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Banda News: मुख्तार व अब्बास की मदद के लिए गुर्गे कर रहे करोड़ों खर्च
Wed, 29 Mar 2023 12:43 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
Updated Wed, 29 Mar 2023 12:43 AM IST
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चित्रकूट। माफिया मुख्तार अंसारी, बहू निखत बानो व पुत्र अब्बास की मदद के लिए इनके गुर्गे करोड़ों रुपये प्रदेश के कई जिलों में खर्च कर रहे हैं। यह रुपया हवाला अथवा मनी लॉड्रिंग के जरिए आने की संभावना है। इसके लिए जांच एजेंसियों ने ईडी व इनकम टैक्स के अधिकारियों से मदद ली है। पूर्व में निखत के बैग से सउदी अरब की करेंसी रियाल भी बरामद हो चुकी है।
जेल प्रकरण में विधायक अब्बास व उसकी पत्नी निखत के मद्दगारों को नकदी से लेकर महंगे गिफ्ट दिलाने के लिए ऑनलाइन रुपये उपलब्ध कराने वाले वाराणसी के शाहबाज आलम से कुछ और राज सामने आए हैं। इसके लिए छह माह में पौने दो करोड़ रुपये का ट्रांजक्शन हुआ। यह रुपया किस मद से आया इसका हिसाब नहीं।
मुख्तार व अब्बास के बही खाते का हिसाब रखने वाले शहबाज आलम ने दो बेनामी खातों से छह माह में 92 लाख व 87 लाख रुपये ट्रांसफर किए हैं। इन बेनामी कंपनियों के अलावा कुछ शेल कंपनी भी मिली हैं। जिसमें कैश जमा कर उसको आपराधिक गतिविधियों के लिए इधर-उधर ट्रांसफर किया गया है। यह रुपये मुकदमों व अन्य सुविधाओं को पहुंचाने वालों को दिए जाते थे। इतनी धनराशि के इधर उधर ट्रांसफर किए जाने की जांच को लेकर अब एसआईटी, ईडी व इनकम टैक्स के अधिकारियों से मदद ली जा रही है। (संवाद)
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डीआईजी विपिन कुमार मिश्रा ने बताया कि जेल प्रकरण में अबतक पकड़े गए मददगारों के अलावा नगदी व अन्य महंगे गिफ्ट का प्रलोभन देने वाला रैकेट हो सकता है। वाराणसी से एक एकाउंटेंट के पकड़े जाने के बाद इस बात को बल मिला है कि यह रैकेट दिल्ली तक है। अभी और नाम सामने आ सकते हैं। संवाद
इनसेट
क्या हैं शेल कंपनियां व हवाला
शेल कंपनियां कागजों पर बनी ऐसी कंपनियां होती हैं जो किसी तरह का आधिकारिक कारोबार नहीं करती हैं। इन कंपनियों का इस्तेमाल मनी लॉन्ड्रिंग के लिए किया जाता है। इन कंपनियों के संचालन की बात की जाए तो इनमें किसी तरह का कोई काम नहीं होता। इनमें केवल कागजों पर एंट्री दर्ज की जाती हैं। इसी प्रकार हवाला का मतलब नकद लेनदेन से होता है। (संवाद)
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जेल प्रकरण में विधायक अब्बास व उसकी पत्नी निखत के मद्दगारों को नकदी से लेकर महंगे गिफ्ट दिलाने के लिए ऑनलाइन रुपये उपलब्ध कराने वाले वाराणसी के शाहबाज आलम से कुछ और राज सामने आए हैं। इसके लिए छह माह में पौने दो करोड़ रुपये का ट्रांजक्शन हुआ। यह रुपया किस मद से आया इसका हिसाब नहीं।
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मुख्तार व अब्बास के बही खाते का हिसाब रखने वाले शहबाज आलम ने दो बेनामी खातों से छह माह में 92 लाख व 87 लाख रुपये ट्रांसफर किए हैं। इन बेनामी कंपनियों के अलावा कुछ शेल कंपनी भी मिली हैं। जिसमें कैश जमा कर उसको आपराधिक गतिविधियों के लिए इधर-उधर ट्रांसफर किया गया है। यह रुपये मुकदमों व अन्य सुविधाओं को पहुंचाने वालों को दिए जाते थे। इतनी धनराशि के इधर उधर ट्रांसफर किए जाने की जांच को लेकर अब एसआईटी, ईडी व इनकम टैक्स के अधिकारियों से मदद ली जा रही है। (संवाद)
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डीआईजी विपिन कुमार मिश्रा ने बताया कि जेल प्रकरण में अबतक पकड़े गए मददगारों के अलावा नगदी व अन्य महंगे गिफ्ट का प्रलोभन देने वाला रैकेट हो सकता है। वाराणसी से एक एकाउंटेंट के पकड़े जाने के बाद इस बात को बल मिला है कि यह रैकेट दिल्ली तक है। अभी और नाम सामने आ सकते हैं। संवाद
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क्या हैं शेल कंपनियां व हवाला
शेल कंपनियां कागजों पर बनी ऐसी कंपनियां होती हैं जो किसी तरह का आधिकारिक कारोबार नहीं करती हैं। इन कंपनियों का इस्तेमाल मनी लॉन्ड्रिंग के लिए किया जाता है। इन कंपनियों के संचालन की बात की जाए तो इनमें किसी तरह का कोई काम नहीं होता। इनमें केवल कागजों पर एंट्री दर्ज की जाती हैं। इसी प्रकार हवाला का मतलब नकद लेनदेन से होता है। (संवाद)