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Banda News: कोडीनयुक्त सिरप को नशे के धंधे में खपाने वाले सरगना के करीब पहुंची पुलिस
Mon, 07 Sep 2026 12:22 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
Updated Mon, 07 Sep 2026 12:22 AM IST
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बांदा। कोडीनयुक्त सिरप को नशे के धंधे में खपाने वाले सरगना अतर्रा निवासी प्रियांशु गुप्ता की गिरफ्तारी जल्द हो सकती है।
पुलिस को उसकी लोकेशन मिल गई है। उसकी गिरफ्तारी के साथ ही दवाओं को नशे के धंधे में खपाने वाले सिंडिकेट का राजफाश हो जाएगा।
बिसंडा थाना क्षेत्र में तीन सितंबर को एसटीएफ प्रयागराज और स्थानीय पुलिस ने एक मिनी ट्रक से 30 हजार शीशी कोडीनयुक्त सिरप बरामद किया था। इसकी कीमत 60.45 लाख बताई गई थी। दिल्ली की गणेश फार्मा नामक फर्म से यह खरीदी गई थी जबकि खरीद बिल हमीरपुर की ओम मेडिकल एजेंसी के नाम कटा था। जांच में पता चला कि ओम मेडिकल एजेंसी काफी पहले ही बंद हो चुकी है।
पुलिस ने चालक समेत चार लोगों को गिरफ्तार किया था। इसमें बिसंडा के नहर पुरवा निवासी धीरेंद्र, अतर्रा के लखन कॉलोनी निवासी प्रवीण उर्फ लकी, अतर्रा के रामलीला मैदान निवासी रोहित और हापुड़ के बहादुरगढ़ थाना क्षेत्र के भैना गांव निवासी डीसीएम चालक शेखर शामिल हैं। पूछताछ में उन्होंने बताया था कि वह अतर्रा निवासी प्रियांशु गुप्ता के लिए यह सिरप लाए थे। इसके बाद से ही पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर प्रियांशु की तलाश शुरू कर दी थी।
एसपी पलाश बंसल ने उसकी गिरफ्तारी के लिए तीन टीमों का गठन किया था। सर्विलांस और मुखबिर तंत्र के सहारे पुलिस प्रियांशु के बेहद करीब पहुंच चुकी है। सूत्रों के अनुसार आशंका जताई जा रही थी कि प्रियांशु मध्य प्रदेश भाग गया है, लेकिन ऐसा नहीं था। उसने मध्य प्रदेश भागने के बजाय पश्चिमी उत्तर प्रदेश का रुख किया। पुलिस को उसकी लोकेशन मिल गई है, जल्द ही पुलिस उसकी गिरफ्तारी कर सकती है।
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10 से 12 लोगों के जुड़े होने की आशंका
कोडीनयुक्त सिरप को नशे के धंधे में खपाने में पकड़े गए चार आरोपी या फिर प्रियांशु गुप्ता ही शामिल नहीं हैं। सूत्रों के अनुसार 10 से 12 लोग मिलकर पूरी प्लानिंग के साथ इस सिंडिकेट को चला रहे थे। इसमें सिरप दिल्ली से मंगाने से लेकर अतर्रा में लाने, उसके बाद दुकानों तक आपूर्ति करने तक सबका काम बंटा था।
काम के हिसाब से सबको मुनाफा भी बांटा जाता था। वहीं, तीन सितंबर को जब एसटीएफ और पुलिस ने कोडीनयुक्त सिरप की खेप पकड़ी तो इसकी सूचना प्रियांशु गुप्ता तक भी पहुंची। इसके बाद प्रियांशु पूरी जानकारी जुटाने के लिए सक्रिय हो गया था। सूत्रों के अनुसार उसे पूरा भरोसा था कि वह कागजों में नहीं फंसेगा।
इसके चलते वह लगातार थाने के आसपास ही चक्कर काट रहा था लेकिन जब उसे पता चला कि प्राथमिकी में उसका भी नाम है तो वह भाग निकला।
