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खुल सकता है सारस संरक्षण शोध केंद्र

Thu, 04 Feb 2016 12:05 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, बांदा
ब्यूरो/अमर उजाला, बांदा Updated Thu, 04 Feb 2016 12:05 AM IST
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May open Stork Conservation Research Center

बांदा। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की प्रदेश के किसी भी

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जिले में सारस संरक्षण के लिए शोध केंद्र खोले जाने की घोषणा पर चित्रकूटधाम मंडल के बांदा जनपद में भी शोध केंद्र खुलने के आसार हैं। वन विभाग की ओर से चिह्नित लगभग दो दर्जन स्थानों पर 203 सारस पाए गए हैं। यह गणना वन विभाग ने हाल ही में कराई है।

मंगलवार को मुख्यमंत्री ने सैफई (इटावा) में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय सारस संगोष्ठी में कहा है कि इनवायरमेंट यूनीवर्सिटी या सारस संरक्षण के लिए शोध केंद्र खोलने का जिस जिले से प्रस्ताव आएगा, उसे मंजूरी दी जाएगी।

सारस मित्रों को एक हजार रुपये मासिक मानदेय देने का भी एलान किया है। मुख्यमंत्री के इस एलान से बांदा जनपद के सारस प्रेमियों में उम्मीद जागी है। वन विभाग भी इसकी तैयारियों में जुट गया है।

दिसंबर में बांदा वन प्रभाग में सारसों की गणना कराई है। जनपद के करीब डेढ़ दर्जन गांवों में अलग-अलग स्थानों पर 203 सारस पाए गए हैं।

जिन स्थानों पर सारस पाए गए हैं, उनमें जनवारा गांव गड़रा नाला में 10, जमरेही नाथ का पुरवा में 12, अधावं में आठ, अनवान में 14, तेरहीमाफी में चार, वासिलपुर, मिरगहनी और अतरहट में दो-दो, सांड़ी में 25, सैमरी में दो, अमलीकौर मेें दो, खुरहंड में 26, छेहरावं में 20, करतल में आठ, पडुई मार्ग में 38, हुसैनपुर में चार, देउली में 20, करबई, चिल्ली में दो और रामपुर में दो सारस शामिल हैं।

यह गणना वन विभाग के कर्मचारियों ने सुबह और शाम भ्रमण कर जीपीएस के जरिये की है। प्रभागीय वनाधिकारी (डीएफओ) प्रमोद कुमार गुप्ता ने बताया कि सारसों के संरक्षण का पूरा प्रयास किया जा रहा है।

कुछ सारस स्थल सरकारी और कुछ निजी क्षेत्र में हैं। खास बात यह है कि गणना रिपोर्ट में प्रभागीय वनाधिकारी ने सभी सारस स्थलों को असंरक्षित बताया है।

इस वर्ष बांदा जनपद में सारसों की संख्या में कमी आई है, जबकि वर्ष 2012 से वर्ष 2015 तक लगातार चार वर्ष सारसों की संख्या बढ़ती रही।

पिछले एक वर्ष में सारसों की कमी का सबसे बड़ा कारण नदियों में बालू खनन के लिए रात-दिन मशीनों का इस्तेमाल और सारस के पसंदीदा क्षेत्रों में खनन माना जा रहा है।

वर्ष 2012 में वन विभाग टीम ने सारस गणना में जिले में कुल 96 सारस पाए थे। अगले वर्ष 2013 में इनकी संख्या बढ़कर 148 हो गई।

वर्ष 2014 की गणना में 234 सारस पाए गए, लेकिन पिछले वर्ष 2015 में सारसों की संख्या 203 हो गई। यानी साल भर में 31 सारस कम हुए।

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