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न राहत, न रियायत, बजट से बुंदेलखंड नदारद

Sat, 01 Feb 2020 11:39 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Sat, 01 Feb 2020 11:39 PM IST
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No relief, no concession, missing Bundelkhand from budget
प्रेम सिंह। - फोटो : BANDA
बांदा। समूचे बुंदेलखंड की संसदीय और विधानसभा सीटें भाजपा को समर्पित कर देने वाले बुंदेली भाजपा सरकार की दूसरी पारी के पहले बजट से निराश नजर आए। उनकी उम्मीदों पर बजट खरा नहीं उतरा। बुंदेलखंड के लिए कोई विशेष राहत, योजना या रियायत नहीं की गई। सबसे ज्यादा सदमा किसानों को है। 100 फीसदी सूखाग्रस्त जिलों का विकास किए जाने के बजट में किए गए प्रावधान को भी अजब और गजब माना जा रहा है। यानी इससे कम नुकसान वाले जिले विकास के हकदार नहीं होंगे।
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राज्यसभा सांसद और सपा के राष्ट्रीय महासचिव विशंभर प्रसाद निषाद ने बजट को नए दशक का दिवालिया बजट करार दिया है। कहा कि कर्मचारियों को वेतन के लिए केंद्र सरकार के पास पैसा नहीं है। स्मार्ट सिटी का सपना दिखाने वाले आज तक एक शहर स्मार्ट नहीं कर पाए। एयर इंडिया और रेलवे को निजी हाथों में बेचा जा रहा है। सपा एमएलसी रमेश मिश्रा ने कहा कि बुंदेलखंड की उपेक्षा की गई है।
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उत्तर प्रदेश किसान समृद्धि आयोग सदस्य प्रेम सिंह का कहना है कि अभी सरकार यही नहीं स्पष्ट कर पाई कि किसान कौन है? 40 फीसदी किसान ऐसे हैं जो किसानी के बाद भी सरकारी अभिलेखों में किसान नहीं हैं। ऐसे में तमाम योजनाएं उन तक नहीं पहुंच पातीं। अच्छा होता कि आम बजट में इस पिछड़े क्षेत्र (बुंदेलखंड) के किसानों की वास्तविक परिस्थितियां समझकर कुछ अलग से व्यवस्था की गई होती।
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वरिष्ठ टैक्स अधिवक्ता बीएम गुप्ता का कहना है कि नोटबंदी के दौरान जमा किए गए पैसे से बजट में वादे किए गए हैं। देश में अरबों रुपये की बोगस मांग खड़ी कर दी गई है। एक साल बाद भी इन्हीं गुमनाम लोगों पर पेनाल्टी हो जानी है। इसे आमदनी मानते हुए बजट बना लिया गया है। इस बजट से बेरोजगारी और महंगाई और बढ़ेगी। अच्छे दिन की बजाय लोगों के बुरे दिन आ सकते हैं।
डीसीडीएफ अध्यक्ष सुधीर सिंह का कहना है कि बजट में कृषि और सिंचाई जैसी बुनियादी जरूरतों की अनदेखी की गई है। पिछले साल सिंचाई के लिए 1.48 लाख करोड़ दिए थे। अबकी कटौती कर 1.6 लाख करोड़ का प्रावधान किया है। इसी तरह ग्रामीण विकास के लिए मात्र 1.23 लाख करोड़ आवंटन बहुत कम है। बजट में एलआईसी को कमजोर कर आर्थिक संप्रभुता के साथ धोखा हुआ है।
राजकीय मेडिकल कालेज के चिकित्साधिकारी डा. विनीत ने बजट में हर जिला अस्पताल को पीपीपी मॉडल पर मेडिकल कालेज से जोड़े जाने पर खुशी जताई। उन्होंने कहा कि इससे अस्पतालों की स्थिति सुधरेगी। गरीबों को अच्छा और मुफ्त इलाज मिलेगा। साथ ही इनकम टैक्स की सीमा पांच लाख रुपये बढ़ाने को भी सराहा। उन्होंने कहा कि इससे नौकरी पेशा लोगों को काफी राहत मिलेगी।

जिला जजी के सेवानिवृत्त आशुलिपिक हाजी मोहम्मद सगीर खां ने कहा कि केंद्र सरकार के आम बजट में करदाताओं को कई छूट से महरूम होना पड़ेगा। एलआईसी आदि में जमा की गई राशि में टैक्स से छूट नहीं मिलेगी। इसका सीधा असर सरकार की बचत योजनाओं पर पड़ेगा। लोग बचत योजनाओं में कम निवेश करेंगे। इससे सरकार और बैंकों को पूंजी जुटाने में परेशानी होगी, योजनाएं प्रभावित होंगी।

विशंभर निषाद।

विशंभर निषाद।- फोटो : BANDA

बीएम गुप्ता।

बीएम गुप्ता।- फोटो : BANDA

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