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पकड़े गए आरोपियों के मेडिकल स्टोर के लाइसेंस होंगे निलंबित, भेजी रिपोर्ट
बांदा। कोडीनयुक्त सिरप के अवैध धंधे से जुड़े आरोपियों के खिलाफ औषधि विभाग ने कार्रवाई शुरू कर दी है। आरोपियों के मेडिकल स्टोरों पर जांच के बाद अब उनके लाइसेंस निलंबित करने के लिए औषधि निरीक्षक दिव्यप्रकाश मौर्य ने रिपोर्ट भेजी है। इसी रिपोर्ट पर ड्रग लाइसेंसिंग अथॉरिटी (डीएलए) को कार्रवाई करनी है।
शनिवार को औषधि निरीक्षक ने अतर्रा में संचालित श्याम मेडिकल एजेंसी और श्रीराम मेडिकल एजेंसी पर छापा मारा था। श्याम मेडिकल एजेंसी का लाइसेंस कोडीनयुक्त सिरप के अवैध धंधे के मुख्य आरोपी प्रियांशु गुप्ता के नाम पर है। वहीं दूसरे आरोपी रोहित पांडेय के पिता के नाम श्रीराम मेडिकल एजेंसी का लाइसेंस स्वीकृत है।
नशे के धंधे में दवाओं को खपाने का मामला सामने आने के बाद औषधि निरीक्षक ने एक रिपोर्ट तैयार कर डीएलए बांदा वीरेंद्र कुमार को भेजी है। दरअसल, दवाओं के क्रय विक्रय के लिए औषधि निरीक्षक की रिपोर्ट के आधार पर डीएलए की ओर से ही लाइसेंस जारी किया जाता है। ऐसे में लाइसेंस निलंबन और निरस्त करने का अधिकार भी डीएलए को है। हालांकि इतना बड़ा मामला सामने आने के बाद लाइसेंस निलंबन और फिर निरस्तीकरण की कार्रवाई तय मानी जा रही है।
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जांच का दायरा बढ़ाया
कोडीनयुक्त सिरप की खेप पकड़े जाने के बाद जांच का दायरा भी बढ़ गया है। औषधि निरीक्षक ने बताया कि निरीक्षण के साथ ही अन्य माध्यमों से भी कोडीनयुक्त सिरप के क्रय-विक्रय की जानकारी जुटाई जा रही है। अगर किसी मेडिकल पर विक्रय की सूचना मिलती है तो जांच कर कार्रवाई की जाएगी। आसपास के जिलों के औषधि निरीक्षकों को भी इस संबंध में सूचित किया गया है।
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पुलिस को उसकी लोकेशन मिल गई है। उसकी गिरफ्तारी के साथ ही दवाओं को नशे के धंधे में खपाने वाले सिंडिकेट का राजफाश हो जाएगा।
बिसंडा थाना क्षेत्र में तीन सितंबर को एसटीएफ प्रयागराज और स्थानीय पुलिस ने एक मिनी ट्रक से 30 हजार शीशी कोडीनयुक्त सिरप बरामद किया था। इसकी कीमत 60.45 लाख बताई गई थी। दिल्ली की गणेश फार्मा नामक फर्म से यह खरीदी गई थी जबकि खरीद बिल हमीरपुर की ओम मेडिकल एजेंसी के नाम कटा था। जांच में पता चला कि ओम मेडिकल एजेंसी काफी पहले ही बंद हो चुकी है।
पुलिस ने चालक समेत चार लोगों को गिरफ्तार किया था। इसमें बिसंडा के नहर पुरवा निवासी धीरेंद्र, अतर्रा के लखन कॉलोनी निवासी प्रवीण उर्फ लकी, अतर्रा के रामलीला मैदान निवासी रोहित और हापुड़ के बहादुरगढ़ थाना क्षेत्र के भैना गांव निवासी डीसीएम चालक शेखर शामिल हैं। पूछताछ में उन्होंने बताया था कि वह अतर्रा निवासी प्रियांशु गुप्ता के लिए यह सिरप लाए थे। इसके बाद से ही पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर प्रियांशु की तलाश शुरू कर दी थी।
