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Banda News: तीन आरोपियों की कस्टडी रिमांड पर फैसला सुरक्षित
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== कोडीन सिरप प्रकरण ==
-करीब 45 मिनट तक न्यायालय में दोनों पक्षों में हुई जिरह
अमर उजाला ब्यूरो
बांदा। कोडीन युक्त कफ सिरप की बरामदगी के मामले में तीन आरोपियों की पुलिस कस्टडी रिमांड पर बृहस्पतिवार को न्यायालय में करीब 45 मिनट तक बहस हुई। लोक अभियोजक ने साक्ष्य संकलन और पूरे सिंडिकेट की कड़ियां तलाशने के लिए पुलिस कस्टडी रिमांड को जरूरी बताया। वहीं, बचाव पक्ष के अधिवक्ताओं ने रिमांड का विरोध करते हुए इसे गैरजरूरी बताया। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद विशेष न्यायाधीश संजय कुमार सिंह प्रथम ने फैसला सुरक्षित रख लिया।
पुलिस ने आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत गठित न्यायालय में अतर्रा निवासी मुख्य आरोपी प्रियांशु गुप्ता उर्फ किशन, रोहित पांडेय और प्रवीण उर्फ लकी की पुलिस कस्टडी रिमांड के लिए आवेदन किया था। इससे पहले 28 सितंबर को हुई सुनवाई के बाद न्यायालय ने एक अक्तूबर की तारीख तय की थी। बृहस्पतिवार को को नियत तारीख पर सुनवाई हुई। लोक अभियोजक ने कहा कि मामले में आगे साक्ष्य जुटाने और सिंडिकेट से जुड़े लोगों व कड़ियों की जानकारी के लिए आरोपियों की पुलिस कस्टडी जरूरी है। बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि ऐसा कोई कार्य नहीं है, जिसे आरोपियों की रिमांड के बिना न किया जा सके। करीब 45 मिनट तक चली सुनवाई के बाद न्यायालय ने फैसला सुरक्षित रख लिया। अब दोनों पक्षों को न्यायालय के आदेश का इंतजार है।
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रिमांड खारिज हुई तो सिंडिकेट की कड़ियां जोड़ना चुनौती
कोडीन सिरप की खेप पकड़े जाने को करीब एक माह हो चुका है। मामले में अब तक छह आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है। पुलिस के मुताबिक, जांच के दौरान धंधे से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका भी सामने आई है। गिरफ्तारी के बाद ऐसे कई लोगों के भूमिगत होने की बात सामने आ रही है। ऐसे में पुलिस के लिए सिंडिकेट की बाकी कड़ियों तक पहुंचना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। पुलिस का तर्क है कि गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के जरिए ही नेटवर्क से जुड़े लोगों, ठिकानों और लेनदेन समेत अन्य महत्वपूर्ण कड़ियों की जानकारी मिल सकती है। यदि पुलिस कस्टडी रिमांड नहीं मिलती है तो इन बिंदुओं पर आगे की जांच प्रभावित होने की आशंका है।
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-करीब 45 मिनट तक न्यायालय में दोनों पक्षों में हुई जिरह
अमर उजाला ब्यूरो
बांदा। कोडीन युक्त कफ सिरप की बरामदगी के मामले में तीन आरोपियों की पुलिस कस्टडी रिमांड पर बृहस्पतिवार को न्यायालय में करीब 45 मिनट तक बहस हुई। लोक अभियोजक ने साक्ष्य संकलन और पूरे सिंडिकेट की कड़ियां तलाशने के लिए पुलिस कस्टडी रिमांड को जरूरी बताया। वहीं, बचाव पक्ष के अधिवक्ताओं ने रिमांड का विरोध करते हुए इसे गैरजरूरी बताया। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद विशेष न्यायाधीश संजय कुमार सिंह प्रथम ने फैसला सुरक्षित रख लिया।
पुलिस ने आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत गठित न्यायालय में अतर्रा निवासी मुख्य आरोपी प्रियांशु गुप्ता उर्फ किशन, रोहित पांडेय और प्रवीण उर्फ लकी की पुलिस कस्टडी रिमांड के लिए आवेदन किया था। इससे पहले 28 सितंबर को हुई सुनवाई के बाद न्यायालय ने एक अक्तूबर की तारीख तय की थी। बृहस्पतिवार को को नियत तारीख पर सुनवाई हुई। लोक अभियोजक ने कहा कि मामले में आगे साक्ष्य जुटाने और सिंडिकेट से जुड़े लोगों व कड़ियों की जानकारी के लिए आरोपियों की पुलिस कस्टडी जरूरी है। बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि ऐसा कोई कार्य नहीं है, जिसे आरोपियों की रिमांड के बिना न किया जा सके। करीब 45 मिनट तक चली सुनवाई के बाद न्यायालय ने फैसला सुरक्षित रख लिया। अब दोनों पक्षों को न्यायालय के आदेश का इंतजार है।
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रिमांड खारिज हुई तो सिंडिकेट की कड़ियां जोड़ना चुनौती
कोडीन सिरप की खेप पकड़े जाने को करीब एक माह हो चुका है। मामले में अब तक छह आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है। पुलिस के मुताबिक, जांच के दौरान धंधे से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका भी सामने आई है। गिरफ्तारी के बाद ऐसे कई लोगों के भूमिगत होने की बात सामने आ रही है। ऐसे में पुलिस के लिए सिंडिकेट की बाकी कड़ियों तक पहुंचना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। पुलिस का तर्क है कि गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के जरिए ही नेटवर्क से जुड़े लोगों, ठिकानों और लेनदेन समेत अन्य महत्वपूर्ण कड़ियों की जानकारी मिल सकती है। यदि पुलिस कस्टडी रिमांड नहीं मिलती है तो इन बिंदुओं पर आगे की जांच प्रभावित होने की आशंका है।
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