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प्लांट की टेस्टिंग, 200 बेड तक पहुंचाई ऑक्सीजन
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बांदा। राजकीय मेडिकल कॉलेज में स्थापित ऑक्सीजन जनरेशन प्लांट की रविवार को टेस्टिंग हुई। पहले दिन टेस्टिंग में 59.53 प्रतिशत शुद्धता (ऑक्सीजन) प्राप्त हुई, जबकि मानक 90 फीसदी शुद्धता का है। इंजीनियरों के कहना है कि 48 से 72 घंटे की टेस्टिंग के बाद ऑक्सीजन (शुद्धता) प्रतिशत का निर्धारित मानक हासिल हो जाएगा।
मेडिकल कॉलेज में ऑक्सीजन जनरेशन प्लांट स्थापित करने के लिए शासन ने पिछले वर्ष सितंबर माह में मंजूरी दी थी। टेंडर और उपकरण आदि प्रक्रियाओं के चलते इसके निर्माण में लगभग 10 माह लग गए। पौने दो करोड़ रुपये की लागत से तैयार ऑक्सीजन प्लांट के उपकरण रविवार को शुरू हो गए। जिलाधिकारी आनंद कुमार सिंह की मौजूदगी में ऑक्सीजन प्लांट की टेस्टिंग हुई। टेस्टिंग के दौरान 59.53 प्रतिशत शुद्ध ऑक्सीजन प्राप्त हुई। हालांकि, यह मानक से लगभग 30 फीसदी कम है। ऑक्सीजन शुद्धता 90 फीसदी होने के बाद ही मरीजों को सप्लाई दी जा सकेगी। उन्होंने जनपद के पहले ऑक्सीजन प्लांट के शुरू होने पर मेडिकल कालेज प्रशासन की सराहना की।
मेडिकल कॉलेज प्रधानाचार्य डा. मुकेश कुमार यादव ने बताया कि प्लांट की क्षमता 960 एलपीएम (लीटर पर मिनट) है। गाजियाबाद के अभियंताओं की टीम ने उपकरण इंस्टाल कर दिए हैं। 48 से 72 घंटे टेस्टिंग होनी है। टेस्टिंग के दौरान 200 बेडों तक ऑक्सीजन पहुंचाई गई। निर्धारित मानक 90 फीसदी हासिल होते ही आक्सीजन प्लांट इस्तेमाल में आ जाएगा। टेस्टिंग के दौरान डिप्टी कलेक्टर अवधेश निगम, यूपीपीसीएल प्रोजेक्ट मैनेजर मनोज कुमार, इंजीनियर कार्तिकेय, विधान सिंह आदि उपस्थित रहे।
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मेडिकल कॉलेज में ऑक्सीजन जनरेशन प्लांट स्थापित करने के लिए शासन ने पिछले वर्ष सितंबर माह में मंजूरी दी थी। टेंडर और उपकरण आदि प्रक्रियाओं के चलते इसके निर्माण में लगभग 10 माह लग गए। पौने दो करोड़ रुपये की लागत से तैयार ऑक्सीजन प्लांट के उपकरण रविवार को शुरू हो गए। जिलाधिकारी आनंद कुमार सिंह की मौजूदगी में ऑक्सीजन प्लांट की टेस्टिंग हुई। टेस्टिंग के दौरान 59.53 प्रतिशत शुद्ध ऑक्सीजन प्राप्त हुई। हालांकि, यह मानक से लगभग 30 फीसदी कम है। ऑक्सीजन शुद्धता 90 फीसदी होने के बाद ही मरीजों को सप्लाई दी जा सकेगी। उन्होंने जनपद के पहले ऑक्सीजन प्लांट के शुरू होने पर मेडिकल कालेज प्रशासन की सराहना की।
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मेडिकल कॉलेज प्रधानाचार्य डा. मुकेश कुमार यादव ने बताया कि प्लांट की क्षमता 960 एलपीएम (लीटर पर मिनट) है। गाजियाबाद के अभियंताओं की टीम ने उपकरण इंस्टाल कर दिए हैं। 48 से 72 घंटे टेस्टिंग होनी है। टेस्टिंग के दौरान 200 बेडों तक ऑक्सीजन पहुंचाई गई। निर्धारित मानक 90 फीसदी हासिल होते ही आक्सीजन प्लांट इस्तेमाल में आ जाएगा। टेस्टिंग के दौरान डिप्टी कलेक्टर अवधेश निगम, यूपीपीसीएल प्रोजेक्ट मैनेजर मनोज कुमार, इंजीनियर कार्तिकेय, विधान सिंह आदि उपस्थित रहे।
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