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सांसदों के पैसे से पीएम-सीएम का प्रचार नागवार
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vishambher nishad
- फोटो : BANDA
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बांदा। सांसद निधि और उनके वेतन से 30 फीसदी कटौती करके गरीबों को दिए जा रहे राशन के थैलों में पीएम और सीएम की तस्वीरों पर सांसद खफा हैं। उनका कहना है कि सांसदों का नाम होना चाहिए। केंद्रीय मंत्री ने लिखित जवाब में कहा है कि दो वर्ष की निधि और सांसदों का 30 फीसदी वेतन कम करके प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना में निशुल्क राशन और टीकाकरण किया जा रहा है।
सांसद (राज्य सभा) विशंभर प्रसाद निषाद ने बताया कि राज्यसभा में पूछे प्रश्न के जवाब में केंद्रीय सांख्यिकी और कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) राव इंद्रजीत सिंह ने बताया है कि मंत्रिमंडल के निर्णय के अनुसार वर्ष 2020-21 और वर्ष 2021-22 में सांसद निधि योजना लागू न करने का निर्णय लिया गया है।
यह भी बताया कि विधेयक पारित करके कोरोना की जरूरतों को पूरा करने के लिए वर्ष 2020 से दो वर्ष तक सांसदों के वेतन में 30 फीसदी कमी कर दी गई है। इस पैसे को प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना के तहत निशुल्क राशन और टीकाकरण कराने में खर्च किया जा रहा है।
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ह्य
सांसद विशंभर प्रसाद निषाद ने सरकार के इस फैसले पर कड़ी आपत्ति की है। कहा है कि हरेक सांसद की दो वर्ष की निधि 10 करोड़ और 30 फीसदी वेतन काटकर प्रधानमंत्री मोदी जी और मुख्यमंत्री योगी जी अपना प्रचार कर रहे हैं। राशन के थैलों में उन्हीं की फोटो छपी है। सांसदों का कहीं नाम नहीं है। यह सांसदों की उपेक्षा है।
फिलहाल निधि चालू करने से साफ इंकार
बांदा। दिसंबर 1993 से शुरू हुई सांसद निधि पर कोरोना महामारी की सीधी मार पड़ी। केंद्र सरकार ने पिछले वर्ष से इस पर रोक लगा रखी है। फिलहाल इसके शुरू होने की भी उम्मीद नजर नहीं आ रही। राज्यसभा में पूछे गए प्रश्न के जवाब में सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन राज्य मंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि वर्तमान में सांसद निधि (एमपी लैड्स) के पुन: प्रचलन संबंधी कोई प्रस्ताव नहीं है।
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सांसद (राज्य सभा) विशंभर प्रसाद निषाद ने बताया कि राज्यसभा में पूछे प्रश्न के जवाब में केंद्रीय सांख्यिकी और कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) राव इंद्रजीत सिंह ने बताया है कि मंत्रिमंडल के निर्णय के अनुसार वर्ष 2020-21 और वर्ष 2021-22 में सांसद निधि योजना लागू न करने का निर्णय लिया गया है।
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यह भी बताया कि विधेयक पारित करके कोरोना की जरूरतों को पूरा करने के लिए वर्ष 2020 से दो वर्ष तक सांसदों के वेतन में 30 फीसदी कमी कर दी गई है। इस पैसे को प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना के तहत निशुल्क राशन और टीकाकरण कराने में खर्च किया जा रहा है।
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सांसद विशंभर प्रसाद निषाद ने सरकार के इस फैसले पर कड़ी आपत्ति की है। कहा है कि हरेक सांसद की दो वर्ष की निधि 10 करोड़ और 30 फीसदी वेतन काटकर प्रधानमंत्री मोदी जी और मुख्यमंत्री योगी जी अपना प्रचार कर रहे हैं। राशन के थैलों में उन्हीं की फोटो छपी है। सांसदों का कहीं नाम नहीं है। यह सांसदों की उपेक्षा है।
फिलहाल निधि चालू करने से साफ इंकार
बांदा। दिसंबर 1993 से शुरू हुई सांसद निधि पर कोरोना महामारी की सीधी मार पड़ी। केंद्र सरकार ने पिछले वर्ष से इस पर रोक लगा रखी है। फिलहाल इसके शुरू होने की भी उम्मीद नजर नहीं आ रही। राज्यसभा में पूछे गए प्रश्न के जवाब में सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन राज्य मंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि वर्तमान में सांसद निधि (एमपी लैड्स) के पुन: प्रचलन संबंधी कोई प्रस्ताव नहीं है।