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खदानें बेदम, गोचर भूमि पर लगाया दम
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बांदा। बुंदेलखंड के मध्यप्रदेश की हीरानगरी के रूप में विख्यात पन्ना जिले की करीब 26 खदानों से भारी मात्रा में खनन की जा रही बालू के ओवरलोड ट्रक उत्तर प्रदेश के बांदा, फतेहपुर, हमीरपुर, रायबरेली और कानपुर, लखनऊ की सड़कों को ध्वस्त कर रहें हैं।
उधर, रसूखदार ठेकेदार ने बांदा की खदान में बालू सफाचट करने के बाद अब पन्ना की गोचर भूमि में खनन की बयार चला रखी है। इसका ही नतीजा है कि ग्र्रामीणों को पशु चराने के लिए चारागाह के लाले हैं। उधर, डंप की आड़ में अवैध खनन की ऊंची जंप लगाई जा रही है।
डंप के ढेर दो माह बाद भी ज्यों के त्यों पहाड़नुमा बरकरार हैं। नदियों से खनन जारी है। 30 जून से तीन माह के लिए एनजीटी की शर्तों के तहत खदानें बंद हैं, लेकिन खनन का खेल बदस्तूर जारी है। यह खेल खुलेआम सीमावर्ती मध्य प्रदेश में हो रहा है। इसका खामियाजा उत्तर प्रदेश के कई जिलों को भुगतना पड़ रहा है।
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रात दिन सैकड़ों ओवरलोड ट्रक यूपी की सड़कों को रौंद रहे हैं। नेशनल हाईवे से लेकर स्टेट हाईवे और जिला की सड़कें और गांवों के संपर्क मार्ग टूट रहे हैं। सिंचाई विभाग और पीडब्ल्यूडी के पुल और पुलियां क्षतिग्रस्त हो रही हैं।
पन्ना की 26 खदानों पर एक ही व्यक्ति का कब्जा/पट्टा है। यह काफी रसूख वाला बताया गया है। बांदा की बागै नदी बालू खदान में भी पट्टा लिया था। वहां अवैध खनन में तत्कालीन डीएम और खनिज अधिकारी ने एफआईआर दर्ज कराई थी।
ओवरलोड ट्रकों से यमुना पुल क्षतिग्रस्त
मध्यप्रदेश से आ रही बालू यूपी के बांदा, फतेहपुर, रायबरेली, कानपुर, लखनऊ आदि के लिए काफी हानिकारक साबित हो रही है। सड़कें तो टूट ही रहीं हैं, सड़क हादसे भी हो रहे हैं। बालू के ओवरलोड ट्रकों से कई राहगीरों की जान जा चुकी है। तमाम गंभीर रूप से घायल हो चुके हैं।
अन्ना पशुओं को भी बालू के ट्रक रौंद रहे हैं। ताजे उदाहरण में रात दिन बालू के ओवरलोड ट्रकों से व्यस्त चिल्ला घाट में बना यमुना नदी पुल क्षतिग्रस्त हुआ है। इस पुल का एक पिलर सोमवार को खिसक गया। करीब सात इंच का गैप हो गया है। फिलहाल इस नए पुल से यातायात को रोक दिया गया है।
गोचर भूमि में खनन, चारागाह के लाले
खनन ठेकेदार बांदा की खदानें खोखली करने के बाद सीमावर्ती मध्यप्रदेश के पन्ना जिले में ग्रामीणों के लिए संकट खड़ा किए हुए है। सूत्रों के मुताबिक, बरौली एवं रामनई गांवों में केन नदी में अवैध खनन किया जा रहा है।
मुख्य ठेकेदार ने पेटी कांट्रेक्टर लगा रखे हैं। यहां सरकारी गोचर भूमि पर भी खनन हो रहा है। ग्रामीणों को अपने पशु चराने के लिए चारागाह नहीं है।
जंगल काटकर बनाया खदान का रास्ता
बुंदेलखंड में पर्यावरण को पलीता लगाने की होड़ मची है। नदियों में मशीनों से अंधाधुंध अवैध खनन के साथ ही पेड़ों की कटान भी हो रही है। बरौली और रामनई के आसपास लगभग तीन किलोमीटर का रास्ता बनाने के लिए बालू ठेकेदारों ने काफी पेड़ों का सफाया कर दिया है।
बस्ती के बीच से ट्रक निकल रहे हैं। बालू ठेकेदारों का दबदबा इतना है कि रास्ते में पड़ने वाली एक बस्ती के तार काटकर वहां की बिजली गुल कर दी है।
छतरपुर में भी एक ठेेकेदार की छत्रछाया
उत्तर प्रदेश के बांदा समेत अन्य जनपदों के पर्यावरण और सड़कोें को नुकसान पहुंचाने वाले सीमावर्ती मध्य प्रदेश के पन्ना जिले के अलावा छतरपुर जनपद भी है। छतरपुर में एक फर्म का बालू खदानों पर वर्चस्व है।
