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Banda News: फायरिंग-आगजनी के पुराने मामले में पांच बरी

Thu, 01 Oct 2026 11:28 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Thu, 01 Oct 2026 11:28 PM IST
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Five acquitted in old firing-arson case
= अदालत ने साक्ष्य के अभाव में दिया फैसला, विवेचक को मौके पर आगजनी के साक्ष्य नहीं मिले
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अमर उजाला ब्यूरो
बांदा। गिरवां थाना क्षेत्र के रहुसत गांव में वर्ष 2014 में हुए फायरिंग, तोड़फोड़ और आगजनी के मामले में अपर सत्र न्यायाधीश प्रथम प्रवीण कुमार सिंह द्वितीय की अदालत ने पांच आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया। अदालत ने माना कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे साबित नहीं कर सका। साक्ष्यों में विरोधाभास और घटनास्थल पर आगजनी व फायरिंग के ठोस प्रमाण न मिलने को भी महत्वपूर्ण माना गया।
अभियोजन के अनुसार, 15 जुलाई 2014 को रहुसत गांव निवासी कामता प्रसाद यादव ने खुरहंड पुलिस चौकी में तहरीर दी थी। आरोप था कि पुरानी जमीनी रंजिश में शिव सरन, विशम्भर, तुलसीदास, जीतू उर्फ संदीप, रामदेव और बीरन यादव असलहों से लैस होकर उसके घर पहुंचे। ट्रैक्टर से मकान की तीन पक्की दीवारें गिराने, फायरिंग करने और घर में आग लगाने का आरोप लगाया गया था। पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर आरोपपत्र दाखिल किया था।
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अदालत में विवेचक उपनिरीक्षक मथुरा प्रसाद चौबे ने जिरह में स्वीकार किया कि घटनास्थल के निरीक्षण के दौरान आगजनी जैसी घटना के साक्ष्य नहीं मिले। मौके से फायरिंग से संबंधित खोखा, कारतूस, टिकली या छर्रा भी बरामद नहीं हुआ। वादी कामता प्रसाद घटना के समय मौके पर मौजूद नहीं था। उसने भाई और परिजनों से मिली जानकारी के आधार पर रिपोर्ट दर्ज कराई थी। प्रत्यक्षदर्शी बताए गए गवाहों के बयानों में भी घटनास्थल पर उनकी मौजूदगी और घटना के क्रम को लेकर विरोधाभास सामने आए।
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पुरानी रंजिश भी सामने आई
अदालत के समक्ष दोनों पक्षों के बीच पहले से जमीनी और रास्ते को लेकर विवाद और सीआरपीसी की कार्रवाई का तथ्य भी सामने आया। अभियोजन पक्ष आरोपों को पर्याप्त और विश्वसनीय साक्ष्यों से साबित नहीं कर सका। अदालत ने 24 सितंबर 2026 को फैसला सुनाते हुए शिव सरन, विशम्भर, तुलसीदास, जीतू उर्फ संदीप और रामदेव को दोषमुक्त कर दिया। मामले के एक अन्य आरोपी बीरन यादव की विचारण के दौरान मृत्यु हो गई थी, इसलिए उसके विरुद्ध कार्यवाही पहले ही समाप्त की जा चुकी थी।
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