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समय के साथ संवाद करती हैं कहानियां
अमर उजाला ब्यूरो, बांदा।
Updated Tue, 24 Nov 2015 11:14 PM IST
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बांदा। जनवादी लेखक संघ के बैनर तले मंगलवार को यहां शुरू हुई दो दिवसीय गोष्ठी में उपन्यासकारों ने कहा कि कहानियां समय के साथ संवाद करती हैं। इस दौरान कवियों ने अपनी रचनाएं भी सुनाईं।
सिविल लाइन स्थित डीसीडीएफ परिसर में दोपहर बाद गोष्ठी शुरू हुई। युवा कथाकार संदीप मील (राजस्थान) ने अपनी कहानी अलगू चौधरी का पाठ किया। उनका कहानी संग्रह प्रकाशित हो चुका है। एक अन्य कथाकार और वरिष्ठ उपन्यासकार राज कुमार राकेश (हिमाचल) ने भी अपनी कहानी धरावी का पाठ किया। श्री राकेश के अब तक आठ उपन्यास और पांच कहानी संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं। युवा आलोचक अजीत प्रियदर्शी (लखनऊ) ने कहा कि कहानियां समय के साथ संवाद करती हैं। उपन्यासकार संदीप मील की कहानी आज के गांव का यथार्थ बयां कर रही हैं।
जनवादी लेखक संघ बांदा के सचिव उमाशंकर सिंह परमार ने कथाकारों का आभार जताते हुए कहा कि दोनों ही उपन्यासकारों की कहानियां आज के समाज का कटु सत्य है। बिहान संपादक बृजेश नीरज (लखनऊ) ने कहा कि आज के युग में कहानी परिवर्तन की भूमिका तय करती है। गोष्ठी की अध्यक्षता कर रहे कवि नरेंद्र पुंडरीक ने कहा कि कथाकारों और उपन्यासकारों द्वारा पढ़ी गईं कहानियां जीवन से जुड़ी हुई हैं।
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उन्होंने गोष्ठी में आए लोगों का आभार जताया। इस मौके पर शिक्षक नेता राम प्रताप परिहार सहित कवि चंद्रिका प्रसाद दीक्षित ललित, चंद्रपाल कश्यप, डीडी सोनी अनिल, प्रो.बाबूलाल शर्मा धीरज, करन सिंह, सुधीर खरे कमल, नारायणदास गुप्त आदि उपस्थित थे। गोष्ठी का समापन बुधवार को होगा।
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सिविल लाइन स्थित डीसीडीएफ परिसर में दोपहर बाद गोष्ठी शुरू हुई। युवा कथाकार संदीप मील (राजस्थान) ने अपनी कहानी अलगू चौधरी का पाठ किया। उनका कहानी संग्रह प्रकाशित हो चुका है। एक अन्य कथाकार और वरिष्ठ उपन्यासकार राज कुमार राकेश (हिमाचल) ने भी अपनी कहानी धरावी का पाठ किया। श्री राकेश के अब तक आठ उपन्यास और पांच कहानी संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं। युवा आलोचक अजीत प्रियदर्शी (लखनऊ) ने कहा कि कहानियां समय के साथ संवाद करती हैं। उपन्यासकार संदीप मील की कहानी आज के गांव का यथार्थ बयां कर रही हैं।
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जनवादी लेखक संघ बांदा के सचिव उमाशंकर सिंह परमार ने कथाकारों का आभार जताते हुए कहा कि दोनों ही उपन्यासकारों की कहानियां आज के समाज का कटु सत्य है। बिहान संपादक बृजेश नीरज (लखनऊ) ने कहा कि आज के युग में कहानी परिवर्तन की भूमिका तय करती है। गोष्ठी की अध्यक्षता कर रहे कवि नरेंद्र पुंडरीक ने कहा कि कथाकारों और उपन्यासकारों द्वारा पढ़ी गईं कहानियां जीवन से जुड़ी हुई हैं।
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उन्होंने गोष्ठी में आए लोगों का आभार जताया। इस मौके पर शिक्षक नेता राम प्रताप परिहार सहित कवि चंद्रिका प्रसाद दीक्षित ललित, चंद्रपाल कश्यप, डीडी सोनी अनिल, प्रो.बाबूलाल शर्मा धीरज, करन सिंह, सुधीर खरे कमल, नारायणदास गुप्त आदि उपस्थित थे। गोष्ठी का समापन बुधवार को होगा।