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नवाब बांदा को राखी भेजकर रानी लक्ष्मीबाई ने मांगी थी मदद
ब्यूरो/अमर उजाला,बांदा
Updated Sat, 29 Aug 2015 12:05 AM IST
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बुंदेलखंड में रक्षाबंधन का पर्व सांप्रदायिक सौहार्द का पैगाम देते हुए हिंदू-मुस्लिम के बीच रिश्ते की याद ताजा कराता है। जंग-ए-आजादी में झांसी की रानी लक्ष्मीबाई ने नवाब बांदा को राखी भेजकर मदद मांगी थी। राखी के साथ लक्ष्मीबाई ने नवाब को यह पाती (पत्र) भी भेजा थी कि-हमारी राय है कै विदेसियों का सासन भारत पर न ओ चाहिए। अंगरेजन से लड़वौ बहुत जरूरी है।
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बात 1849 की है। बांदा में नवाब अली बहादुर सानी (द्वितीय) का शासन था। नवाब और अंग्रेजी फौज में जंग छिड़ गई। यह एक हफ्ते चली। नवाब की विजय हुई। यानी स्वतंत्रता संग्राम में भारत में सबसे पहले बांदा को आजादी मिली।
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उधर, रानी लक्ष्मीबाई ने भी अंग्रेजों से मोर्चा खोल दिया। अंग्रेजी फौज ने झांसी के किले को चारों तरफ से घेर लिया। झांसी जाने वाले रास्ते बंद कर दिए। अंग्रेजी फौज मंदिरों की आड़ लेकर किले पर बमबारी कर रही थी। उधर, रानी लक्ष्मीबाई के तोपची गुलाम गौस अपनी तोप ‘कड़क बिजली’ से जवाबी जवाबी हमला करते हुए अंग्रेजों के छक्के छुड़ा रहा था।
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इसी बीच रानी लक्ष्मीबाई ने अपने एक सिपहसालार के हाथ बांदा नवाब अली बहादुर को राखी भेजी। इस राखी के साथ रानी ने एक पत्र भी भेजा। इसमें लिखा कि- 'बहन की लाज खतरे में है। अंग्रेजों ने झांसी को घेर लिया है। मेरी मदद करो।’ इस पत्र में रानी लक्ष्मीबाई ने यह भी कहा कि- हमारी राय है कै विदेसियों का सासन भारत पर न ओ चाहिए। अंगरेजन से लड़वौ बहुत जरूरी है।
नवाब बांदा ने राखी का पूरा सम्मान किया। नवाब अपने 10 हजार जवानों की फौज लेकर जंगलों के रास्ते झांसी की ओर रवाना हो गए। नवाब ने लक्ष्मीबाई को झांसी में अंग्रेजों से घिरा देख अंग्रेजी फौज पर हमला कर दिया। तमाम अंग्रेज फौजी मारे गए।
झांसी की रानी ने बानपुर के राजा अरिमर्दन सिंह को भी मदद के लिए ऐसा ही पत्र भेजा था। अरिमर्दन सिंह ने भी नवाब की फौज में शामिल होकर मुंह बोली बहन लक्ष्मीबाई की मदद की थी। आज भी इसकी मिसाल देखने को मिलती है। रक्षाबंधन पर्व पर हर वर्ष बड़ी तादाद में हिंदू बहनें अपने मुंह बोले मुस्लिम भाइयों को राखी बांधती या भेजती हैं। मुंह बोले यह भाई उनकी रक्षा का संकल्प लेते हैं।