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एसपी पलाश बंसल ने उसकी गिरफ्तारी के लिए तीन टीमों का गठन किया था। सर्विलांस और मुखबिर तंत्र के सहारे पुलिस प्रियांशु के बेहद करीब पहुंच चुकी है। सूत्रों के अनुसार आशंका जताई जा रही थी कि प्रियांशु मध्य प्रदेश भाग गया है, लेकिन ऐसा नहीं था। उसने मध्य प्रदेश भागने के बजाय पश्चिमी उत्तर प्रदेश का रुख किया। पुलिस को उसकी लोकेशन मिल गई है, जल्द ही पुलिस उसकी गिरफ्तारी कर सकती है।
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10 से 12 लोगों के जुड़े होने की आशंका
कोडीनयुक्त सिरप को नशे के धंधे में खपाने में पकड़े गए चार आरोपी या फिर प्रियांशु गुप्ता ही शामिल नहीं हैं। सूत्रों के अनुसार 10 से 12 लोग मिलकर पूरी प्लानिंग के साथ इस सिंडिकेट को चला रहे थे। इसमें सिरप दिल्ली से मंगाने से लेकर अतर्रा में लाने, उसके बाद दुकानों तक आपूर्ति करने तक सबका काम बंटा था।
काम के हिसाब से सबको मुनाफा भी बांटा जाता था। वहीं, तीन सितंबर को जब एसटीएफ और पुलिस ने कोडीनयुक्त सिरप की खेप पकड़ी तो इसकी सूचना प्रियांशु गुप्ता तक भी पहुंची। इसके बाद प्रियांशु पूरी जानकारी जुटाने के लिए सक्रिय हो गया था। सूत्रों के अनुसार उसे पूरा भरोसा था कि वह कागजों में नहीं फंसेगा।
इसके चलते वह लगातार थाने के आसपास ही चक्कर काट रहा था लेकिन जब उसे पता चला कि प्राथमिकी में उसका भी नाम है तो वह भाग निकला।
पकड़े गए आरोपियों के मेडिकल स्टोर के लाइसेंस होंगे निलंबित, भेजी रिपोर्ट
बांदा। कोडीनयुक्त सिरप के अवैध धंधे से जुड़े आरोपियों के खिलाफ औषधि विभाग ने कार्रवाई शुरू कर दी है। आरोपियों के मेडिकल स्टोरों पर जांच के बाद अब उनके लाइसेंस निलंबित करने के लिए औषधि निरीक्षक दिव्यप्रकाश मौर्य ने रिपोर्ट भेजी है। इसी रिपोर्ट पर ड्रग लाइसेंसिंग अथॉरिटी (डीएलए) को कार्रवाई करनी है।
शनिवार को औषधि निरीक्षक ने अतर्रा में संचालित श्याम मेडिकल एजेंसी और श्रीराम मेडिकल एजेंसी पर छापा मारा था। श्याम मेडिकल एजेंसी का लाइसेंस कोडीनयुक्त सिरप के अवैध धंधे के मुख्य आरोपी प्रियांशु गुप्ता के नाम पर है। वहीं दूसरे आरोपी रोहित पांडेय के पिता के नाम श्रीराम मेडिकल एजेंसी का लाइसेंस स्वीकृत है।
नशे के धंधे में दवाओं को खपाने का मामला सामने आने के बाद औषधि निरीक्षक ने एक रिपोर्ट तैयार कर डीएलए बांदा वीरेंद्र कुमार को भेजी है। दरअसल, दवाओं के क्रय विक्रय के लिए औषधि निरीक्षक की रिपोर्ट के आधार पर डीएलए की ओर से ही लाइसेंस जारी किया जाता है। ऐसे में लाइसेंस निलंबन और निरस्त करने का अधिकार भी डीएलए को है। हालांकि इतना बड़ा मामला सामने आने के बाद लाइसेंस निलंबन और फिर निरस्तीकरण की कार्रवाई तय मानी जा रही है।
जांच का दायरा बढ़ाया
कोडीनयुक्त सिरप की खेप पकड़े जाने के बाद जांच का दायरा भी बढ़ गया है। औषधि निरीक्षक ने बताया कि निरीक्षण के साथ ही अन्य माध्यमों से भी कोडीनयुक्त सिरप के क्रय-विक्रय की जानकारी जुटाई जा रही है। अगर किसी मेडिकल पर विक्रय की सूचना मिलती है तो जांच कर कार्रवाई की जाएगी। आसपास के जिलों के औषधि निरीक्षकों को भी इस संबंध में सूचित किया गया है।