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बारिश होगी मुफीद, रोकेगी फसलों के कीड़े
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Rain will be favorable, will stop insects of crops
- फोटो : BANDA
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बांदा। पश्चिमी विक्षोभ से मौसम में आया बदलाव खेती के लिए मुफीद होगा। बेमौसम की बारिश फसलों के कीड़े रोकेगी और धो देगी। पैदावार के साथ आमदनी बढ़ेगी। बादल और बूंदाबांदी से न्यूनतम तापमान में चार डिग्री की गिरावट दर्ज की गई है। अगले दो दिनों तक ऐसा ही मौसम रहने का अनुमान है। इसके बाद ठंड और जोर पकड़ेगी।
किसान देवीदीन (भुरेड़ी) का कहना है कि पानी की कमी, खाद की किल्लत और डीजल के बढ़े दामों से खेती की लागत बढ़ी है। नलकूप खराब पड़े हैं। नहरें साथ नहीं दे रही। 500 रुपये घंटा पानी खरीद कर पलेवा कर रहे हैं। खाद न मिलने से खेतों की नमी भी उड़ गई है। बारिश हो जाए तो पलेवा का खर्च बच जाएगा। किसान ज्ञान प्रकाश (तिंदवारी) का कहना है बारिश से चना, मसूर, मटर की फसल को नई जान मिल जाएगी।
मिट्टी भी भुरभुरी हो जाती है। जिससे फसलों में फूल भी अच्छा आएगा। चना, मसूर, मटर, सरसों में कीट भी नहीं लगेंगे। जो थोड़े बहुत लग रहे है वह धुल जाएंगे। उधर, उप कृषि निदेशक विजय कुमार का कहना है कि चना, मसूर, मटर, सरसों की फसल के लिए पानी की काफी जरूरत है। बारिश होती है तो बेहतर उत्पादन होगा। किसानों को गेहूं के लिए पलेवा भी नहीं करना पड़ेगा। माहू, सूड़ी, फली छेदक कीट आदि नहीं लगेंगे।
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कृषि विश्वविद्यालय में मौसम वैज्ञानिक दिनेश साहा का कहना है कि अरब सागर में हवा के बढ़ते दबाव व बुंदेलखंड में पश्चिमी विक्षोभ की हवाएं चलने से मौसम में बदलाव आया है। बुंदेलखंड के कुछ हिस्सों में बारिश हो सकती है। शुक्रवार को न्यूनतम तापमान चार डिग्री सेल्सियस की गिरावट के साथ 13 डिग्री सेल्सियस रिकार्ड किया गया। अगले दो दिनों तक मौसम का रुख ऐसा ही रहने का अनुमान है।
बांदा। एडीएम (वित्त) उमाकांत त्रिपाठी ने बताया कि सभी तहसीलदारों सहित नगर निकायों को निर्देश दिए गए हैं कि अलाव सहित रैन बसेरा की व्यवस्था सुनिश्चित करें। प्रत्येक तहसील को व्यवस्थाओं के लिए 50 हजार रुपये दिए गए हैं। कंबल के लिए शासन से 25 लाख का बजट प्राप्त हो गया है। खरीद की प्रक्रिया शुरू की जा रही है।
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किसान देवीदीन (भुरेड़ी) का कहना है कि पानी की कमी, खाद की किल्लत और डीजल के बढ़े दामों से खेती की लागत बढ़ी है। नलकूप खराब पड़े हैं। नहरें साथ नहीं दे रही। 500 रुपये घंटा पानी खरीद कर पलेवा कर रहे हैं। खाद न मिलने से खेतों की नमी भी उड़ गई है। बारिश हो जाए तो पलेवा का खर्च बच जाएगा। किसान ज्ञान प्रकाश (तिंदवारी) का कहना है बारिश से चना, मसूर, मटर की फसल को नई जान मिल जाएगी।
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मिट्टी भी भुरभुरी हो जाती है। जिससे फसलों में फूल भी अच्छा आएगा। चना, मसूर, मटर, सरसों में कीट भी नहीं लगेंगे। जो थोड़े बहुत लग रहे है वह धुल जाएंगे। उधर, उप कृषि निदेशक विजय कुमार का कहना है कि चना, मसूर, मटर, सरसों की फसल के लिए पानी की काफी जरूरत है। बारिश होती है तो बेहतर उत्पादन होगा। किसानों को गेहूं के लिए पलेवा भी नहीं करना पड़ेगा। माहू, सूड़ी, फली छेदक कीट आदि नहीं लगेंगे।
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कृषि विश्वविद्यालय में मौसम वैज्ञानिक दिनेश साहा का कहना है कि अरब सागर में हवा के बढ़ते दबाव व बुंदेलखंड में पश्चिमी विक्षोभ की हवाएं चलने से मौसम में बदलाव आया है। बुंदेलखंड के कुछ हिस्सों में बारिश हो सकती है। शुक्रवार को न्यूनतम तापमान चार डिग्री सेल्सियस की गिरावट के साथ 13 डिग्री सेल्सियस रिकार्ड किया गया। अगले दो दिनों तक मौसम का रुख ऐसा ही रहने का अनुमान है।
बांदा। एडीएम (वित्त) उमाकांत त्रिपाठी ने बताया कि सभी तहसीलदारों सहित नगर निकायों को निर्देश दिए गए हैं कि अलाव सहित रैन बसेरा की व्यवस्था सुनिश्चित करें। प्रत्येक तहसील को व्यवस्थाओं के लिए 50 हजार रुपये दिए गए हैं। कंबल के लिए शासन से 25 लाख का बजट प्राप्त हो गया है। खरीद की प्रक्रिया शुरू की जा रही है।

Rain will be favorable, will stop insects of crops- फोटो : BANDA