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कई केंद्र बंद मिले, जो खुले वहां बच्चे नहीं

Thu, 07 Oct 2021 11:31 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Thu, 07 Oct 2021 11:31 PM IST
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Many centers were found closed, which opened there were no children
Many centers were found closed, which opened there were no children - फोटो : BANDA
बांदा। नई शिक्षा नीति के तहत प्री-प्राइमरी शुरू करने की कवायदें हो रही हैं और आंगनबाड़ी केंद्र बदहाली से जूझ रहे हैं। मौजूदा हालात में केंद्रों में कक्षाओं का संचालन आसान नहीं रहेगा। जिले के 1705 आंगनबाड़ी केंद्रों में 277 खुद के भवन और 1428 घरों या निजी भवनों में संचालित हैं।
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इनमें लगभग 3410 कार्मिक (मुख्य आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिका) तैनात हैं। शहर में 187 और ग्रामीण क्षेत्र में 1518 आंगनबाड़ी केंद्र हैं। हर माह करोड़ों रुपये मानदेय पर खर्च हो रहे हैं। गुरुवार को ज्यादातर आंगनबाड़ी केंद्रों पर ताले लटकते मिले। जो केंद्र खुले मिले वह सूने पड़े थे। उपस्थिति के नाम पर मात्र सहायिका थीं। प्रस्तुत है गुरुवार को शहर के आंगनबाड़ी केंद्रों का हाल।
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केंद्र में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता राजकिशोरी मौजूद मिलीं। बताया कि किराए के कमरे में केंद्र संचालित किया जा रहा है। 3 से 6 वर्ष के 35 बच्चे पंजीकृत हैं। 7 माह से 3 वर्ष तक के 50 बच्चे पंजीकृत हैं। वर्तमान में बच्चे नहीं आ रहे हैं।
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12 बजे तक नहीं खुला केंद्र
यह केंद्र प्राथमिक पाठशाला, स्वराज कालोनी में संचालित है। यहां आंगनबाड़ी कार्यकर्ता मृदुला देवी व सहायिका सुनीता तैनात हैं। लेकिन दोपहर 12 बजे ताला लटक रहा था। स्कूल की शिक्षिका ने केंद्र का ताला खोला और बताया कि केंद्र रोज खुलता है। आज वह अभी तक नहीं आई हैं।
केंद्र पर लटक रहा था ताला
प्राथमिक विद्यालय देवनगर (झील का पुरवा) भवन में दो आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हैं। यहां एक केंद्र में माधवी मिश्रा व सहायिका सीता कार्यरत हैं। केंद्र में ताला बंद था। दूसरे केंद्र में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता गोमती यादव तैनात हैं। यह केंद्र भी बंद मिला।

तिंदवारी। आंगनबाड़ी केंद्र पर एक कार्यकर्ता और दो सहायिकाएं तैनात हैं। केंद्र में दो मोहल्लों के 57 बच्चे पंजीकृत हैं। गुरुवार को सुबह 10:30 बजे तक केंद्र में एक भी बच्चा नहीं था। कार्यकर्ता राधा देवी ने बताया कि बच्चे लेने जाने और बुलाने का कार्य सहायिकाओं का है। बच्चों को अभिभावक कोरोना के डर से नहीं भेज रहे हैं। प्रभारी सीडीपीओ सोनिया ने बताया कि 1 अक्तूबर से बच्चों को बुलाना शुरू कर दिया है। कार्यकर्ताओं को प्रतिदिन ग्रुप पर सूचना देने और बच्चों को भेजने के लिए अभिभावकों को प्रेरित करने के लिए कहा गया है। पोषाहार सभी केंद्रों पर भेजा जा चुका है।
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