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बकस्वाहा जंगल कटान पर एनजीटी की रोक
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बांदा। बुंदेलखंड के बकस्वाहा जंगल में हीरा खनन के लिए पेड़ कटान पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने रोक लगा दी है। बुधवार (30 जून) को जारी 24 पृष्ठीय अंतरिम आदेश में एनजीटी ने केंद्र व मध्य प्रदेश सरकार को चार हफ्ते में अपना पक्ष दाखिल करने को कहा है।
मध्यप्रदेश के छतरपुर के बकस्वाहा जंगल में हीरा खदान के लिए 382.13 हेक्टेयर जमीन एमपी सरकार ने बिड़ला ग्रुप की एक्सल माइनिंग एडं इंड्रस्ट्रीज कंपनी को 50 साल के पट्टे पर दे दी है। जंगल में 2 लाख 15 हजार से ज्यादा हरे-भरे पेड़ काटे जाएंगे। इसका चौतरफा विरोध हो रहा है। कई संगठन आंदोलन कर रहे हैं।
दिल्ली के पर्यावरण पैरोकार अधिवक्ता डॉ. पीजी नाजपांडेय और उज्ज्वल शर्मा ने एनजीटी में पिछले दिनों रिट दायर करके लाखों पेड़ कटने से पर्यावरण को होने वाले नुकसान का हवाला देकर हीरा खनन परियोजना पर रोक लगाने की मांग की थी। रिट में केंद्र व मध्य प्रदेश सरकार को पक्ष बनाया गया है।
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सुनवाई के बाद 30 जून को एनजीटी ने अंतरिम आदेश जारी किया है। न्यायाधीश जस्टिस सीओ कुमार सिंह (न्यायिक सदस्य) और अरुण कुमार वर्मा (विशेषज्ञ सदस्य) द्वारा दिए गए अंतरिम आदेश में कहा गया कि यह निश्चित किया जाए कि किसी भी हाल में वन कानूनों का उल्लंघन न हो।
पर्यावरण संतुलन बनाए रखा जाए। कहा कि जब तक भारतीय वन कानून 1927 व 1980 के अनुसार वन विभाग से क्लीयरेंस (अनुमति) न मिल जाए तब तक किसी भी पेड़ की कटान नहीं होनी चाहिए। कहा कि इस परियोजना से कितने लोगों को समस्या है और कितने लोगों को फायदा है, सरकार इसका भी अध्ययन करे। एनजीटी ने अगली सुनवाई के लिए 27 अगस्त की तिथि निर्धारित की है।
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मध्यप्रदेश के छतरपुर के बकस्वाहा जंगल में हीरा खदान के लिए 382.13 हेक्टेयर जमीन एमपी सरकार ने बिड़ला ग्रुप की एक्सल माइनिंग एडं इंड्रस्ट्रीज कंपनी को 50 साल के पट्टे पर दे दी है। जंगल में 2 लाख 15 हजार से ज्यादा हरे-भरे पेड़ काटे जाएंगे। इसका चौतरफा विरोध हो रहा है। कई संगठन आंदोलन कर रहे हैं।
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दिल्ली के पर्यावरण पैरोकार अधिवक्ता डॉ. पीजी नाजपांडेय और उज्ज्वल शर्मा ने एनजीटी में पिछले दिनों रिट दायर करके लाखों पेड़ कटने से पर्यावरण को होने वाले नुकसान का हवाला देकर हीरा खनन परियोजना पर रोक लगाने की मांग की थी। रिट में केंद्र व मध्य प्रदेश सरकार को पक्ष बनाया गया है।
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सुनवाई के बाद 30 जून को एनजीटी ने अंतरिम आदेश जारी किया है। न्यायाधीश जस्टिस सीओ कुमार सिंह (न्यायिक सदस्य) और अरुण कुमार वर्मा (विशेषज्ञ सदस्य) द्वारा दिए गए अंतरिम आदेश में कहा गया कि यह निश्चित किया जाए कि किसी भी हाल में वन कानूनों का उल्लंघन न हो।
पर्यावरण संतुलन बनाए रखा जाए। कहा कि जब तक भारतीय वन कानून 1927 व 1980 के अनुसार वन विभाग से क्लीयरेंस (अनुमति) न मिल जाए तब तक किसी भी पेड़ की कटान नहीं होनी चाहिए। कहा कि इस परियोजना से कितने लोगों को समस्या है और कितने लोगों को फायदा है, सरकार इसका भी अध्ययन करे। एनजीटी ने अगली सुनवाई के लिए 27 अगस्त की तिथि निर्धारित की है।