यहां केन नदी लगभग खोखली की जा चुकी है। छतरपुर के बालू ट्रक भी बांदा, महोबा, हमीरपुर से गुजरकर सड़कों को धराशायी कर रहे हैं।
डंप ज्यों के त्यों, खदानों से खनन
30 जून से तीन माह के लिए सभी खदानें बंद हैं, लेकिन बालू की निकासी ज्याें की त्यों बरकरार है। इसके पीछे डंप का खेल चल रहा है। कुछ खदान संचालकों सहित अन्य लोगों ने डंप के परमिट ले रखे हैं।
डंप के ऊंचे-ऊंचे ढेर भी हैं, लेकिन हैरत की बात यह है कि खदान बंद हुए दो माह बीत गए हैं। डंप से ही बालू की निकासी दर्शाई जा रही, लेकिन डंप के ढेर कम नहीं हो रहे। वह ज्यों के त्यों पहाड़नुमा बरकरार हैं।
मतलब साफ है कि डंप की आड़ में नदी/खदानों से खनन जारी है। नेशनल हाईवे से लेकर स्टेट हाईवे, जिला मुख्य मार्ग और संपर्क मार्ग तथा खेतों में बालू डंप के ढेर जगह-जगह नजर आ रहे हैं। कागजों में इन ढेरों से बालू की निकासी हो रही है।
सिस्टम में सब सधेे, नदी खोर बेखौफ
खदानों से लेकर डंप स्थलों तक बालू माफिया राजस्व की जमकर चोरी कर रहे हैं। डंप का लाइसेंस लेकर नदी खोर नदियों से अवैध खनन कर रहे हैं। विभाग से लेकर प्रशासन और माननीय व उनके कुनबे सिस्टम के साथ सब कुछ चलने दे रहे हैं।
-आशीष सागर दीक्षित, पर्यावरण कार्यकर्ता बांदा।
एमपी के ट्रकों पर लगातार हो रही कार्रवाई
जनपद में कोई खदान इस समय नहीं चल रही। एमपी से आने वाले ट्रकों पर भी लगातार जांच पड़ताल की जा रही है। ओवरलोड और अवैध डंप आदि में लगातार कार्रवाइयां हुई हैं।
अगस्त के पहले पखवाड़े में ही 113 वाहनों को पकड़कर सीज किया गया है। लगभग डेढ़ करोड़ रुपये रायल्टी, खनिज मूल्य आदि वसूली की कार्रवाई की गई है। तीन भंडारण कर्ताओं को नियमित निकासी न करने पर नोटिस दी गई है। चेकिंग लगातार चल रही है।
-सौरभ गुप्ता, जिला खनिज अधिकारी
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उधर, रसूखदार ठेकेदार ने बांदा की खदान में बालू सफाचट करने के बाद अब पन्ना की गोचर भूमि में खनन की बयार चला रखी है। इसका ही नतीजा है कि ग्र्रामीणों को पशु चराने के लिए चारागाह के लाले हैं। उधर, डंप की आड़ में अवैध खनन की ऊंची जंप लगाई जा रही है।
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डंप के ढेर दो माह बाद भी ज्यों के त्यों पहाड़नुमा बरकरार हैं। नदियों से खनन जारी है। 30 जून से तीन माह के लिए एनजीटी की शर्तों के तहत खदानें बंद हैं, लेकिन खनन का खेल बदस्तूर जारी है। यह खेल खुलेआम सीमावर्ती मध्य प्रदेश में हो रहा है। इसका खामियाजा उत्तर प्रदेश के कई जिलों को भुगतना पड़ रहा है।
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रात दिन सैकड़ों ओवरलोड ट्रक यूपी की सड़कों को रौंद रहे हैं। नेशनल हाईवे से लेकर स्टेट हाईवे और जिला की सड़कें और गांवों के संपर्क मार्ग टूट रहे हैं। सिंचाई विभाग और पीडब्ल्यूडी के पुल और पुलियां क्षतिग्रस्त हो रही हैं।
पन्ना की 26 खदानों पर एक ही व्यक्ति का कब्जा/पट्टा है। यह काफी रसूख वाला बताया गया है। बांदा की बागै नदी बालू खदान में भी पट्टा लिया था। वहां अवैध खनन में तत्कालीन डीएम और खनिज अधिकारी ने एफआईआर दर्ज कराई थी।
ओवरलोड ट्रकों से यमुना पुल क्षतिग्रस्त
मध्यप्रदेश से आ रही बालू यूपी के बांदा, फतेहपुर, रायबरेली, कानपुर, लखनऊ आदि के लिए काफी हानिकारक साबित हो रही है। सड़कें तो टूट ही रहीं हैं, सड़क हादसे भी हो रहे हैं। बालू के ओवरलोड ट्रकों से कई राहगीरों की जान जा चुकी है। तमाम गंभीर रूप से घायल हो चुके हैं।
