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तीन अरब की नहर भूमि पर कब्जे, आलीशान घर बने

Tue, 24 Aug 2021 11:12 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Tue, 24 Aug 2021 11:12 PM IST
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Possession of three billion canal land, built luxurious houses
बांदा। बुंदेलखंड में सिंचाई विभाग की नहरों की भूमि भी अवैध कब्जों से अछूती नहीं हैं। यहां लगभग 30 हेक्टेयर से भी अधिक भूमि पर अवैध कब्जे हैं। कब्जाधारकों की संख्या 400 के आसपास हैं। इस भूमि की अनुमानित कीमत तीन अरब रुपये है।
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सिंचाई विभाग की जमीनें पर अवैध आलीशान इमारतें खड़ी हो गई हैं और यहां पर लोग निवास भी कर रहे हैं। सिंचाई विभाग अपनी भूमि मुक्त कराने के लिए विभागीय कार्रवाइयों तक सीमित है। अतिक्रमण की गई भूमि में सरकारी कब्जे और ऊंची-ऊंची इमारतें हैं।
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कई स्थानों पर अतिक्रमण के चलते नहरों का अस्तित्व ही खत्म हो गया है। बांदा जनपद में सिंचाई विभाग की 17 हेक्टेयर से ज्यादा भूमि में अवैध कब्जे कर रखे गए हैं। ज्यादातर भूमि शहरी क्षेत्र में है। अवैध कब्जा करने वालों की संख्या 51 है। सरकारी बाउंड्री भी सिंचाई विभाग की भूमि में बना ली गई है।
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शहर के जवाहर नगर, इंदिरा नगर और आवास विकास (ए ब्लॉक) में नहर किनारे पक्की बिल्डिगें खड़ी कर ली गईं हैं। यहां रसूख वाले और सत्तारूढ़ दल से जुड़े लोग भी काबिज हैं। कब्जा की गई सिंचाई विभाग की जमीन की कीमत का आकलन निबंधन विभाग की सर्किल दरों के आधार पर किया जाए तो एक अरब 40 करोड़ रुपये की भूमि है।
यह अनुमानित कीमत रिहायशी दर पर है। व्यावसायिक दरों पर आकलन किया जाए तो यह कई गुना और बढ़ जाएगी। अतिक्रमित भूमि पर कई स्थानों पर व्यावसायिक उपयोग भी हो रहा है। यह सब विभागीय अधिकारियों की लापरवाही और धींगामुश्ती के चलते हुआ है। जमीनों पर कब्जे होते रहे और विभाग के अधिकारी आंख मूंदे बैठे रहे।
बांदा में अतिक्रमण/अवैध कब्जे वाली भूमि का ब्योरा
आवास विकास (ए ब्लॉक) : यहां 10 लोगों ने 0.12 हेक्टेयर भूमि पर कब्जा कर रखा है। यहां की सर्किल दर 9500 रुपये प्रति वर्ग मीटर है। अगर व्यवसायिक इस्तेमाल है तो 21000 रुपये प्रति वर्ग मीटर है। यह भूमि बांदा माइनर एक के किनारे है।
इंदिरा नगर : सिंचाई विभाग की सूची के मुताबिक यहां 8 लोग अवैध कब्जा किए हैं। इस भूमि का रकबा 0.24 हेक्टेयर है। यहां की सर्किल दर न्यूनतम 10,500 रुपये प्रति वर्ग मीटर है। यह बांदा माइनर एक के किनारे की भूमि है।
