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रेलवे, रोडवेज और निबंधन को करोड़ों का घाटा
ब्यूरो, अमर उजाला, बांदा
Updated Thu, 10 Nov 2016 11:17 PM IST
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कैश लेने के लिए भरा जाने वाला फार्म बांटते बैंक के सुरक्षा कर्मी।
- फोटो : अमर उजाला
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बांदा। नोटों के प्रतिबंध से 24 घंटे में जहां अरबों रुपये का कारोबार प्रभावित हुआ, वहीं कई विभागों को दो दिन में ही करोड़ों रुपये की चपत लगी है। बांदा में रेलवे को 35 लाख, रोडवेज को छह लाख, निबंधन विभाग का 30 लाख राजस्व घटा है।
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गुरुवार को दूसरे दिन भी बैंकों और व्यवसायिक स्थलों में अफरा-तफरी रही। पुराने नोट बदल कर नई करेंसी हासिल करने के लिए बैंकों में भीड़ उमड़ पड़ी। कई जगह पुलिस की मदद से कामकाज निपट पाया।
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500 और 1000 के नोटों पर अचानक प्रतिबंध से जनजीवन प्रभावित हो गया। केंद्र सरकार के इस कदम से केंद्र के ही कई विभागों को भारी नुकसान पहुंचा है। रेलवे में दो दिनों में डेढ़ करोड़ रुपये की आमद घट गई है।
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बांदा रेलवे स्टेशन पर आम दिनों में 50 से 60 लाख रुपये साधारण टिकट की बिक्री से आते थे। इसके अलावा 10 से 12 लाख रुपये आरक्षण में मिलते थे। रेलवे के वाणिज्य पर्यवेक्षक एसके पाराशर ने बताया कि बुधवार और गुरुवार को यह आमद घटकर 35 लाख के आसपास रह गई। 500 और 1000 के नोट बंद होने से टिकटों की बिक्री और आरक्षण पूरी तरह प्रभावित हुआ।
उधर, सड़क परिवहन (रोडवेज) को भी यहां दो दिनों में लगभग साढ़े पांच लाख रुपये की चपत लगी है।
मंडल के सभी डिपो में टिकटों से होने वाली आमदनी में भारी गिरावट आई है। बांदा डिपो में तीन लाख, हमीरपुर में एक लाख, राठ में 50 हजार और महोबा डिपो में एक लाख रुपये की आमदनी घटी है। क्षेत्रीय प्रबंधक केके मिश्रा ने बताया कि बसों का संचालन पूर्ववत रहा, लेकिन यात्री कम आए।
उधर, निबंधन विभाग को नोटों की पाबंदी से तगड़ा झटका लगा। यहां रोजाना होने वाली संपत्तियों के बैनामों का ग्राफ औंधे मुंह गिरा है। आम दिनों में 35 से 40 बैनामे होते थे। इसमें निबंधन विभाग को 25 से 30 लाख रुपये राजस्व हासिल होता था। पिछले दो दिनों में सिर्फ 10 बैनामे हुए हैं। गुरुवार को मात्र पौने दो लाख रुपये राजस्व मिला है। सहायक निबंधक आरके मिश्रा ने बताया कि नोटों पर प्रतिबंध से लोगों को कोषागार से स्टांप नहीं मिल रहा।