपये कमा रहे हैं। इनमें कई बसें बिना परमिट के भी चलना बताई गई हैं। दूसरी तरफ रोडवेज का बांदा डिपो सिर्फ दो बसें चला रहा है। वह भी खटारा हैं। तीन बसों को बंद कर रखा है। रोडवेज अधिकारियों का कहना है कि यात्री उपलब्ध न होने से ये बसें बंद की गई हैं।
बिना परमिट चल रहीं प्राइवेट बसें
मध्य प्रदेश के शहरों में यहां से चल रही बसें ज्यादातर बगैर परमिट की हैं। इन पर परिवहन विभाग मेहरबान हैं। नरैनी से पन्ना-छतरपुर मार्ग पर 11 निजी बसें और अजयगढ़ तक पांच प्राइवेट बसें चल रही हैं। इस रूट पर रोडवेज की सिर्फ एक बस जीरो रोड डिपो प्रयागराज की चलती है। बांदा डिपो की दूसरी बस पन्ना से कानपुर चलती है। पहले पांच बसें चलती थीं। प्राइवेट बसों के अलावा आधा सैकड़ा टैक्सियां भी इस रूट पर दिन-रात डग्गामारी करके यात्रियों को ले जा रही हैं।
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कुछ यात्रियों ने यह भी बताया कि रोडवेज की जो दो खटारा बसें चलाई जा रही हैं, उनके चालक अक्सर नशे में होते हैं। ऐसे में यात्री इन बसों में यात्रा करना असुरक्षित समझ रहे हैं। उधर, नरैनी से सतना मार्ग पर पांच, नरदहा से पन्ना रूट पर चार और नरदहा से सतना मार्ग में दो व नरैनी से कालिंजर रूट पर आठ प्राइवेट बस चलाई जा रही हैं। सब यात्रियों से खचाखच भरी रहती हैं। रोडवेज अधिकारियों की इस दलील की पोल खोल रही हैं कि इस रूट पर यात्री नहीं हैं।
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सरहद से जुड़े मध्य प्रदेश के पन्ना, छतरपुर व सतना जनपदों के लिए बांदा सहित आसपास के यूपी के कई जिलों से रोजाना यात्री जाते हैं। इसी तरह एमपी के इन तीनों शहरों से बड़ी संख्या में प्रतिदिन बांदा, चित्रकूट, फतेहपुर आदि के लिए यात्रा करते हैं। लगभग एक हजार यात्रियों का रोज आवागमन है। यात्रियों की इस बड़ी खेप को देखकर प्राइवेट बस मालिकों ने 25 निजी बसें इस रूट पर चला रखी हैं। हर माह लाखों रुपये कमा रहे हैं। इनमें कई बसें बिना परमिट के भी चलना बताई गई हैं। दूसरी तरफ रोडवेज का बांदा डिपो सिर्फ दो बसें चला रहा है। वह भी खटारा हैं। तीन बसों को बंद कर रखा है। रोडवेज अधिकारियों का कहना है कि यात्री उपलब्ध न होने से ये बसें बंद की गई हैं।
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बिना परमिट चल रहीं प्राइवेट बसें
मध्य प्रदेश के शहरों में यहां से चल रही बसें ज्यादातर बगैर परमिट की हैं। इन पर परिवहन विभाग मेहरबान हैं। नरैनी से पन्ना-छतरपुर मार्ग पर 11 निजी बसें और अजयगढ़ तक पांच प्राइवेट बसें चल रही हैं। इस रूट पर रोडवेज की सिर्फ एक बस जीरो रोड डिपो प्रयागराज की चलती है। बांदा डिपो की दूसरी बस पन्ना से कानपुर चलती है। पहले पांच बसें चलती थीं। प्राइवेट बसों के अलावा आधा सैकड़ा टैक्सियां भी इस रूट पर दिन-रात डग्गामारी करके यात्रियों को ले जा रही हैं।
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कुछ यात्रियों ने यह भी बताया कि रोडवेज की जो दो खटारा बसें चलाई जा रही हैं, उनके चालक अक्सर नशे में होते हैं। ऐसे में यात्री इन बसों में यात्रा करना असुरक्षित समझ रहे हैं। उधर, नरैनी से सतना मार्ग पर पांच, नरदहा से पन्ना रूट पर चार और नरदहा से सतना मार्ग में दो व नरैनी से कालिंजर रूट पर आठ प्राइवेट बस चलाई जा रही हैं। सब यात्रियों से खचाखच भरी रहती हैं। रोडवेज अधिकारियों की इस दलील की पोल खोल रही हैं कि इस रूट पर यात्री नहीं हैं।