एसपी से बोले बांदा डीएम, शर्मिंदा हूं नाकारा पुलिस से
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बांदा। किसानों का लगभग दो करोड़ रुपये दाबकर भागी फर्म पर तिंदवारी थाना पुलिस के कोई कार्रवाई न करने से जिलाधिकारी योगेश कुमार बेहद क्षुब्ध हैं। उन्होंने पुलिस अधीक्षक को लिखा है- ‘थाने की शिथिलता पर वह शर्मिंदा और चिंता में हैं, अपने स्तर से कड़ी कार्रवाई करते हुए थानाध्यक्ष के खिलाफ एक्शन लें।’ तिंदवारी क्षेत्र के 15 किसानों ने करीब तीन महीने पहले तिंदवारी कस्बे में सिंह ग्रेन एजेंसी नामक आढ़त पर अपनी फसल बेची थी। एजेंसी संचालक फसल की कीमत देने में टालमटोल करते रहे। मई में इस फर्म में ताला पड़ गया। किसानों के मुताबिक इस एजेंसी के मालिक तिंदवारी क्षेत्र के ही जसईपुर गांव के हैं। साझीदार सिंघौली गांव और मुनीम तिंदवारी का रहने वाला है। ये सभी नदारद हैं।
किसानों की शिकायत पर जिलाधिकारी ने मई में तिंदवारी थाना पुलिस को कार्रवाई के आदेश दिए थे। किसानों ने मंडलायुक्त और तहसील दिवस में भी शिकायतें कीं लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। सोमवार को किसानों ने सामूहिक हस्ताक्षरों से डीएम को फिर अर्जी दी। पुलिस के नाकारेपन से क्षुब्ध डीएम ने किसानों की अर्जी पर पुलिस अधीक्षक को लिखा है कि थाना तिंदवारी इस मामले में कार्रवाई नहीं कर रहा है। ग्रामीण उनके समक्ष रो रहे हैं। वह थाने की शिथिलता पर शर्मिंदा हैं और चिंता में हूं। अपने स्तर से कड़ी कार्रवाई करें। एसओ के खिलाफ भी एक्शन लें। पीड़ित किसानों में भूपत सिंह, महेंद्र सिंह, शिवमोहन सिंह, बबलू सिंह, मूलचंद्र सिंह, सुरिजपाल सिंह, शिवचंद्र सिंह, अनिल सिंह, कैलाश सिंह, श्रीधर, राज किशोर आदि हैं।
डीएम ने कोटेदार को दी चेतावनी
बांदा। डीएम योगेश कुमार ने कहा है कि किसी भी गांव में कोटेदारों की गड़बड़ी से कार्डधारक ग्रामीणों को परेशानी हुई तो कोटेदार के खिलाफ कार्रवाई से वह परहेज नहीं करेंगे। डीएम ने कहा कि सोमवार को बबेरू क्षेत्र के कायल गांव में उन्होंने निरीक्षण किया था। ग्रामीणोें ने कोटेदार द्वारा मिट्टी का तेल न दिए जाने की शिकायत की थी। इस पर उन्होंने कोटे की दुकान के अंदर व्याप्त अंधेरे का हवाला देकर कोटेदार से कहा था कि अगर उसे भी ऐसे अंधेरे मेें रहना पड़े तो उस पर क्या गुजरेगी? कोटे की कोठरी में वह खुद और कई अधिकारी भी थे। कोटेदार को कोठरी में बंद करने की बात गलत है।