{"_id":"694d79b14f7c3862e401ba49","slug":"plastic-surgery-in-banda-started-with-a-labourer-banda-news-c-212-1-bnd1017-138036-2025-12-25","type":"story","status":"publish","title_hn":"Banda News: बांदा में प्लास्टिक सर्जरी की मजदूर से हुई शुरुआत","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Banda News: बांदा में प्लास्टिक सर्जरी की मजदूर से हुई शुरुआत
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
-जिले की चिकित्सा सुविधाओं में नई उपलब्धि
-लखनऊ के डॉक्टर का बांदा में कमाल
संवाद न्यूज एजेंसी
बांदा। चिकित्सा क्षेत्र में बांदा जनपद लगातार नए आयाम कायम कर रहा है। महानगरों के बड़े और महंगे अस्पतालों में होने वाले इलाज अब मामूली खर्च पर यहीं हो रहे हैं। चिकित्सा में महारत का यह प्रदर्शन सरकारी और निजी दोनों डॉक्टर कर रहे हैं। गरीब और मध्यम वर्ग को काफी राहत मिल रही है।
ताजे उदाहरण में एक गरीब सब्जी विक्रेता की सड़क दुर्घटना में बुरी तरह क्षतिग्रस्त पैर की हड्डी को दुरुस्त करके घाव की सफल प्लास्टिक सर्जरी ( स्किन ग्राफ्टिंग) कर दी गई। महानगरों के अस्पतालों में इसके लिए लगभग डेढ़ लाख रुपये खर्च बताया जा रहा था। यहां मामूली खर्च पर यह संभव हो गया।
जिले के रामपुर गांव के युवा सब्जी विक्रेता सुरेश की कुछ दिनों पूर्व सड़क हादसे में एक पैर की हड्डी टूटकर बाहर आ गई थी। उसने दो बार आपरेशन कराकर ट्रांसप्लांट और फिक्सेशन कराया पर हड्डी नहीं जुड़ी। लगभग दो माह से परेशान और घाव का दर्द झेल रहे सुरेश ने बीते शुक्रवार को यहां प्लास्टिक सर्जन डा. सुहेब रफीक (पुत्र डा. मो. रफीक व डा. शबाना रफीक ) को दिखाया। डॉ. सुहेब ने उसे भर्ती करके सर्जरी से हड्डी को दुरुस्त किया फिर घाव के बगल की खाल (चर्म) को मोड़कर घाव के ऊपर लगा कर स्किन ग्राफ्टिंग कर दी। पलटाई गई खाल के रिक्त स्थान पर दूसरी जगह से खाल निकाल कर सफलतापूर्वक लगा दी। डा. सुहेब ने बताया कि बांदा में ऐसी सर्जरी सुविधा अभी तक नहीं मिल पाती थी थी। गरीब मरीज बाहरी बड़े अस्पतालों का महंगा इलाज नहीं करा पाते थे। डा. सुहेब लखनऊ से हर माह पहले और तीसरे शुक्रवार को बांदा आकर अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
-लखनऊ के डॉक्टर का बांदा में कमाल
संवाद न्यूज एजेंसी
बांदा। चिकित्सा क्षेत्र में बांदा जनपद लगातार नए आयाम कायम कर रहा है। महानगरों के बड़े और महंगे अस्पतालों में होने वाले इलाज अब मामूली खर्च पर यहीं हो रहे हैं। चिकित्सा में महारत का यह प्रदर्शन सरकारी और निजी दोनों डॉक्टर कर रहे हैं। गरीब और मध्यम वर्ग को काफी राहत मिल रही है।
ताजे उदाहरण में एक गरीब सब्जी विक्रेता की सड़क दुर्घटना में बुरी तरह क्षतिग्रस्त पैर की हड्डी को दुरुस्त करके घाव की सफल प्लास्टिक सर्जरी ( स्किन ग्राफ्टिंग) कर दी गई। महानगरों के अस्पतालों में इसके लिए लगभग डेढ़ लाख रुपये खर्च बताया जा रहा था। यहां मामूली खर्च पर यह संभव हो गया।
विज्ञापन
जिले के रामपुर गांव के युवा सब्जी विक्रेता सुरेश की कुछ दिनों पूर्व सड़क हादसे में एक पैर की हड्डी टूटकर बाहर आ गई थी। उसने दो बार आपरेशन कराकर ट्रांसप्लांट और फिक्सेशन कराया पर हड्डी नहीं जुड़ी। लगभग दो माह से परेशान और घाव का दर्द झेल रहे सुरेश ने बीते शुक्रवार को यहां प्लास्टिक सर्जन डा. सुहेब रफीक (पुत्र डा. मो. रफीक व डा. शबाना रफीक ) को दिखाया। डॉ. सुहेब ने उसे भर्ती करके सर्जरी से हड्डी को दुरुस्त किया फिर घाव के बगल की खाल (चर्म) को मोड़कर घाव के ऊपर लगा कर स्किन ग्राफ्टिंग कर दी। पलटाई गई खाल के रिक्त स्थान पर दूसरी जगह से खाल निकाल कर सफलतापूर्वक लगा दी। डा. सुहेब ने बताया कि बांदा में ऐसी सर्जरी सुविधा अभी तक नहीं मिल पाती थी थी। गरीब मरीज बाहरी बड़े अस्पतालों का महंगा इलाज नहीं करा पाते थे। डा. सुहेब लखनऊ से हर माह पहले और तीसरे शुक्रवार को बांदा आकर अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
विज्ञापन