अन्ना पशुओं को भी बालू के ट्रक रौंद रहे हैं। ताजे उदाहरण में रात दिन बालू के ओवरलोड ट्रकों से व्यस्त चिल्ला घाट में बना यमुना नदी पुल क्षतिग्रस्त हुआ है। इस पुल का एक पिलर सोमवार को खिसक गया। करीब सात इंच का गैप हो गया है। फिलहाल इस नए पुल से यातायात को रोक दिया गया है।
गोचर भूमि में खनन, चारागाह के लाले
खनन ठेकेदार बांदा की खदानें खोखली करने के बाद सीमावर्ती मध्यप्रदेश के पन्ना जिले में ग्रामीणों के लिए संकट खड़ा किए हुए है। सूत्रों के मुताबिक, बरौली एवं रामनई गांवों में केन नदी में अवैध खनन किया जा रहा है।
मुख्य ठेकेदार ने पेटी कांट्रेक्टर लगा रखे हैं। यहां सरकारी गोचर भूमि पर भी खनन हो रहा है। ग्रामीणों को अपने पशु चराने के लिए चारागाह नहीं है।
जंगल काटकर बनाया खदान का रास्ता
बुंदेलखंड में पर्यावरण को पलीता लगाने की होड़ मची है। नदियों में मशीनों से अंधाधुंध अवैध खनन के साथ ही पेड़ों की कटान भी हो रही है। बरौली और रामनई के आसपास लगभग तीन किलोमीटर का रास्ता बनाने के लिए बालू ठेकेदारों ने काफी पेड़ों का सफाया कर दिया है।
बस्ती के बीच से ट्रक निकल रहे हैं। बालू ठेकेदारों का दबदबा इतना है कि रास्ते में पड़ने वाली एक बस्ती के तार काटकर वहां की बिजली गुल कर दी है।
छतरपुर में भी एक ठेेकेदार की छत्रछाया
उत्तर प्रदेश के बांदा समेत अन्य जनपदों के पर्यावरण और सड़कोें को नुकसान पहुंचाने वाले सीमावर्ती मध्य प्रदेश के पन्ना जिले के अलावा छतरपुर जनपद भी है। छतरपुर में एक फर्म का बालू खदानों पर वर्चस्व है।
यहां केन नदी लगभग खोखली की जा चुकी है। छतरपुर के बालू ट्रक भी बांदा, महोबा, हमीरपुर से गुजरकर सड़कों को धराशायी कर रहे हैं।
डंप ज्यों के त्यों, खदानों से खनन
30 जून से तीन माह के लिए सभी खदानें बंद हैं, लेकिन बालू की निकासी ज्याें की त्यों बरकरार है। इसके पीछे डंप का खेल चल रहा है। कुछ खदान संचालकों सहित अन्य लोगों ने डंप के परमिट ले रखे हैं।
डंप के ऊंचे-ऊंचे ढेर भी हैं, लेकिन हैरत की बात यह है कि खदान बंद हुए दो माह बीत गए हैं। डंप से ही बालू की निकासी दर्शाई जा रही, लेकिन डंप के ढेर कम नहीं हो रहे। वह ज्यों के त्यों पहाड़नुमा बरकरार हैं।
मतलब साफ है कि डंप की आड़ में नदी/खदानों से खनन जारी है। नेशनल हाईवे से लेकर स्टेट हाईवे, जिला मुख्य मार्ग और संपर्क मार्ग तथा खेतों में बालू डंप के ढेर जगह-जगह नजर आ रहे हैं। कागजों में इन ढेरों से बालू की निकासी हो रही है।
सिस्टम में सब सधेे, नदी खोर बेखौफ
खदानों से लेकर डंप स्थलों तक बालू माफिया राजस्व की जमकर चोरी कर रहे हैं। डंप का लाइसेंस लेकर नदी खोर नदियों से अवैध खनन कर रहे हैं। विभाग से लेकर प्रशासन और माननीय व उनके कुनबे सिस्टम के साथ सब कुछ चलने दे रहे हैं।
-आशीष सागर दीक्षित, पर्यावरण कार्यकर्ता बांदा।
एमपी के ट्रकों पर लगातार हो रही कार्रवाई
जनपद में कोई खदान इस समय नहीं चल रही। एमपी से आने वाले ट्रकों पर भी लगातार जांच पड़ताल की जा रही है। ओवरलोड और अवैध डंप आदि में लगातार कार्रवाइयां हुई हैं।
अगस्त के पहले पखवाड़े में ही 113 वाहनों को पकड़कर सीज किया गया है। लगभग डेढ़ करोड़ रुपये रायल्टी, खनिज मूल्य आदि वसूली की कार्रवाई की गई है। तीन भंडारण कर्ताओं को नियमित निकासी न करने पर नोटिस दी गई है। चेकिंग लगातार चल रही है।
-सौरभ गुप्ता, जिला खनिज अधिकारी