जवाहर नगर : यहां एक अवैध कब्जा है। अतिक्रमित भूमि का रकबा 0.01 हेक्टेयर है। यह कनवारा माइनर के किनारे है।
नरैनी रोड (लड़ाका पुरवा) : यहां 16 लोगों ने 16.064 हेक्टेयर भूमि पर कब्जा कर रखा है। न्यूनतम सर्किल दर यहां 9 हजार प्रति वर्ग मीटर है। यह भूमि सिंचाई विभाग के नवाब टैंक स्थित कार्यालय के पास है।
तिंदवारा : मुख्यालय से करीब 8 किलोमीटर दूर बांदा ब्रांच नहर की भूमि पर 15 लोगों ने अवैध कब्जे कर रखे हैं। इस भूमि का रकबा 0.18 हेक्टेयर है। यहां की न्यूनतम सर्किल दर 5200 रुपये प्रति वर्ग मीटर है।
पुलिस लाइन की बाउंड्री भी नहर किनारे
बांदा। सिंचाई विभाग की भूमि पर अवैध कब्जा करने वालों की सूची में पुलिस विभाग भी शामिल है। कनवारा माइनर की 0.12 हेक्टेयर भूमि पर पुलिस लाइन की बाउंड्री बनी हुई है। इसका गाटा संख्या 989/2 बताया गया है।
सर्किल दर पर 8 करोड़ रुपये प्रति हेक्टेयर
बांदा। सिंचाई विभाग की 6 इलाकों में नहरों किनारे कुल 17.4 हेक्टेयर भूमि में अवैध कब्जे हैं। यह 1.70 लाख वर्ग मीटर से भी ज्यादा क्षेत्रफल है। सर्किल दरों के आधार पर आकलन किया जाए तो औसत दर 8120 रुपये प्रति वर्ग मीटर होती है।
यानी प्रति हेक्टेयर 8 करोड़ 10 लाख रुपये। एक हेक्टेयर में 10 हजार वर्ग मीटर होते हैं।
कब्जाधारकों को मजिस्ट्रेट की नोटिस
बांदा। सिंचाई विभाग ने अपनी भूमि पर अवैध कब्जा किए लोगों के विरुद्ध केनाल एक्ट के तहत विभागीय मजिस्ट्रेट के यहां मुकदमे कर रखे हैं। मजिस्ट्रेट के पेशकार दीपक श्रीवास्तव ने बताया कि लगभग 50 मुकदमे हैं। 8-10 लोगों ने कब्जा हटा लिया है।
कई लोगों ने बिल्डिंग बना रखी है। उन्हें नोटिस भेजी गई है। फिलहाल इन मुकदमों में सिर्फ तारीखें दी जा रहीं हैं।
सिर्फ 100 रुपये जुर्माने का अधिकार
बांदा। सिंचाई विभाग ने भले ही अपना मजिस्ट्रेट नियुक्त कर रखा है, लेकिन अधिकार बहुत सीमित हैं। पेशकार के मुताबिक, मात्र 100 रुपये जुर्माना करने का अधिकार है। ऐसे में कब्जाधारक दबाव में नहीं आ रहे। पेशकार ने बताया कि अधिशासी अभियंता ने अनुमति दी तो इन सभी मुकदमों को सिविल कोर्ट में भेजा जाएगा।
जनपद अतिक्रमित भूमि कब्जाधारक
बांदा 17.04 51
चित्रकूट 0.01 20
महोबा 2.845 21
हमीरपुर 8.0 125
जालौन 2.3155 163
योग 30.6605 380
सिंचाई विभाग की जमीन पर आलीशान मकान बने
हमीरपुर। सिंचाई विभाग की उदासीनता से इनकी खुद की जमीनों पर अवैध कब्जेे किए गए हैं। इनमें कब्जाधारकों को आलीशान भवन बना लिए हैं। कई बार नोटिसें जारी कर कब्जा हटाने के निर्देश हुए।
सुमेरपुर कस्बे के चारों तरफ आबादी से दूर कई बंधियां थीं, जिसमें बस स्टैंड से लेकर स्टेशन के आगे तक, पेट्रोल पंप के पीछे से कान्हा पशु आश्रय स्थल तक, बड़े पावर हाउस के पास हाईवे से रेलवे लाइन तक तथा ग्रामीण क्षेत्रों में टेढ़ा में बंधियों का निर्माण कराया गया था, लेकिन ज्यादातर बंधियां ध्वस्त हैं।
