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पशु पालकों के केसीसी आवेदन बैंकों ने बैरंग लौटाए
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बांदा। पशुपालकों को पशुपालन के लिए किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा। चालू वित्तीय वर्ष में पशुपालन विभाग बैंकों को आठ हजार से अधिक आवेदन भेज चुका है। इनमें एक भी स्वीकृत नहीं हुआ। बैंकों ने कोई न कोई आपत्ति लगाकर फाइलें पशुपालन विभाग को वापस भेज दी हैं।
इसी वित्तीय वर्ष में शुरू हुई पशुपालक किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) योजना के तहत चालू वित्तीय वर्ष में चित्रकूटधाम मंडल में 29,250 पशुपालकों के केसीसी बनाए जाने थे। जिला स्तर पर लक्ष्य निर्धारित किया गया था।
पशु चिकित्साधिकारियों के माध्यम से मंडल के चारों जिलों में 8757 केसीसी आवेदन बैंकों को भेजे गए थे, लेकिन बैंकों ने एक भी आवेदन स्वीकृत नहीं किया। पशुपालन विभाग के उप निदेशक डा. मनोज अवस्थी ने इस बाबत निदेशक को पत्र भेजा है।
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पत्र में कहा कि ज्यादातर आवेदनों में बैंकों ने बिना जांच के ही रिपोर्ट लगाकर नामंजूर कर दिए हैं। गौरतलब है कि प्रदेश के प्रमुख सचिव (पशुपालन) ने हाल ही में किसान पशुपालक केसीसी का लक्ष्य पूरा न होने पर उप निदेशक और जिला पशु चिकित्साधिकारियों को पत्र जारी कर नाराजगी जताई थी।
उप निदेशक डा. मनोज अवस्थी का कहना है कि पशुपालक केसीसी में बैंक दिलचस्पी नहीं ले रहे हैं। आवेदनों में बिना जांच के ही बैंक अपनी रिपोर्ट लगाकर आवेदन वापस भेज रहे हैं। इसके लिए शासन को पत्र भेजा गया है।
पशुओं की कीमत का आकलन करने के बाद बैंक पशुपालक का केसीसी बनाता है। संपत्ति की कुल कीमत का 70 फीसदी तक केसीसी जारी किया जाता है। किसान पर सिर्फ चार फीसदी ब्याज लगाया जाता है। केसीसी का प्रति वर्ष नवीनीकरण भी कराना होता है।
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इसी वित्तीय वर्ष में शुरू हुई पशुपालक किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) योजना के तहत चालू वित्तीय वर्ष में चित्रकूटधाम मंडल में 29,250 पशुपालकों के केसीसी बनाए जाने थे। जिला स्तर पर लक्ष्य निर्धारित किया गया था।
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पशु चिकित्साधिकारियों के माध्यम से मंडल के चारों जिलों में 8757 केसीसी आवेदन बैंकों को भेजे गए थे, लेकिन बैंकों ने एक भी आवेदन स्वीकृत नहीं किया। पशुपालन विभाग के उप निदेशक डा. मनोज अवस्थी ने इस बाबत निदेशक को पत्र भेजा है।
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पत्र में कहा कि ज्यादातर आवेदनों में बैंकों ने बिना जांच के ही रिपोर्ट लगाकर नामंजूर कर दिए हैं। गौरतलब है कि प्रदेश के प्रमुख सचिव (पशुपालन) ने हाल ही में किसान पशुपालक केसीसी का लक्ष्य पूरा न होने पर उप निदेशक और जिला पशु चिकित्साधिकारियों को पत्र जारी कर नाराजगी जताई थी।
उप निदेशक डा. मनोज अवस्थी का कहना है कि पशुपालक केसीसी में बैंक दिलचस्पी नहीं ले रहे हैं। आवेदनों में बिना जांच के ही बैंक अपनी रिपोर्ट लगाकर आवेदन वापस भेज रहे हैं। इसके लिए शासन को पत्र भेजा गया है।
पशुओं की कीमत का आकलन करने के बाद बैंक पशुपालक का केसीसी बनाता है। संपत्ति की कुल कीमत का 70 फीसदी तक केसीसी जारी किया जाता है। किसान पर सिर्फ चार फीसदी ब्याज लगाया जाता है। केसीसी का प्रति वर्ष नवीनीकरण भी कराना होता है।