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जंगल में खेलते मिले लापता शावक
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करतल (बांदा)। बुंदेलखंड के बाघ अभ्यारण्य पन्ना टाइगर रिजर्व पार्क में बाघिन (पी-213) की मौत के बाद से लापता उसके चार शावकों को कई दिन की मशक्कत के बाद वन विभाग की टीम ने खोज निकाला है। चारों शावक स्वस्थ हैं। ये आपस में खेलते देखे गए। इस पर पार्क प्रशासन ने राहत की सांस ली है।
रिजर्व पार्क की लगभग छह वर्षीय बाघिन का 15 मई को पार्क के घने जंगल और दुर्गम स्थल पर स्थित कोनी नाले में मिला था। उसके 6 से 8 माह के चारों शावक लापता थे। उनका कुछ पता नहीं चल रहा था। शावकों की तलाश में रिजर्व पार्क वन विभाग की कई टीमें लगाईं गईं थीं। इनमें कुछ वन कर्मी प्रशिक्षित हाथियों पर सवार होकर शावकों की खोज कर रहे थे।
पन्ना टाइगर रिजर्व पार्क क्षेत्र संचालक (फील्ड डायरेक्टर) उत्तम कुमार शर्मा ने बुधवार को बताया कि चारों शावक खोज लिए गए हैं। ये कोनी सेहा के जंगल में वन कर्मियों को नजर आए। इन्हें आपस में खेलते देखा गया। सभी स्वस्थ और सुरक्षित हैं। उन्होंने बताया कि शावकों पर पूरी नजर रखी जा रही है। उनकी निगरानी चाक चौबंद कर दी गई है।
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नर बाघ ने की शावकों की देखभाल
चारों शावकों के सही सलामत पाए जाने पर पन्ना टाइगर रिजर्व पार्क के क्षेत्र संचालक उत्तम कुमार शर्मा ने संभावना जताई कि मां की मौत के बाद शावकों की देखभाल पिता नर बाघ (पी-243) करता रहा है। यह शुभ संकेत है। बताया कि नर बाघ का रिकार्ड भी अच्छा है। कहा कि नर बाघ का बर्ताव शावकों के प्रति सहानुभूति का रहा तो शावकों को खुले जंगल में ही रखा जाएगा। तीन-चार महीने शावक जंगल में रह लिए तो यहां की चुनौतियों के बीच जीना सीख लेंगे। शिकार करने में भी सक्षम हो जाएंगे।
नहीं सुलझी बाघिन की मौत की गुत्थी
बाघिन (पी-213) की मौत की गुत्थी अभी भी सुलझ नहीं सकी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट अभी नहीं आ पाई है। वन्य प्राणि चिकित्सक डॉ. संजीव कुमार गुप्ता ने बाघिन के शव का पोस्टमार्टम किया है।
क्षेत्र संचालक का कहना है कि बाघिन की मौत बीमारी या जहरीले कीड़े के काटने से हो सकती है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में बीमारी की बात सामने आई तो अन्य बाघों को बचाने के लिए जरूरी कदम उठाएं जाएंगे। बाघिन के गले में रेडियो कॉलर लगा था।
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रिजर्व पार्क की लगभग छह वर्षीय बाघिन का 15 मई को पार्क के घने जंगल और दुर्गम स्थल पर स्थित कोनी नाले में मिला था। उसके 6 से 8 माह के चारों शावक लापता थे। उनका कुछ पता नहीं चल रहा था। शावकों की तलाश में रिजर्व पार्क वन विभाग की कई टीमें लगाईं गईं थीं। इनमें कुछ वन कर्मी प्रशिक्षित हाथियों पर सवार होकर शावकों की खोज कर रहे थे।
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पन्ना टाइगर रिजर्व पार्क क्षेत्र संचालक (फील्ड डायरेक्टर) उत्तम कुमार शर्मा ने बुधवार को बताया कि चारों शावक खोज लिए गए हैं। ये कोनी सेहा के जंगल में वन कर्मियों को नजर आए। इन्हें आपस में खेलते देखा गया। सभी स्वस्थ और सुरक्षित हैं। उन्होंने बताया कि शावकों पर पूरी नजर रखी जा रही है। उनकी निगरानी चाक चौबंद कर दी गई है।
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नर बाघ ने की शावकों की देखभाल
चारों शावकों के सही सलामत पाए जाने पर पन्ना टाइगर रिजर्व पार्क के क्षेत्र संचालक उत्तम कुमार शर्मा ने संभावना जताई कि मां की मौत के बाद शावकों की देखभाल पिता नर बाघ (पी-243) करता रहा है। यह शुभ संकेत है। बताया कि नर बाघ का रिकार्ड भी अच्छा है। कहा कि नर बाघ का बर्ताव शावकों के प्रति सहानुभूति का रहा तो शावकों को खुले जंगल में ही रखा जाएगा। तीन-चार महीने शावक जंगल में रह लिए तो यहां की चुनौतियों के बीच जीना सीख लेंगे। शिकार करने में भी सक्षम हो जाएंगे।
नहीं सुलझी बाघिन की मौत की गुत्थी
बाघिन (पी-213) की मौत की गुत्थी अभी भी सुलझ नहीं सकी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट अभी नहीं आ पाई है। वन्य प्राणि चिकित्सक डॉ. संजीव कुमार गुप्ता ने बाघिन के शव का पोस्टमार्टम किया है।
क्षेत्र संचालक का कहना है कि बाघिन की मौत बीमारी या जहरीले कीड़े के काटने से हो सकती है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में बीमारी की बात सामने आई तो अन्य बाघों को बचाने के लिए जरूरी कदम उठाएं जाएंगे। बाघिन के गले में रेडियो कॉलर लगा था।