किसानों की बड़ी जद्दोजहद के बाद बीते वर्ष इंगोहटा बंधी में कुछ मरम्मत आदि का कार्य हुआ। वहीं कस्बे की बस स्टैंड के आगे वाली बंधी में 7.59 एकड़ जमीन पर लोगों ने कब्जा कर लिया है। सिंचाई विभाग ने करीब 138 लोगों को नोटिसें जारी कर कब्जा हटाने को कहा है।
वहीं शहर में यमुना पुल से बेतवा पुल के बीच कानपुर सागर हाईवे के लिए डाले गए सुरक्षात्मक बंधे पर करीब 125 लोगों ने कब्जे किए थे। वर्षों पूर्व हुए इन कब्जों को सिंचाई विभाग मौन है। विभागीय सूत्रों के अनुसार लोगों से जमीन खाली कराने के लिए मामला अदालत तक पहुंच चुका है।
कब्जा मुक्त हुई 2.845 हेक्टेयर भूमि
महोबा। सिंचाई विभाग की जमीनों में अवैध कब्जा करने वालों पर एंटी भूमाफिया टास्क फोर्स द्वारा कार्रवाई की गई। जिसकी रिपोर्ट जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार को सौंप दी गई है।
सिंचाई प्रखंड अधिशासी अभियंता संजय प्रसाद ने बताया कि जनपद में 2.845 हेक्टेयर भूमि पर 21 लोगों ने कब्जा कर रखा था। जिसको लेकर एंटी भू-माफिया टास्क फोर्स के तहत कार्रवाई की गई, जिससे 2.845 हेक्टेयर भूमि को कब्जा मुक्त कराकर डीएम को रिपोर्ट सौंप दी गई है।
163 अवैध कब्जेदारों के कब्जे में 2.3155 हेक्टेयर जमीन
जालौन। सिंचाई विभाग के अधिकारियों के अनुसार, जिले के सभी नौ ब्लाकों में विभाग की जमीनें अवैध कब्जेदारों के चंगुल में हैं। कहीं नहर तो कहीं बंधों के आसपास की जमीन पर अवैध कब्जे कायम हैं।
जिन्हें खाली कराने के लिए समय-समय पर अभियान बी चलाया जाता है, लेकिन संसाधनों की कमी से अभियान में तेजी नहीं आ पाती है। विभाग ने अभी तक 163 अवैध कब्जेदार चिह्नित किए हैं, जिनके कब्जे में 2.3155 हेक्टेयर जमीन है।
जिस पर किसी ने मकान तो किसी ने जानवरों का बाड़ा या फिर पक्की दुकानें बना रखी है। विभाग अब तक 0.0540 हेक्टेयर जमीन ही अवैध कब्जों से मुक्त करा सका है। अधिकारियों का कहना है कि बारिश का मौसम समाप्त होते ही एक बार फिर से अभियान चलाकर जमीनों को खाली कराया जाएगा।
सरकारी जमीन पर काबिज है 20 लोग
चित्रकूट। जिले में सिंचाई विभाग की भूमि पर अतिक्रमण को लेकर विभागीय अधिकारी लगातार नोटिस भेजकर कानूनी कार्रवाई करा रहे हैं। इसके बावजूद कई स्थानों से अतिक्रमण नहीं हट पाया है।

अफसरों की मानें तो बहुत कम भूमि पर कब्जा है। 0.001 हेक्टेयर भूमि पर 20 लोगों ने कब्जा कर रखा है। अधिशासी अभियंता आशुतोष कुमार ने बताया कि ज्यादातर झोपड़ी वालों ने ही कब्जा कर रखा है।
शहर के कार्यालय के आस पास से लेकर नहरों के किनारे की ऐसी भूमि से कब्जा हटवाने के लिए कई बार नोटिस भेजी गई है। 20 लोगोें के खिलाफ मुकदमा भी चल रहा है।
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