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किसानों की तबाही देखने नहीं पहुंचे अफसर
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नहर के पानी में डूबी धान फसल दिखाते किसान।
- फोटो : BANDA
किसानों की तबाही देखने नहीं पहुंचे अफसर
अतर्रा। केन नहर के पानी से जलमग्न हुई फसलों को बचाने और पानी खेत से बाहर निकालने में किसान कड़ाके की ठंड में दूसरे दिन भी जुटे रहे। सिंचाई विभाग का कोई अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा। सहायक अभियंता और अवर अभियंता ने अपने अधिकारियों को भ्रामक सूचनाएं दीं।
केन केनाल की अलिहा रजबहा के पास गुरुवार को तड़के करीब दो बजे नहर का पानी आसपास के खेतों में भर गया। केसरुवा, प्रेमपुर, अंगद पुरवा आदि के किसानों की खेत में पड़ी कटी धान और हरी गेहूं की फसल जलमग्न हो गई थीं। शुक्रवार को भी किसान पानी में डूबी पड़ी कटी धान की फसल निकालकर धूप में सुखाते और खेतों में भरा पानी निकालने की मशक्कत करते रहे। अंगद पुरवा की किसान सरोज, विमला, गायत्री आदि ने पानी में डूबी कटी धान की फसल दिखाते हुए सिंचाई विभाग पर रोष जताया। प्रेमपुर के भूपत, शिवकुमार, रमेश, रमैया, ओमप्रकाश, रामप्रताप और अंगद पुरवा के राजाभइया, केसरी, अनिल कुमार, धर्मेंद्र, गुलाब सिंह, मुरवां गांव के रामसिया, अशोक, राजकुमार, रजोला आदि ने कहा कि बेमौसम अचानक पानी छोड़ देने और नहर की मरम्मत या सफाई न होने से यह बर्बादी हुई। अमर उजाला में प्रमुखता से खबर छपने के बाद भी कोई अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा। यह सब बुंदेलखंड राष्ट्रीय सेमिनार में आए अपने उच्चाधिकारियों की खातिर तवाजो में लगे रहे। लेखपाल सर्वेश कुमार पहुंचा तो किसानों का आक्रोश देखकर वहां से खिसक लिया। उधर, विभाग के जेई और एई ने अधिशासी अभियंता अरविंद पांडेय को यह कहकर गुमराह किया कि अखबार में छपी फोटो पुरानी है। हालांकि बाद में अधिशासी अभियंता ने कहा कि वह जांच कराकर कार्रवाई करेंगे।
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अतर्रा। केन नहर के पानी से जलमग्न हुई फसलों को बचाने और पानी खेत से बाहर निकालने में किसान कड़ाके की ठंड में दूसरे दिन भी जुटे रहे। सिंचाई विभाग का कोई अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा। सहायक अभियंता और अवर अभियंता ने अपने अधिकारियों को भ्रामक सूचनाएं दीं।
केन केनाल की अलिहा रजबहा के पास गुरुवार को तड़के करीब दो बजे नहर का पानी आसपास के खेतों में भर गया। केसरुवा, प्रेमपुर, अंगद पुरवा आदि के किसानों की खेत में पड़ी कटी धान और हरी गेहूं की फसल जलमग्न हो गई थीं। शुक्रवार को भी किसान पानी में डूबी पड़ी कटी धान की फसल निकालकर धूप में सुखाते और खेतों में भरा पानी निकालने की मशक्कत करते रहे। अंगद पुरवा की किसान सरोज, विमला, गायत्री आदि ने पानी में डूबी कटी धान की फसल दिखाते हुए सिंचाई विभाग पर रोष जताया। प्रेमपुर के भूपत, शिवकुमार, रमेश, रमैया, ओमप्रकाश, रामप्रताप और अंगद पुरवा के राजाभइया, केसरी, अनिल कुमार, धर्मेंद्र, गुलाब सिंह, मुरवां गांव के रामसिया, अशोक, राजकुमार, रजोला आदि ने कहा कि बेमौसम अचानक पानी छोड़ देने और नहर की मरम्मत या सफाई न होने से यह बर्बादी हुई। अमर उजाला में प्रमुखता से खबर छपने के बाद भी कोई अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा। यह सब बुंदेलखंड राष्ट्रीय सेमिनार में आए अपने उच्चाधिकारियों की खातिर तवाजो में लगे रहे। लेखपाल सर्वेश कुमार पहुंचा तो किसानों का आक्रोश देखकर वहां से खिसक लिया। उधर, विभाग के जेई और एई ने अधिशासी अभियंता अरविंद पांडेय को यह कहकर गुमराह किया कि अखबार में छपी फोटो पुरानी है। हालांकि बाद में अधिशासी अभियंता ने कहा कि वह जांच कराकर कार्रवाई करेंगे।
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