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चार खदानों की एनओसी रद्द, खनन पर रोक
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NOC canceled for four mines, ban on mining
- फोटो : BANDA
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बांदा। जनपद की सीमा पर यमुना नदी किनारे स्थित बेंदा गांव के पास यमुना नदी की बालू खदान पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने रोक लगा दी है। साथ ही इन खदानों के लिए जारी हुआ पर्यावरण विभाग की एनओसी को रद्द कर दिया है।
जिला मुख्यालय से करीब 40 किमी दूर फतेहपुर की सीमा पर स्थित यमुना नदी की बेंदा बालू खदान में खंड संख्या- 1,2,3 व 4 का पट्टा खनिज विभाग ने मेसर्स सरोज बुल्डकॉम, मेसर्स साईं इंटर प्राइजेज उद्योग, मनीष कुमार गुप्ता और मेसर्स मां जयंती इंफ्रास्ट्रक्चर को किया है। पट्टाधारकों ने पर्यावरण विभाग से खनन के लिए पर्यावरण अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) हासिल कर ली।
एनजीटी में रवि कुमार ने याचिका दाखिल की। उत्तर प्रदेश राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने अपने जवाब में कहा कि 2 अप्रैल 2019 को जारी हुए खनन पट्टे 21 हेक्टेयर व 84 हेक्टेयर के हैं। लिहाजा 14 अगस्त 2018 की अधिसूचना के अनुसार शर्तें पूरी करनी जरूरी थीं।
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एनजीटी के चेयरपर्सन न्यायाधीश आदर्श कुमार गोयल और न्यायिक सदस्य न्यायाधीश सुधीर अग्रवाल व ब्रजेश सेठी और विशेषज्ञ सदस्य नागिन नंदा ने अपने 4 पृष्ठीय आदेश में कहा है कि 5 एकड़ से अधिक के पट्टे पर पर्यावरण एनओसी जरूरी थी। इसलिए बालू खनन पर लगाई गई रोक सही है।
एनजीटी ने पुर्न विचार के बाद पर्यावरण एनओसी जारी होने तक बालू खनन पर रोक का आदेश दिया है। यह भी कहा है कि उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड खनन की गई बालू का कानून के तहत प्रतिकर निर्धारित करके वसूल कर सकता है। एनजीटी में याचिकाकर्ता की पैरवी अधिवक्ता कामनी जायसवाल और श्रुति दत्त ने की। यह आदेश 23 सितंबर को हुआ है।
पट्टाधारक क्षेत्र के निवासी भी नहीं
एनजीटी ने अपने आदेश में कहा है कि पट्टाधारक इस क्षेत्र के निवासी भी नहीं है। अधिसूचना के अनुसार निर्धारित गाइड लाइन की अनदेखी करके पर्यावरण एनओसी जारी की गई है। इसलिए इस पर पुन: विचार किया जाना जरूरी है। एनजीटी ने अपील स्वीकार करते हुए यह आदेश सुनाया। कहा है कि जब तक पुन: विचार के बाद एनओसी जारी नहीं होगी तब तक बालू खनन नहीं किया जा सकेगा।
मापदंड का नहीं हुआ पालन
खनन के लिए पर्यावरण की एनओसी जरूरी है। इसके कुछ मापदंड और औपचारिकताएं निर्धारित हैं। बेंदा घाट खदानों के पट्टे में इन्हें पूरा नहीं किया गया। इसलिए एनओसी को निरस्त करते हुए बालू खनन पर रोक लगा दी गई है।
एनजीटी के आदेशों पर होगा अमल
बेंदा घाट के खदानों में खनन पर रोक और पर्यावरण एनओसी निरस्त किए जाने संबंधी एनजीटी आदेश की पुष्टि जिला खनिज अधिकारी सौरभ गुप्ता ने भी की है। उन्होंने बताया कि एनजीटी के आदेशों पर अमल कराया जाएगा।
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जिला मुख्यालय से करीब 40 किमी दूर फतेहपुर की सीमा पर स्थित यमुना नदी की बेंदा बालू खदान में खंड संख्या- 1,2,3 व 4 का पट्टा खनिज विभाग ने मेसर्स सरोज बुल्डकॉम, मेसर्स साईं इंटर प्राइजेज उद्योग, मनीष कुमार गुप्ता और मेसर्स मां जयंती इंफ्रास्ट्रक्चर को किया है। पट्टाधारकों ने पर्यावरण विभाग से खनन के लिए पर्यावरण अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) हासिल कर ली।
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एनजीटी में रवि कुमार ने याचिका दाखिल की। उत्तर प्रदेश राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने अपने जवाब में कहा कि 2 अप्रैल 2019 को जारी हुए खनन पट्टे 21 हेक्टेयर व 84 हेक्टेयर के हैं। लिहाजा 14 अगस्त 2018 की अधिसूचना के अनुसार शर्तें पूरी करनी जरूरी थीं।
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एनजीटी के चेयरपर्सन न्यायाधीश आदर्श कुमार गोयल और न्यायिक सदस्य न्यायाधीश सुधीर अग्रवाल व ब्रजेश सेठी और विशेषज्ञ सदस्य नागिन नंदा ने अपने 4 पृष्ठीय आदेश में कहा है कि 5 एकड़ से अधिक के पट्टे पर पर्यावरण एनओसी जरूरी थी। इसलिए बालू खनन पर लगाई गई रोक सही है।
एनजीटी ने पुर्न विचार के बाद पर्यावरण एनओसी जारी होने तक बालू खनन पर रोक का आदेश दिया है। यह भी कहा है कि उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड खनन की गई बालू का कानून के तहत प्रतिकर निर्धारित करके वसूल कर सकता है। एनजीटी में याचिकाकर्ता की पैरवी अधिवक्ता कामनी जायसवाल और श्रुति दत्त ने की। यह आदेश 23 सितंबर को हुआ है।
पट्टाधारक क्षेत्र के निवासी भी नहीं
एनजीटी ने अपने आदेश में कहा है कि पट्टाधारक इस क्षेत्र के निवासी भी नहीं है। अधिसूचना के अनुसार निर्धारित गाइड लाइन की अनदेखी करके पर्यावरण एनओसी जारी की गई है। इसलिए इस पर पुन: विचार किया जाना जरूरी है। एनजीटी ने अपील स्वीकार करते हुए यह आदेश सुनाया। कहा है कि जब तक पुन: विचार के बाद एनओसी जारी नहीं होगी तब तक बालू खनन नहीं किया जा सकेगा।
मापदंड का नहीं हुआ पालन
खनन के लिए पर्यावरण की एनओसी जरूरी है। इसके कुछ मापदंड और औपचारिकताएं निर्धारित हैं। बेंदा घाट खदानों के पट्टे में इन्हें पूरा नहीं किया गया। इसलिए एनओसी को निरस्त करते हुए बालू खनन पर रोक लगा दी गई है।
एनजीटी के आदेशों पर होगा अमल
बेंदा घाट के खदानों में खनन पर रोक और पर्यावरण एनओसी निरस्त किए जाने संबंधी एनजीटी आदेश की पुष्टि जिला खनिज अधिकारी सौरभ गुप्ता ने भी की है। उन्होंने बताया कि एनजीटी के आदेशों पर अमल कराया जाएगा।